<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824</id><updated>2012-01-06T13:12:28.665-08:00</updated><category term='Relations'/><category term='Environment'/><category term='Economy'/><category term='Election'/><category term='Obituary'/><category term='Crime'/><category term='मीडिया Trends'/><category term='Bureaucracy'/><category term='film'/><category term='Transport'/><category term='Security'/><category term='Social Issue'/><category term='Sports'/><category term='Religion'/><category term='Education'/><category term='Accident'/><category term='Festival'/><category term='Wildlife'/><category term='Media'/><category term='Politics'/><title type='text'>निशब्द : नितेश के शब्द</title><subtitle type='html'></subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>85</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-8224893487530421875</id><published>2012-01-06T12:58:00.000-08:00</published><updated>2012-01-06T13:00:33.667-08:00</updated><title type='text'>वापस आ रहा हूं..</title><content type='html'>न जाने २०११ में क्यूं कुछ लिख ना सका, इस साल २०१२ में बहुत बातें कहनी है, करनी है अपने इस निशब्द के माध्यम से...&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-8224893487530421875?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/8224893487530421875/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=8224893487530421875' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8224893487530421875'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8224893487530421875'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2012/01/blog-post.html' title='वापस आ रहा हूं..'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-484063839465113587</id><published>2010-03-09T08:57:00.000-08:00</published><updated>2010-03-09T09:05:47.770-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Sports'/><title type='text'>हॉकी का हाशिये पर जाना.......</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt; हॉकी विश्व कप की सेमीफाइनल की दौड़ से भारत अपने तीसरे लीग मैच में हारने के साथ ही बाहर हो गया था। पाकिस्तान के खिलाफ शानदार जीत के साथ टूर्नामेंट की शुरूआत करने वाली मेजबान टीम का मैच दर मैच ऐसा हश्र होना कोई अचंभे वाली बात नहीं थी। विश्व कप जैसे प्रतिष्ठित मुकाबले के शुरू होने से ठीक पहले ही पैसे के विवाद को लेकर भारतीय हॉकी टीम ने अभ्यास करने से इंकार कर देना, शीर्ष चार खिलाड़ियों के बीच कप्तानी को लेकर तनातनी,विश्व कप से पहले किसी अंतर्राष्ट्रीय मुकाबले का ना होना - इन सब कारणों से टीम से कप की उम्मीद लगाना जायज नहीं था। &lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5446680565555191442" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 128px; CURSOR: hand; HEIGHT: 85px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_Ne2PWsiroEg/S5Z_Hdrw3pI/AAAAAAAADPk/Y-g8eji7Q0M/s320/images.jpg" border="0" /&gt;&lt;br /&gt;भारतीय हॉकी टीम का समर्थन करने वाले घरेलू दर्शकों को एक मैच की जीत के बाद बाकी मैचों में हार के कारण निराशा का सामना करना पड़ा। हालांकि विश्व कप के दौरान दर्शकों की भीड़ जुटाने के लिए आयोजकों द्वारा एड्-कैंपेन चलाया गया था। क्रिकेटर विरेन्दर सहवाग, अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा और शूटर राजवर्धन सिंह राठौड़ का सहारा लेना पड़ा, वो भी देश के राष्ट्रीय खेल के लिए भीड़ जुटाने के लिए- ये अपने आप में खेल के प्रति दर्शकों की उदासीनता का प्रतीक है और तो और, अभी तक विश्व कप के दौरान बाकी मैचों में दर्शकों की उपस्थिति भी काफी कम ही दिखी। दर्शक-दीर्घा में मुख्य रूप से विदेश में रहने वाले भारतीय लोगों ने ही मैच देखने में रूचि दिखायी। कुछ पूर्व हॉकी खिलाड़ियों ने भी मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में आकर अपने ही देश में अपने खेल का बुरा हाल होते देखा और साथ ही हॉकी के जादूगर ध्यानचंद के बूत को स्टेडियम के बाहर देख पुरानी सुनहरी यादों को कुछ पल के लिए याद किया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पिछले दो साल से भारतीय हॉकी के साथ जो बाहरी खेल खेला जा रहा है- ये बात किसी से छुपी नहीं है। अच्छे खेल प्रशासक की कमी से जूझता राष्ट्रीय खेल भले ही अपने इतिहास पर गर्व कर ले, लेकिन कब तक इतिहास की सुनहरी यादों के भरोसे ही भविष्य की तस्वीर बनाते रहेंगे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भारतीय टीम को एक पेशेवर कोच के रूप में स्पेन के कोच होसे ब्रासा को नियुक्त करने की सलाह अंतर्राष्ट्रीय हॉकी फेडरेशन के अध्यक्ष लिनदरो नेग्रे ने ही दिया था, लेकिन वो भी कुछ कमाल ना दिखा सके। वैसे इससे पहले दो साल के भीतर टीम इंडिया ने दर्जनों कोच को आजमा कर देख लिया था। स्पेन की महिला टीम को ओलंपिक चैंपियन बनाने वाले ब्रासा से करिश्मे की उम्मीद तभी करनी चाहिए थी जब अपने खिलाड़ी खेल को खेल की तरह खेलते।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुल मिलाकर भारतीय टीम ने विश्व कप के दौरान अपने खेल से खेल-प्रेमियों को निराश ही किया। सेमीफाइनल में ना पहुँचने की टीस को आगामी राष्ट्रमंडल खेल के दौरान अच्छा खेल खेलकर दूर किया जा सकता है और इसके लिए टीम के पास अभ्यास करने के लिए अच्छा समय भी है और मौका भी। अगर टीम अपना पुराना गौरव हासिल करना चाहती है तो पौराणिक फिनिक्स पक्षी के भांति अपनी राख से ही फिर से उत्पन्न होना होगा। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-484063839465113587?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/484063839465113587/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=484063839465113587' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/484063839465113587'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/484063839465113587'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2010/03/blog-post_09.html' title='हॉकी का हाशिये पर जाना.......'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_Ne2PWsiroEg/S5Z_Hdrw3pI/AAAAAAAADPk/Y-g8eji7Q0M/s72-c/images.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-8024916840096600631</id><published>2010-03-08T06:50:00.000-08:00</published><updated>2010-03-08T07:13:50.296-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Politics'/><title type='text'>महिला दिवस के दिन भी महिला आरक्षण कानून  करता रहा इंतजार</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;महिला आरक्षण बिल  कानून बनने का 13 साल से इंतजार कर रहा है। आखिरकार राज्य सभा में आज 100वें अंतर्राष्ट्रीय  महिला दिवस के अवसर पर देश की विधायिका में महिलाओं का 33।3 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने वाला बिल पेश कर ही दिया गया। तेरह साल के लंबे जद्दोजहद के बाद महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में अपना प्रतिनिधित्व बढ़ाने और सुनिश्चित करने का सुनहरा मौका मिलने वाला है। &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;em&gt;बिल का अस्तित्व में आना-&lt;/em&gt; संसद और राज्य विधान सभाओं में महिलाओं को 33.3 प्रतिशत आरक्षण देने वाला यह विधेयक एच.डी.देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली संयुक्त मोर्चा  (यूनाईटेड फ्रंट ) सरकार के कानून मंत्री रमाकांत खलफ ने 12 सितंबर 1996 को लोकसभा में पेश किया था। इसे वाम नेता गीता मुखर्जी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति को सौंप दिया गया। इस बिल को संसद में कई बार पेश किया गया था लेकिन आज तक पारित नहीं किया जा सका है। गुजराल  सरकार के कार्यकाल में उनके अपने ही दल के सदस्यों ने इसका विरोध किया। एनडीए शासनकाल में भी बिल को दो बार - 1998 और 1999 में संसद में पेश किया गया, लेकिन इसे कामयाबी हासिल ना हो सकी। 1999 में तो तब के कानून मंत्री राम जेठमलानी ने जब इस बिल को पेश करना चाहा तो राजद के एक सांसद ने बिल को उनके हाथ से छीन लिया। इसी तरह जब 2008 में कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने राज्यसभा में लाना चाहा तो उन्हें कांग्रेसी नेता वी। नारायणसामी और रेणुका चौधरी ने घेर लिया था ताकि यह घटना फिर ना दोहरायी जा सके। &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;em&gt;बिल के प्रावधान&lt;/em&gt;- इस बिल के आने से विधायिका के सभी स्तर- लोकसभा, राज्य विधान सभा से लेकर स्थानीय निकाय  तक तीनों स्तर में महिलाओं को 33।3 प्रतिशत आरक्षण मिल जाएगा। अगर यह बिल पारित हो जाएगा तो राष्ट्रीय , राज्य और स्थानीय स्तर पर विधायी स्तर पर सभी  उपलब्ध सीटों का एक-तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित  हो जाएगा। इसमें एक-तिहाई आरक्षण अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के महिलाओं के लिए भी होगा।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;आज राज्यसभा में भी बिल पेश करने के दौरान कुछ सांसदों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। इस बिल का विरोध करने वाले दलों को इस बात का डर है कि अगर इसे  वर्तमान स्वरूप में पास किया गया तो उनके कई नेताओं को चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिल सकेगा। पिछड़े और कमजोर तबकों से आनेवाले नेताओं का मानना है कि यह बिल सिर्फ उच्च वर्ग की महिलाओं को ही फायदा पहुँचायेगा।&lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;लेकिन इसका समर्थन करने वालों का मत है कि इससे संसद में लिंग-समानता को बढ़ावा मिलेगा। वैसे भी भारत में महिलाओं की स्थिति अच्छी नहीं है और इस प्रकार मिलनेवाली राजनीतिक सहभागिता उनकी स्थिति में व्यापक सुधार लाएगी, साथ ही साथ अब तक उन्हें जो भेदभाव का सामना और असमानता देखी है उससे लड़ने में मदद मिलेगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-8024916840096600631?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/8024916840096600631/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=8024916840096600631' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8024916840096600631'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8024916840096600631'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2010/03/blog-post.html' title='महिला दिवस के दिन भी महिला आरक्षण कानून  करता रहा इंतजार'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-8733895832446688086</id><published>2010-02-25T09:28:00.000-08:00</published><updated>2010-02-25T09:38:30.093-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Sports'/><title type='text'>Sachin Ton(dual)kar</title><content type='html'>&lt;p align="justify"&gt;सचिन २०० नॉट आउट..... दिल तो बच्चा है जी &lt;/p&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5442235628627756114" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 206px; CURSOR: hand; HEIGHT: 116px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_Ne2PWsiroEg/S4a0eFRVBFI/AAAAAAAADPY/n5j6rbEpVzg/s320/sachin+200%3D.bmp" border="0" /&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="justify"&gt;ग्वालियर के  रूपसिंह स्टेडियम में सचिन तेंदुलकर ने 50 वें ओवर की तीसरी गेंद पर जब दौड़ कर एक रन लिया.. तो 39 साल से चला आ रहा क्रिकेट-प्रेमियों का एक बड़ा सपना पूरा हो गया- वन-डे क्रिकेट में किसी एक खिलाड़ी के बल्ले से 200 रन बनने का सपना। और जब यह कारनामा क्रिकेट के भगवान... और ना जाने किन-किन विशेषणों से अलंकृत...... सचिन तेंदुलकर के बल्ले से हुआ तो क्रिकेट प्रेमियों ने राहत की साँस ली। अभी हाल में ही ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 175 रन की पारी खेलने वाले सचिन से यह उम्मीद उनके उम्र के 37वें पड़ाव में करना इतना आसान नहीं था। पिछले साल ही जिम्बाब्वे के चार्ल्स कोवेंटरी ने जब सईद अनवर के सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर का रिकार्ड की बराबरी करते हुए अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज कराया था... तब भी यह एक सपना ही था।&lt;br /&gt;तेरह साल पहले 1997 में सईद अनवर ने भारत के खिलाफ 194 रन का रिकार्ड बनाया था। उससे पहले भी यह रिकार्ड भारत के खिलाफ तेरह साल पहले विवियन रिचर्ड ने 1984 में 189 रन बनाकर स्थापित किया था।&lt;br /&gt;194 रन का रिकार्ड तो लिटिल मास्टर ने 46वें ओवर में ही तोड़ दिया था, उसके बाद सबकी नजर उन रनों पर थी जिसे इतिहास के पन्नों में दर्ज होना था। ऐसे वक्त में एक या दो रन लेकर 200 तक पहुँचना- जितना हमारे लिए सुकून पहुँचाने वाला था, उतना ही मास्टर ब्लास्टर के लिए भी। फिर तो शुरू हो गया बधाई देने का सिलसिला। मोबाइल पर संदेश आने लगे। निजी खबरिया चैनलों के लिए तो रेल बजट पर सचिन का 200 रन की बोगी भारी पड़ गयी। यह अलग बात है कि ममता दीदी ने भी सचिन को बधाई दी, लेकिन सचिन ने अखबार की सुर्खियों से लेकर टीवी चैनल की लीड स्टोरी सभी जगह ममता बनर्जी की बजट की छुट्टी कर दी।&lt;br /&gt;खेल के प्रति इतना जुनून निश्चय ही आने वाली पीढ़ी के युवा खिलाड़ी के लिए पाना एक कठिन चुनौती होगी। सचिन का 20 वर्षों तक खेलना... यह भी अपने आप में किसी चमत्कार से कम नहीं है। श्रीकांत, कपिल देव और रवि शास्त्री से लेकर आज के दिनों में पदार्पण करने वाले युवा खिलाड़ी भी आने वाले दिनों में अपने पोते-पोतियों को बताया करेंगे कि मैं भी सचिन के साथ खेल रखा हूँ। सचिन के समकालिक खिलाड़ियों की सूची बनायी जाएगी तो यह इतनी लंबी होगी कि जिसमें विश्व के कितने खिलाड़ी आ जायेंगे। अब जब सचिन इतने अच्छे फार्म में है तो हमारा भी मन करता है कि वो अभी और खेले.. लेकिन वो भली-भाँति जानते है कि कब उन्हें बल्ला टाँगना है और कब उनकी फिटनेस लेवल उनका साथ नहीं देने वाली है।&lt;br /&gt;अब कल की ही बात लीजीए.. जब 50 ओवर पूरे खेलने के बाद जब प्रेजेंटेशन सेरेमनी में कमेंटेटर रवि शास्त्री ने पूछा कि ऐसी इनिंग अब आप और खेलना चाहेंगे। तब सचिन ने कहा था कि 50 ओवर की ऐसी पारी खेलने का मौका मिला तो जरूर खेलूँगा। अब भी सचिन का दिल खेलने के बच्चा है। और जब तक ये बच्चा यूँ ही खेलते रहेगा.... खेल-प्रेमियों के लिए तो चाँदी ही चाँदी है।&lt;br /&gt;( पिछली बार ग्वालियर के रूप सिंह स्टेडियम में सचिन शतक से चूके थे तो एक ब्लॉग  लिखा था। अब जाकर इसी स्टेडियम में इतिहास लिखना, उस दर्द को भूलाने जैसा है। लिंक है- &lt;a href="http://nisshabd.blogspot.com/2007/11/blog-post_16.html"&gt;http://nisshabd.blogspot.com/2007/11/blog-post_16.html&lt;/a&gt;)&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-8733895832446688086?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/8733895832446688086/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=8733895832446688086' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8733895832446688086'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8733895832446688086'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2010/02/sachin-tondualkar.html' title='Sachin Ton(dual)kar'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_Ne2PWsiroEg/S4a0eFRVBFI/AAAAAAAADPY/n5j6rbEpVzg/s72-c/sachin+200%3D.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-5848086840320448084</id><published>2009-11-28T01:45:00.000-08:00</published><updated>2010-01-14T10:04:49.277-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Education'/><title type='text'>कैट की परीक्षा को पहले ही दिन देना पड़ा टेस्ट</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;देश में पहली बार कंप्यूटर ऑनलाइन संयुक्त प्रवेश परीक्षा यानी कैट शुरू तो हुयी, लेकिन सर्वर में ओवरलोडिंग के कारण पहले दिन की पहले सत्र की परीक्षा में बाधा देखने को मिली. पहली बात तो जब हमारे यहाँ किसी परीक्षा का परिणाम देखने की बात हो या परीक्षा सम्बन्धी ऑनलाइन फॉर्म भरने की बात होती है, तब भी छात्रों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है. यहाँ तो पूरी एक परीक्षा देने की बात है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भारतीय प्रबंधन संस्थानों में प्रवेश के लिए इस परीक्षा में दो लाख चालीस हज़ार छात्र भाग ले रहे है. यह परीक्षा अमेरिका की एक कंपनी करा रही है. प्रोमीट्रीक नाम की कंपनी दस दिनों तक इस परीक्षा को कराएगी. पहले दिन ही जब यह आलम है, तो आगे क्या होता है, इसे देखते जाईयें. निश्चय ही ऑनलाइन परीक्षा कराकर हम एक कदम आगे हो रहे हैं, लेकिन उन छात्रों का क्या जो की कंप्यूटर से या तो परिचित नहीं हुए है या नए नए हैं इसे सीखने वाले. उनके लिए तो छोडिये, उन छात्रों को भी परीक्षा देने में समस्या आ रही थी, जो दिन भर कंप्यूटर पर डंटे रहते है. इसके लिए कम से कम एक माक टेस्ट होना चाहिए था.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पहले दिन पहले सत्र में जिन छात्रों ने परीक्षा दी हैं और उनके केंद्र पर सर्वर में किसी तरह की गड़बड़ी आयी है, तो अब इस बात पर यह निर्भर करता है कि उनके दिए गए जवाब रिकावर हो पाते है की नहीं. साथ ही साथ पहली बार हो रहे ऐसे टेस्ट को भी कई टेस्ट से गुजरना होगा.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-5848086840320448084?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/5848086840320448084/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=5848086840320448084' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5848086840320448084'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5848086840320448084'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2009/11/blog-post_28.html' title='कैट की परीक्षा को पहले ही दिन देना पड़ा टेस्ट'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-576736127907462961</id><published>2009-11-06T01:31:00.000-08:00</published><updated>2010-01-14T10:05:13.963-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Sports'/><title type='text'>बर्लिन की दीवार के ढहने और सचिन के क्रिकेट का टावरिंग फिगर बनने के बीस साल....</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;9 नवंबर 1989 को पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के बीच की दीवार ढ़ह गई थी और इसके छह दिन के बाद 15 नवंबर 1989 को वहां से मीलों दूर पाकिस्तान के कराची में भारत की तरफ से सचिन तेंदुलकर नाम के 16 वर्षीय खिलाड़ी ने क्रिकेट जगत में पदार्पण किया। दोनों घटनाओं को बीस साल होने जा रहे है। दो दशकों से जहां एक तरफ सचिन ने क्रिकेट के टावरिंग फिगर बनने में और अपने खेल से सारे देश को जोड़ने का काम किया, उसी तरह बीस साल पहले दोनों जर्मनी के बीच 28 साल पुरानी दीवार के टूटने के बाद उन दोनों देशों को जोड़ने का काम किया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;शीत युद्ध के प्रतीक के रूप में खड़ी जर्मनी की दीवार का ढ़हना उस वक्त की निश्चय ही सबसे बड़ी ऐतिहासिक घटना थी। लेकिन सचिन का टेस्ट में 16 साल में डेब्यू करना यानि सबसे कम उम्र का टेस्ट खिलाड़ी होना ही उस वक्त की खासियत थी। अब क्या पता कि बीस साल बाद जब हम उस वक्त की दोनों घटनाओं को एक साथ देखते हैं तो पाते है कि सचिन अब उस दीवार की माफिक हो गये है, जिससे बड़ी दीवार क्रिकेट जगत में खड़ा करना अभी निकट भविष्य में खड़ी होना संभव तो नहीं दिखता है। बर्लिन में बीस साल बाद एकीकृत होने की खुशी एमटीवी यूरोप म्यूजिक एॅवार्ड के रूप में मनायी जाएगी, जिसमें पॉप स्टार बेयोंस और हिप हॉप कलाकार जेज अपनी-अपनी प्रस्तुति देंगे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बीस साल के लंबे कैरियर में सचिन ने कल ही हैदराबाद में 175 रन की यादगार पारी खेली, अपना 45 वां शतक जमाया, एकदिवसीय मैचों में 17 हजार रन पूरे किए और जब खेल के बाद उनसे पूछा गया कि क्या है जो उन्हें अब तक खेलने को प्रेरित करता है, तो जवाब था खेल के प्रति पैशन। इसी पैशन के साथ जब पूर्वी जर्मनी में 4 नवंबर को दीवार का विरोध करने वालों ने मार्च किया, तो 9 नवंबर को दोनों देशों की सीमाएं एक-दूसरे के लिए खोल दी गयी, तब से लेकर आजतक एकीकृत जर्मनी की प्रगति को आप विश्व-पटल पर आसानी से देख सकते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सचिन के क्रिकेट-कैरियर में कितने ही 'फर्स्ट' और 'मोस्ट' शामिल है, जब वे अपना बल्ला टांगेंगे तब तक ना जाने ऐसे कितने ही 'फर्स्ट' और 'मोस्ट' इनके रिकॉर्ड शामिल हो जायेंगे। उसी प्रकार ही आधुनिक विश्व इतिहास (दूसरे विश्व युद्ध के बाद) में जहां देशों का विघटन होना आम बात है, वैसी स्थिति में किसी दो देशों का एकीकृत होना हमारे सामने तो 'फर्स्ट' घटना है और साथ ही साथ 'मोस्ट' यादगार घटना भी है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सचिन यूँ ही अपना कद बढ़ाते रहे और जर्मनी का एकीकरण भी बाकी देशों के लिए आने वाले समय में मिसाल बने... ज्यादा से ज्यादा ये कामना तो हम कर ही सकते है।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-576736127907462961?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/576736127907462961/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=576736127907462961' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/576736127907462961'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/576736127907462961'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2009/11/blog-post.html' title='बर्लिन की दीवार के ढहने और सचिन के क्रिकेट का टावरिंग फिगर बनने के बीस साल....'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-8693770952362031778</id><published>2009-10-29T20:28:00.000-07:00</published><updated>2010-01-14T10:05:39.125-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='film'/><title type='text'>फाल्के पर फिल्म, वो भी जब सौ साल पूरे होने को हैं....</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;भारत में फिल्मों की शुरूआत करने वाले शख्स- धुंडीराज गोविंद फाल्के यानि दादा साहब फाल्के। उन्होंने कैसे इन चलती चित्रों की शुरूआत भारत में की, इस विषय को बड़ी रोचकता से बड़े पर्दे पर उभारने का काम किया है मराठी फिल्मकार परेश मोकाशी ने। मराठी फिल्म हरिश्चंदाची फैक्ट्री (हरिश्चंद की फैक्ट्री) के माध्यम से भारतीय फिल्मों के जनक दादा साहब फाल्के के विषय में काफी कुछ जाना जा सकता है। एक तरह से यह फिल्म उनके प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि भी हैं।&lt;br /&gt;भारत की पहली फिल्म राजा हरिश्चंद को बनाने में दादा साहब फाल्के को किस-किस तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा- इस विषय को इस फिल्म में बखूबी दिखाया गया है। 1911 में फाल्के जब जर्मन जादूगर से सीखा हुआ जादू दिखाने का काम करते थे, इसी क्रम में वहां से भागते हुए एक टेंट में अंग्रेजों को कुछ नया नाटक या कुछ चीज देखते हुए देखा। बेटा के मना करने के बाद भी दो आना का टिकट खरीद पहली बार चलती हुई तस्वीरों को उजले पर्दे पर देखा। ईसा मसीह पर बनी फिल्म को देखकर वे इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने भी भारतीय देवी-देवताओं को उजले पर्दे पर चलती चित्रों के माध्यम से दिखाने का निश्चय उसी वक्त कर लिया। इसी चीज ने उन्हें फिल्म बनाने की प्रेरणा दी।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5398232183632925266" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 219px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_Ne2PWsiroEg/SupfkeiFklI/AAAAAAAADHE/U7medBqW0Rs/s320/picture-141.png" border="0" /&gt;इन चलती हुई तस्वीरों को समझने के बार-बार सिनेमा देखना, इसे सीखने के लिए पहले प्रोजेक्टर रूम में जाकर समझना, किताबों को खरीदना और यही जूनुन उन्हें लंदन ले जाता है। पूरे तथ्यों को कुछ कॉमेडी का पुट देते हुए फिल्म में काफी अच्छे तरीके से दिखाया गया है।&lt;br /&gt;इस नयी विधा को सीखने के लिए दादा साहब को किस किस तरह की मुसीबतों का सामना करना पड़ा, इस चीज को इस फिल्म में भले ही दिखाया गया हो, लेकिन इस चीज पर सिनेमा जगत का ध्यान भारत में फिल्मों के 100 साल पूरे होने जा रहे है, तब यह चीज हमें देखने को मिल रही है।&lt;br /&gt;ओसियान फिल्म फेस्टिवल के दौरान पॉपुलर डिमांड के कारण फिल्म की स्क्रीनिंग एक बार फिर से हुई, तब जाकर यह फिल्म देखने का मौका मिला। फिल्म खत्म होने के बाद तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा सभागार गूँज उठा। फिल्म के निर्देशक, निर्माता और मिस्टर और मिसेज की भूमिका निभाने वाले कलाकारों को मिलने वाला स्टैंडिंग ओवेशन इस बात को सिद्ध कर रहा था कि वाकई फिल्म काफी अच्छी थी। इस फिल्म ने उस दौर (1911-1930) को जीवीत कर दिया था, जिस वक्त भारतीय फिल्म की फैक्ट्री की नींव पड़ी और इसकी नींव को डालने वाले व्यक्ति की जीवटता को भी इस बखूबी से चित्रित किया कि यह फिल्म दर्शकों को बहुत कुछ सोचने को मजबूर करती हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-8693770952362031778?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/8693770952362031778/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=8693770952362031778' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8693770952362031778'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8693770952362031778'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2009/10/blog-post_29.html' title='फाल्के पर फिल्म, वो भी जब सौ साल पूरे होने को हैं....'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_Ne2PWsiroEg/SupfkeiFklI/AAAAAAAADHE/U7medBqW0Rs/s72-c/picture-141.png' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-7818163016993761565</id><published>2009-10-26T02:19:00.000-07:00</published><updated>2010-01-15T08:52:15.043-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Transport'/><title type='text'>डीटीसी में सफ़र करना हुआ महँगा</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार का दिल्लीवासियों को दीवाली और छठ का तोहफा.. अब आपको एक जगह से दूसरे जगह सफर करने के लिए अपनी जेब से ज्यादा खर्च करना होगा। अब तक चले आ रहे डीटीसी में चार स्लैब वाला भाड़ा 3,5,7,10 रूपये की जगह यह अब तीन स्लैब में 5,10,15 रूपये का हो गया हैं। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि सरकार को डीटीसी का घाटा पूरा करना है। डीटीसी को वित्तीय वर्ष 2008-09 के दौरान 575 करोड़ रूपये का घाटा हुआ था। सरकार को भाड़ा बढ़ाने से सालाना 400 करोड़ रूपये का फायदा होगा।&lt;br /&gt;अब दिल्ली में एक जगह से दूसरे जाने में तीन किलोमीटर तक 5 रूपये, तीन से दस किलोमीटर का सफर करने के लिए यात्रियों को 10 रूपये और इससे ऊपर की यात्रा करने में 15 रूपये खर्च करने होंगे। यह ब्लॉग लिखे जाने तक दिल्ली की सड़कों पर दौड़ने वाली ब्लूलाइन बसों के सभ्य सरीखे से बढ़ा हुआ भाड़ा वसूलने भी शुरू कर दिया होगा। अब तो ब्लूलाइन के मालिकों की कुछ दिनों के लिए ही सही चांदी तो हो गयी। जब तक इन बसों को सड़कों से हटाया जाएगा, तब तक तो इनके मालिकों के साथ-साथ ड्राईवर और कंडक्टरों की तो बल्ले-बल्ले है।&lt;br /&gt;सरकार ने ये कदम भले ही डीटीसी का घाटा पूरा करने के लिए उठाया हो, लेकिन इससे यात्रीगण अब मेट्रो के सफर को ज्यादा तरजीह देंगे। जो कि मेट्रो के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन वहां भी यात्रियों की संख्या बढ़ने के कारण काफी परेशानी आने वाली हैं।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-7818163016993761565?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/7818163016993761565/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=7818163016993761565' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/7818163016993761565'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/7818163016993761565'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2009/10/blog-post_26.html' title='डीटीसी में सफ़र करना हुआ महँगा'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-5294508409188625343</id><published>2009-10-23T09:45:00.000-07:00</published><updated>2010-01-15T06:07:46.547-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Festival'/><title type='text'>सीतामढी की छठ</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;लोक-आस्था के पर्व छठ की धूम बिहार राज्य के किसी भी गाँव-शहर में देखने को मिल जायेगी. बात करते है सीतामढी में लक्ष्मणा नदी के तट पर की जाने वाली सूर्य उपासना की. सबसे पहले तो यह बता दूँ की नदी को आम बोल-चाल की भाषा में लखनदेई के नाम से जाना जाता है.. और नदी के तट पर ही सूर्य मंदिर स्थित है, जिसमे साल भर में कम से कम एक बार तो चहल-पहल रहती ही हैं. सज्जन पूजा समिति हो या छठ पूजा समिति- दोनों समितियां शहर में नदी किनारे घाटों पर, पुल पर साथ ही साथ सड़क पर काफी दूर तक लाइटिंग की व्यवस्था करती है, जिससे की शहर का मुख्य हिस्सा रौशनी से जगमगा उठता है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;घाटों पर सप्ताह-दस दिन पहले से ही लोग अपने अपने एरिया को रेखांकित कर देते है, जहाँ पर वो संझिया घाट और भोरिया घाट पर सूर्य भगवान् को अर्घ्य दे सके. जगह को घेरने के लिए भी काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है. जगह घेर लेने का बाद वहां टेंट लगाना. बड़ी बड़ी चौकियों को ठेले पर लाकर घाट के किनारे लगाना, जिस पर पूजा सम्बन्धी सामग्री डाला में रख इन चौकियों पर करीने से लगाया जाता है. अस्सी के दशक में लोग अपने दुकानों के बैनर बनवाकर टेंट पर लगवा देते थे, जिससे की उनके व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का प्रचार भी हो जाता और सगे सम्बन्धियों को अपना टेंट खोजने में परेशानी भी नहीं होती. लेकिन अब जब की प्रचार की इतनी जरुरत है, ऐसे प्रचार-युग में लोग ऐसा नहीं कर रहे... यह मेरी समझ से बाहर है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;विश्व मैं छठ ही ऐसा एक पर्व हैं जिसमें न सिर्फ उगते हुए, बल्कि डूबते हुए सूर्य की भी पूजा की जाती है। और सबसे पहले डूबते सूर्य की पूजा ही होती है। लखनदेई नदी के दोनों किनारे लगने वाले टेंट में श्रद्धालुओ की भीड़ देखने लायक होती हैं. टेंट में समूह में गीत गाती महिलाएं, बाहर नदी के किनारे वाले इलाके में पटाखे जलाते बच्चे, लाउडस्पीकरों पर बार बार सावधानी से पटाखा छोड़ने की सूचना लोकगीतों और भजनों के बीच आते रहती है. पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता हैं. शाम के वक़्त सूर्य को अर्घ्य देने के बाद जल्दी-जल्दी घर की ओर लौटते लोग.. सुबह जल्दी आने के लिए. वैसे शाम के वक़्त बाज़ार में कुछ खट्टा-मीठा खाने की ललक किरण सिनेमा चौक और उनके आस-पास लगने वाली दुकानॉ पर या बसुश्री सिनेमा के पास लगने वाली नयी दूकानों पर लोगों की भीड़ खींची चली आती है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सुबह जल्दी उठकर ठण्ड के शुरूआती दिन में स्नान कर घाट पर जाने के लिए घर से निकलते लोग.. घाटों से आती लोक संगीतो की गूँज, रौशनी से जगमगाती सड़के और नदी के किनारे के घाट. पुल से जाकर नदी का नजारा देखते ही बनता है. नए नए कपडो में घाट पर आते लोग. लोगों की संख्या बढ़ने के कारण घाट का विस्तार लीची बगान की तरफ सरस्वती विद्या मंदिर की बिल्डिंग तक और बाईपास वाले पुल की तरफ मोक्ष-धाम के आगे तक टेंट का विस्तार देखते ही बनता है. अब तो एक छोड़ से दूसरे छोड़ तक जाने में काफी समय लगाने के कारण जाना संभव ही नहीं हो पाता.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हमारे लिए या यूँ कहे की हम युवाओं के लिए घाट के किनारे पुल पर भोरिया अर्घ्य के दिन घूमने के अलावा लिटरली कोई काम नहीं होता था. हाँ, सूर्य के उदय होने के समय जल देकर प्रसाद लेना तो नहीं ही भूलते थे. वैसे भी सज्जन पूजा समिति के उदघोषक की आवाज़ आज भी कानो में ताजा है- बाँध पर श्रद्धालु भीड़ नहीं लगाये, चलते-फिरते नज़र आये. भगवान् भास्कर को जल देने के बाद घाट पर प्रसाद लेने के बाद घर लौटने के क्रम में सबसे पहला काम पैरों को धोने का काम जानकी प्लेस के कल पर धोने के काम करना होता हैं. फिर वापस लौटना.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुछ ऐसी ही होती है हमारे शहर में छठ पर्व की चहल-पहल. इस बार भी कमोबेश यही चहल-पहल होगी. कर्म-भूमि पर दीपावली मानाने वाले मातृ भूमि पर छठ पर्व मनाने के लिए जरुर जाते है. यही आस्था है. यही लोग है जो कहीं भी हो अपने जड़ो से जुड़े रहने का सबूत हर साल देते ही हैं.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-5294508409188625343?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/5294508409188625343/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=5294508409188625343' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5294508409188625343'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5294508409188625343'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2009/10/blog-post.html' title='सीतामढी की छठ'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-5984663271359460183</id><published>2009-10-21T17:06:00.000-07:00</published><updated>2010-01-15T08:53:32.558-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Media'/><title type='text'>50 साल का हुआ दूरदर्शन</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;भारत में पत्रकारिता का इतिहास लगभग डेढ़ सौ साल पुराना है। पत्र-पत्रिका से शुरू होने वाली पत्रकारिता को समय-समय पर नये माध्यमों यथा- रेडियो, टेलीविजन और इंटरनेट ने एक नया आयाम प्रदान किया । इसी कड़ी में दृश्य-श्रव्य माध्यम के रूप में टेलीविजन ने भारत में 15 सितंबर 1959 को आधे घंटे के कार्यक्रम के साथ दस्तक दिया, तो किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि पचास साल के भीतर टेलीविजन देश में इतना लंबा सफर तय कर लेगा ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सन् 1959 में जब संयुक्त राष्ट्र के सांस्कृतिक और शैक्षिक संगठन यूनेस्को ने भारत सरकार को बीस हजार डॉलर और 180 फिलीप्स कंपनी के टीवी सेट्स दिए थे तब जाकर भारत में पहली बार इस जादुई बक्से का आगमन हुआ । पहली बार दिल्ली में दूरदर्शन पर आधे घंटे का कार्यक्रम प्रसारित हुआ था, तब से लेकर शुरूआत के दो दशक में इसकी विकास प्रक्रिया काफी धीमी रही । अस्सी के दशक की शुरूआत में एशियाई खेलों के प्रसारण, रंगीन टीवी सेट्स के आगमन और 1983 के क्रिकेट विश्व कप के प्रसारण ने तो लोगों में दूरदर्शन के प्रति एक गजब का आकर्षण पैदा किया । इसी दशक में प्रयोगधर्मिता के आधार पर शुरू हुए तरह-तरह के मनोरंजक, शैक्षणिक ,सामाजिक,धार्मिक कार्यक्रमों की शुरूआत कर दूरदर्शन ने दर्शकों के बीच अपनी गहरी पैठ बनायी । आज भी अगर टीवी धारावाहिकों की बात करे तो हमलोग, बुनियाद, नुक्कड़, मालगुडी डेज जैसे धारावाहिकों ने लोगों का मनोरंजन करते हुए सामाजिक ताना-बाना समझने में मदद की तो वहीं रामायण और महाभारत जैसे धार्मिक धारावाहिकों ने टीवी की लोकप्रियता और प्रचार-प्रसार में काफी अहम् भूमिका निभायी । सांस्कृतिक पत्रिका के रूप में सुरभि ने दर्शकों की सहभागिता में नए रिकॉर्ड बनाए । भारत एक खोज- जैसे धारावाहिकों ने देश के इतिहास की एक अनुपम तस्वीर प्रस्तुत की । अगर मनोरंजन के कार्यक्रमों की बात रविवार को प्रसारित होने वाली फिल्में और सप्ताह में दो दिन आने वाले फिल्मी गीतों के कार्यक्रम भी दर्शकों को खूब खींचते थे । कृषि-अर्थव्यवस्था वाले देश भारत में किसानों की समस्या को हल करने वाले कार्यक्रम कृषि-दर्शन ने भी किसानों का काफी मार्गदर्शन किया । इन सभी कार्यक्रमों ने उस वक्त दूरदर्शन को संपूर्णता प्रदान करने के साथ-साथ देश के सभी वर्गों की जरूरतों को पूरा करने का काम किया ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सार्वजनिक प्रसारणकर्ता के रूप में पचास साल पहले एक छोटे से ट्रांसमीटर से अपना कार्यक्रम शुरू करने वाला दूरदर्शन आज के दिन 31 चैनलों का प्रसारण करता है, जिसमें डीडी नेशनल, डीडी न्यूज़, डीडी भारती, डीडी स्पोर्ट्स, डीडी उर्दू और डीडी इंडिया प्रमुख हैं । इसके अलावा ग्यारह प्रादेशिक भाषाओं के चैनल और बारह राज्य नेटवर्क है । आज के दिन दूरदर्शन की अपनी डीटीएच यानि डायरेक्ट टू होम सेवा भी है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मनोरंजन के साथ-साथ अगर देश-दुनिया की खबरों से दृश्य-श्रव्य माध्यम पर रू-ब-रू कराने का काम पहले-पहल किसी ने किया तो वह दूरदर्शन ही हैं । 15 अगस्त 1965 को पहली बार समाचार बुलेटिन का प्रसारण किया गया था । प्रतिमा पुरी को देश की पहली समाचार-वाचिका होने का गौरव प्राप्त हैं। अस्सी-नब्बे के दशक में रात 8.40 पर प्रसारित होने वाला बुलेटिन ही हमें सबसे पहले उस वक्त की ताजा-तरीन खबरें देता था । यहाँ तक की उस समय के समाचार-वाचकों के नाम और तस्वीरें भी दर्शकों को अभी तक याद होंगी ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अपने पचास साल की विकास यात्रा के दौरान दूरदर्शन ने सूचना, शिक्षा ,मनोरंजन के विभिन्न कार्यक्रमों को देने के अलावा नब्बे के दशक में निजी चैनलों के आने के बाद भी अपना क्रमबद्ध विकास जारी रखा । दर्शकों की माँग को देखते हुए मनोरंजन के चैनल के रूप में डीडी मेट्रो , खेल चैनल के रूप में डीडी स्पोर्ट्स और अंर्तराष्ट्रीय दर्शकों के लिए डीडी वर्ल्ड (बाद में चलकर डीडी इंडिया) जैसे चैनल शुरू किए गए । निजी समाचार चैनलों के आने के बाद एक चौबीस घंटे के समाचार चैनल की आवश्यकता महसूस की गयी, इसी को देखते हुए 2003 में डीडी मेट्रो को डीडी न्यूज़ में परिणत कर दिया गया । आज के दिन डीडी न्यूज़ पर 19 घंटे लगातार समाचार और इससे जुड़े कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण होता हैं । जहाँ तक खबरों की विश्वसनीयता की बात है तो आज भी लोगों का भरोसा डीडी न्यूज़ पर ही हैं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;समय के अनुसार व जरूरत को देखते हुए दूरदर्शन ने अपने को तकनीक और प्रसारण की गुणवत्ता के मामले में अपने को बदलने की हरसंभव कोशिश की हैं । 1982 के एशियाई खेल ने जहाँ देश में रंगीन टेलीविजन के रूप में नयी चीज आयी थी, उसी तरह 2010 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों को एचडीटीवी (हाईडीफीनिशन टेलीविजन) पर प्रसारित किया जाएगा । इस तरह देश में नए सिग्नल पर प्रसारित होने वाले काम को पहली बार डीडी स्पोर्ट्स के द्वारा ही अंजाम दिया जाएगा ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पिछले पचास साल में लोक-प्रसारक के रूप में दूरदर्शन ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है । शुरूआत के दिनों से लेकर नब्बे के दशक के मध्य तक भारतीय दर्शकों के मन-मस्तिष्क पर इसने एक छत्रराज्य किया । निजी चैनलों के बाढ़ के बाद भी देश के 92 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या तक इसकी पहुँच हैं । दूरदर्शन आज के दिन भी लोगों की जरूरतों को पूरा करने के अलावा उन्हें सही ढंग से शिक्षित करने के अलावा स्वस्थ मनोरंजन प्रदान कर रहा हैं । अपने व्यावसायिक हितों को दरकिनार रखते हुए दूरदर्शन एक राष्ट्रीय लोक-प्रसारक के रूप में अपनी भूमिका बखूबी निभा रहा है और स्वर्ण जयंती वर्ष में यही आशा करते हैं कि आगे भी अपनी यह भूमिका और अच्छे ढ़ंग से निभाने का काम करेगा ।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-5984663271359460183?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/5984663271359460183/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=5984663271359460183' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5984663271359460183'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5984663271359460183'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2009/10/50.html' title='50 साल का हुआ दूरदर्शन'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-557819264364412107</id><published>2009-09-09T07:44:00.000-07:00</published><updated>2010-01-15T08:56:17.476-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Bureaucracy'/><title type='text'>समय-पाबंदी की संस्कृति का पालन भारतीय बाबुओं के द्वारा...</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;आप भी यह शीर्षक पढ़कर आश्चर्य कर रहे होंगे की यह कैसे संभव हैं? लेकिन यह संभव कर दिखाया है हमारे माननीय गृह मंत्री पी.चिदंबरम की अगुआई वाले गृह मंत्रालय ने..इसी माह की पहली तारीख से गृह मंत्रालय के सभी बाबुओं में इस बात की होड़ लगी रहती है किस तरह ऑफिस में समय से पहुँचा जाए वो भी सुबह के नौ बजे । जी हाँ, और इस काम में वे सफल भी हो रहे हैं क्योंकि अब यह नियम आ गया हैं कि अगर आप नौ बजे के बाद जितनी देर से आते हैं, उतनी देर आपको शाम में ऑफिस बीताने के बाद ही जाना होगा । अगर आपको यकीन नहीं आता तो आप मंत्रालय की बिल्डिंग के सुरक्षा गार्ड से पूछ सकते है । अब सभी बाबू लोग नौ बजे नियमित रुप से कार्यालय में आ जा रहे हैं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस शुभ काम की शुरूआत स्वयं माननीय गृह मंत्रीजी ने की, जब 1 सितंबर को चिदंबरम साहब नौ बजे कार्यालय पहुँचे और आने के साथ बायोमेटरिक मशीन पर अपनी तर्जनी के निशान के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करायी । जब मंत्री साहब ही समय का पालन कर रहे हैं, तो बाबूओं से भी यह आशा की जाती हैं कि वे समय पर आए । और वे समय पर आ भी रहे हैं ।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;भारतीय परिप्रेक्ष्य में समय-पाबंदी की संस्कृति शायद ही देखने को मिलती हैं । हम तो यहाँ तक भारतीय मानक समय का मानकीकरण कर चुके हैं कि अगर एकाध घंटे देर से नहीं पहुँचे या इतनी देर कार्यक्रम शुरु होने में नहीं लगा, तो लानत हैं हमारी समयनिष्ठा पर । इस कारण कितनी बार उन लोगों को शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है, जो समय पर आ जाते हैं । लेकिन इस तरह आज तक हम एक गलत परंपरा को ही प्रॽय देते रहे हैं । सरकारी विभागों से अगर ऐसी खबर आती हैं, तो यह निश्चय ही सुनने में अच्छा लगता हैं ।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-557819264364412107?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/557819264364412107/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=557819264364412107' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/557819264364412107'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/557819264364412107'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2009/09/blog-post.html' title='समय-पाबंदी की संस्कृति का पालन भारतीय बाबुओं के द्वारा...'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-5957430649005597678</id><published>2009-07-15T11:29:00.000-07:00</published><updated>2010-01-15T08:56:51.043-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Media'/><title type='text'>क्या आप में सच का सामना करने की हिम्मत हैं?</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;जी हाँ, अगर आप में हिम्मत हैं तो स्टार प्लस पर आज से शुरू हुए सीरियल 'सच का सामना' में भाग लेकर देखिये. मुख्य रूप से अमेरिकी टेलिविज़न शो ' मोमेंट ऑफ़ ट्रुथ' से इसका फॉर्मेट लिया गया है, वो भीकोलोम्बिया के एक टीवी शो से प्रभावित हैं. भले ही वैश्विक स्तर पर इसने सफलता हासिल की हो लेकिन इस सीरियल को अलग-अलग देशों में प्रतिबन्ध का सामना भी करना पड़ा. कोलोम्बिया, ग्रीस और जहाँ तक संभव हैं कुछ दिनों में आप भारत में भी इस पर प्रतिबन्ध लगा हुआ देख सकते हैं. पहले ही एपिसोड की प्रतिभागी स्मिता मथाई को जिन सवालों का सामना करना पडा शायद ही उन्होंने अपनी जिन्दगी में कभी सोचा होगा कि सार्वजनिक रूप से वो भी पूरे देश में देखा जाने वाला चैनल स्टार प्लस पर ऐसी ऐसी बातों को प्रकट करना पडेगा.&lt;br /&gt;कुछ पैसों के खातिर अपने रिश्तों को ताख पर रखकर चैनल का मकसद अगर टी आर पी हासिल करना हैं तो यह गलत हैं. भारतीय परिप्रेक्ष्य में यह सीरियल चल निकले, ऐसा कतई संभव नहीं हैं. सवालों के जरिये इमोशन से खेलना तो समझ में आता है, लेकिन सवालों का स्तर सेक्स और इससे सम्बंधित और मुद्दों पर चले जाए, ये बात फॅमिली के साथ बैठकर प्रतिभागी तो झेल सकता हैं, लेकिन घर पर बैठकर फॅमिली मेंबर नहीं झेल सकते हैं.&lt;br /&gt;सच एक हद तक ही सामने आये तो वही ही अच्छा होता हैं, क्योंकि हमारे शास्त्रों में भी कहा गया हैं - सत्यम ब्रूयात प्रियं ब्रूयात , ना ब्रूयात सत्याम्प्रियम&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-5957430649005597678?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/5957430649005597678/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=5957430649005597678' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5957430649005597678'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5957430649005597678'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2009/07/blog-post_15.html' title='क्या आप में सच का सामना करने की हिम्मत हैं?'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-3953064921541639074</id><published>2009-07-12T06:15:00.001-07:00</published><updated>2010-01-15T08:57:29.151-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Accident'/><title type='text'>लाइफ अंडर मेट्रो</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;रविवार की एक और सुबह. फिर वही हादसा. दिल्ली के दक्षिणी इलाके में एक बार फिर निर्माणाधीन मेट्रो पुल का हिस्सा टूट कर गिर गया, सुबह के पांच बजे घटी ये घटना सभी खबरिया चैनलों पर छः बजे से चलने लगी. लेडी श्री राम कॉलेज के पास घटी ये घटना लक्ष्मी नगर में घटी घटना की ही पुनरावृत्ति थी. लेकिन ये घटना बड़े पैमाने पर घटी हैं. रविवार, १९ अक्टूबर २००८ और आज रविवार १२ जुलाई २००९ - अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ कि वही लापरवाही सामने आई. शुक्र मनाइए कि दोनों घटना अहले सुबह घटी और दोनों बार रविवार का दिन था, इसलिए कम जान माल की क्षति हुयी. इस घटना को देखने से प्रथम दृष्टया तो यही लगा कि पिछली बार घटी घटना से कोई सीख नहीं ली गयी, उसी तरह नीचे कोई बेरिकेड्स देखने को नहीं मिले, कम समय में इतने बड़े निर्माण कार्य को अंजाम देने में ऐसी दुर्घटना होना आम बात मानी जाती होगी, लेकिन उन मजदूरों या राहगीरों का क्या जो इनके अन्दर आने से मारे जाते है. ऐसा भी नहीं है कि एक साल के भीतर ये ही दो घटनाएं हुयी है, छोटी बड़ी ना जाने कितने घटनाएं होती रही है, कितनी बार तो उन्हें दबा दिया जाता है, कितनी बार मीडिया में ना आने के कारण लोग जान नहीं पाते है. दोषारोपण का काम शुरू हो जाएगा, कुछ दिनों की जांच के लिए जिस रूट पर काम चल रहा था उसे रोक दिया जायेगा फिर जिम्मेदारी तय कर काम फिर से शुरू हो जायेगा. सीखने का कोई काम नहीं किया जायेगा. उन लाइफ का कुछ नहीं जो मेट्रो के अन्दर काम कर रही होती हैं, अगर बचना हुआ तो बच जाते है नहीं तो उन लाइफ का कुछ नहीं होना है. यही कहानी है लाइफ अंडर मेट्रो की.......जो बार बार दुहराती जाती जायेगी, लेकिन होना कुछ नहीं है.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-3953064921541639074?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/3953064921541639074/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=3953064921541639074' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/3953064921541639074'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/3953064921541639074'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2009/07/blog-post_12.html' title='लाइफ अंडर मेट्रो'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-2010909865455479555</id><published>2009-05-12T11:09:00.000-07:00</published><updated>2010-01-15T08:58:05.917-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Election'/><title type='text'>खलबली क्यूँ हैं मची ?</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;लोकसभा के अंतिम चरण के चुनाव के संपन्न होने के साथ ही शनिवार को होने वाली मतगणना पर सभी भारत वासियों की नज़रें टिकी हुयी है और इसके साथ ही छ्ठे चरण का श्री गणेश होगा और राजनीति में कोई दुश्मन नहीं होता, इस पर जमकर अमल होगा. ऊंट किस करवट बैठेगा कोई नहीं जानता, लेकिन प्रिंट से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सभी जगह इस बात को लेकर जमकर अटकलबाजियों का दौर शुरू है. प्रिंट वालों का कम स्पेस में ही काम चल जाता हैं, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वालों को तो मानो बुधवार से शनिवार तक इस पर खेलने का मौका मिल जाएगा. उनका खेल तो पहले से ही जारी है, आईपीएल बनाम आईपीएल, इंडियन पॉलिटिकल लीग वगैरह वगैरह. समय का जमकर सदुपयोग किया जा रहा हैं. अपने अपने आंकडों के साथ साथ टीवी पत्रकार खुद ही सर्वे एजेन्सी का काम कर रहे हैं और चैनल का पैसा भी बचा रहे हैं. ना जाने कैसी कैसी डील चल रही हैं. कुछ ऐसी चर्चा हो जाती जिसका फायदा आम आदमी को हो जाता, लेकिन ऐसा कुछ नहीं, समय को किसी तरह पूरा करना है. जैसे हिन्दी खबरिया चैनलों के दर्शक तो बस इन्हीं फालतू चीज़ों को देखने के लिए बैठे हुए हैं. शनिवार से पहले कुछ भी भविष्यवाणी करना सही नहीं होगा, क्योंकि पहले की तरह इसा बार भी सभी भविष्य वाणी धरी की धरी रह जायेगी. अभी तो चुनाव परिणाम आने के बाद क्या क्या समीकरण उभरते हैं ये तो उन दलों को भी मालूम नहीं जो इसमें प्रमुख भूमिका निभाएंगे.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-2010909865455479555?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/2010909865455479555/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=2010909865455479555' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/2010909865455479555'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/2010909865455479555'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2009/05/blog-post.html' title='खलबली क्यूँ हैं मची ?'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-146260579947862083</id><published>2008-10-30T03:48:00.000-07:00</published><updated>2010-01-15T08:59:21.057-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Sports'/><title type='text'>भारत विश्व-चैम्पियन बनने की राह पर..</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;आज के दिन जब राजनीतिक,आर्थिक और सामाजिक जगत से अच्छी खबर सुनने को नहीं मिल रही,वहीं खेल जगत से विश्व चैम्पियन बनने और विश्व चैम्पियन को धूल चटाने की खबर सुनने को मिल रही हैं.जहाँ एक तरफ भारत के ग्रैंड-मास्टर विश्वनाथन आनंद ने विश्व शतरंज चैम्पियन का खिताब बरकरार रखा हैं वहीं दूसरी तरफ भारत ने क्रिकेट के विश्व चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया को मोहाली टेस्ट में बुरी तरह हराने के बाद दिल्ली टेस्ट में पहली पारी में स्थानीय खिलाडी गौतम गंभीर और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शतक जमाने में माहिर वेरी वेरी स्पेशल लक्ष्मण के दोहरे शतकों की मदद से ६१३ रन का विशाल स्कोर खडा कर दिया हैं, यहां से भारत की जीतने की ही संभावना बनती हैं. अगर ऑस्ट्रेलिया अच्छा खेल गया तो ज्यादा से ज्यादा ड्रॉ होगा, हारेंगे तो नहीं.&lt;br /&gt;जर्मनी के बॉन में विश्वनाथन आनंद की ब्लादीमीर क्रेमनिक पर ६.५-४.५ अंकों की विजय पिछ्ले साल क्रेमनिक द्वारा की गयी इस टिप्पणी का करारा जवाब हैं जिसमें क्रेमनिक ने यह कहा था कि आनंद कागज पर भले ही विश्व चैम्पियन हो, लेकिन मेरे विचार से किसी एक मैच के जीतने से खिताब जीतना व एक टूर्नामेंट जीत खिताब जीतने में काफी फर्क होता हैं.आनंद ने इसका जवाब शतरंज के बिसात पर दिया और नाम के अनुरूप शतरंज में विश्वनाथन हो गये. निश्चय ही यह भारत के लिये एक ऐतिहासिक क्षण हैं.&lt;br /&gt;इसी तरह क्रिकेट में भी विश्व चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया के बडबोलेपन का भी जवाब टूर्नामेंट जीतकर ही देना चाहिये. मोहाली टेस्ट के हारने के बाद ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग का यह कहना कि हमें सीरिज में १-० से पिछ्डने की आदत नहीं हैं,यह उनके दंभ को दर्शाता हैं. जो कि अब और बुरी तरीके से टूटने वाला हैं.&lt;br /&gt;भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच हो रही टेस्ट सीरिज शुरू होने से पहले भले ही सीनियर बनाम जूनियर खिलाडियों के चुनने को लेकर मीडिया की सुर्खियाँ बटोरा. सौरव का सीरिज के बाद संन्यास लेना भी खबर बनी, इससे बडी खबर सौरव का शतक बना,जिसे देखने के लिये क्रिकेट-प्रेमियों को काफी लंबा इंतजार करना पडा. लेकिन अब जब सीरिज के मध्य में जब सभी खिलाडियों ने अपना-अपना योगदान दे दिया हैं, तो सीनियर बनाम जूनियर खिलाडियों की बहस को कुछ दिनों के लिये ठंडे बस्ते में ही डाल देना ठीक होगा.&lt;br /&gt;अब तो भारत को या यूँ कहे टीम इंडिया को इस सीरिज को जीतकर विश्व-चैम्पियन बनने की ओर कदम बढाना चाहिये विश्वनाथन आनंद की तरह.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-146260579947862083?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/146260579947862083/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=146260579947862083' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/146260579947862083'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/146260579947862083'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/10/blog-post.html' title='भारत विश्व-चैम्पियन बनने की राह पर..'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-3976936084750861836</id><published>2008-09-02T23:38:00.001-07:00</published><updated>2010-01-15T08:59:57.941-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Politics'/><title type='text'>काम करने वाले को फुर्सत हैं क्या?</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;बिहार में आयी महाप्रलय के बीच बयानों की बाढ के बीच राज्य के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार का यह बयान काफी मायने रखता हैं क्योंकि काम करने वाला व्यक्ति चुपचाप अपने काम को अंजाम देता हैं ना कि उस चीज काढिढोरा पीटता फिरता हैं. वैसे हमेशा से ही राजनेताओं को ऐसे ही मौकों की तलाश रहती हैं जहाँ कि उनकी राजनीतिक रोटियाँ सेंकी जा सके. भारत का अपने को सबसे बडा और सफल रेल मंत्री मानने वाले रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव बाढ के दौरान खबरिया चैनलों पर इतनी तेजी से आ रहे हैं कि वह एक तरीके से इस पूरे महाप्रलय के प्रवक्ता बन गये हैं.&lt;br /&gt;संकट के इस घडी में यह घोषणा करना कि बाढ पीडितों के लिये रेलयात्रा में कोई किराया नहीं लिया जायेगा और इस बात के लिये हमेशा क्रेडिट लेना कि मैंने ये करवाया वो करवाया - राजनेताओं के मानसिक दिवालियेपन की निशानी हैं. आखिरकार इन्हें प्रतिनिधि बनाकर भेजा गया हैं तो यह इनका कर्त्तव्य हैं कि जनता की हरसंभव मदद की जाये. प्राकृतिक आपदाये बताकर तो नही आती हैं. ऐसे समय भी सियासत करना और मीडिया के माध्यम से एक-दूसरे के जवाबों का जवाब देना कहाँ तक जायज बनता हैं, इसका फैसला वक्त आने पर जनता ही करेगी.&lt;br /&gt;बिहार में बाढ आना कोई नयी बात नहीं हैं. हर साल किसी ना किसी रूप में बाढ आती ही हैं. इस बार बाढ की विभीषिका ज्यादा थी, इस कारण से समाचार चैनलों की सुर्खियाँ भी बनी और इस तरफ लोगों का ध्यान भी आकृष्ट हुआ. इतना कुछ होने के बाद भी इस समस्या के स्थायी निराकरण के तरफ किसी का ध्यान ना जा रहा हैं ना जायेगा. समस्या रहेगी, तब ना राजनीति की जा सकती हैं,पैसे बनाये जा सकते हैं.&lt;br /&gt;बाढे हर साल आती रहेगी. जाती रहेगी. राजनीति होती रहेगी. पिसना तो आम जनता को हैं. आँकडों में लोग गिने जाते रहे हैं और यह गिनती हरसाल बदस्तूर जारी रहेगी. भगवान के आसरे ही जनता को इस देश में रहना लिखा हैं तो किया भी क्या जा सकता हैं. जैसे चल रहा हैं देश चलने दिया जायें. यह सोच ही राजनेताओं के स्वास्थ्य के लिये ठीक हैं, इस लिये कुछ नही किया जा रहा हैं सिवाए बयानबाजी के.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-3976936084750861836?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/3976936084750861836/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=3976936084750861836' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/3976936084750861836'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/3976936084750861836'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/09/blog-post.html' title='काम करने वाले को फुर्सत हैं क्या?'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-3935379879289377889</id><published>2008-08-19T04:40:00.001-07:00</published><updated>2010-01-15T09:00:49.816-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Obituary'/><title type='text'>डॉक्टर जी.आर.सुंदर सर नहीं रहे..</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;आज सुबह जब एकाएक अखबार पलटा तो "भारतीय विद्या भवन के रजिस्ट्रार एक दुर्घटना में मारे गये" शीर्षक वाली खबर पढकर काफी धक्का लगा भवन में रेडियो एंड टी.वी. जर्नलिज्म कोर्स के दौरान सुंदर सर से भारत की सांस्कृतिक विरासत नामक पेपर पढने का मौका मिला, उन्हीं दौरान उनको जानने का मौका मिला. स्वभाव से शांत, नम्र और मृदुभाषी सुंदर सर ने जब पहली बार भारतीय संस्कृति पर अपना व्याख्यान दिया, तब ही लग गया था कि विषय पर इनकी काफी गहरी पकड हैं, मेरी रुचि इस विषय में होने के कारण मैंने भी पत्र को गंभीरता से लिया और सर से इंडोलॉजी के बारे में जानने और समझने का अवसर प्राप्त हुआ. कक्षा के दौरान जब किसी बिन्दु को समझाते थे,तो समझाने के दौरान ही वह तथ्य हमेशा के लिये स्मृति में चला जाया करता था. कक्षाएँ काफी कम हुई, इसका दुख उस समय काफी था.&lt;br /&gt;अपनी भारतीय संस्कृति को जो कुछ भी थोडा बहुत जानने का मौका मिला, इसमें सुंदर सर का काफी हाथ था. भारतीय संस्कृति से संबंधित शब्दों की उत्त्पत्ति कैसे हुयी, ये सब काफी अच्छे तरीके से बताते थे. कक्षा के दौरान इतने धीरे से बोलते थे कि हमें सुनने के लिये ज्यादा एकाग्रता की आवश्यकता होती थी. भारतीय संस्कृति के ऐसे ऐसे तथ्यों को जानने का मौका मिला, जिसे हम चाहकर भी नहीं खोज सकते हैं.&lt;br /&gt;अभी हाल में ही भवन के जर्नलिज्म के २००७-०८ बैच के कॉन्वोकेशन समारोह में उनका एक संक्षिप्त भाषण सुनने को मिला, जिसमें उन्होनें पूर्व के एक वक्ता की प्रशंसा करते हुये उसकी इस बात पर जोर दिया किया कि जीवन में तरक्की करने के बाद भी माता-पिता और गुरुजनों को कभी नहीं भूलने की बात कही.&lt;br /&gt;देश के राष्ट्रीय अखबारों के लिये भले ही यह एक तेज गति के वाहन द्वारा की गयी एक दुर्घटना हो, लेकिन यह हमारे लिये एक अपूरणीय क्षति हैं. ऐसे विद्वान सज्जनों का एकाएक जाना काफी खलता हैं. मेरे तरफ से सुंदर सर को एक सच्ची श्रद्धांजलि. उनकी कमी आने वाले समय में नये छात्रों को काफी खलेगी.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-3935379879289377889?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/3935379879289377889/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=3935379879289377889' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/3935379879289377889'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/3935379879289377889'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/08/blog-post.html' title='डॉक्टर जी.आर.सुंदर सर नहीं रहे..'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-7925178483689820901</id><published>2008-07-22T04:08:00.000-07:00</published><updated>2010-01-15T09:01:30.748-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Politics'/><title type='text'>संसद में भी दिख ही गयी नोटों की गड्डी</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;विश्व के सबसे बडे प्रजातंत्र भारत के निचले सदन लोकसभा में विश्वास मत के बहस के दौरान होने वाली महत्त्वपूर्ण वोटिंग से दो घंटे पूर्व ही भारतीय जनता पार्टी के मुरैना के सांसद अशोक अर्गल ने लोकसभा के स्पीकर की कुर्सी के नीचे लाख लाख रुपयों की गड्डी बैग से निकाल कर दिखाया, सारे देश ने इसे अपने टेलीविजन चैनलों के माध्यम से पूरे देशवासियों ने देखा. लोकसभा चैनल ने तुरंत ही प्रसारण बंद कर दिया.&lt;br /&gt;इसके तुरंत बाद प्रतिपक्ष के नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुये कहा कि भाजपा के तीन सांसदों - अशोक अर्गल, फग्गन सिह कुलस्ते और अशोक भगोडा को तीन तीन करोड रुपये दिये गये. बाकी पैसे विश्वास मत के बाद दिये जाने थे.&lt;br /&gt;अब तो यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि सांसदों की खरीद-फरोख्त तो होती हैं, लेकिन पहली बार इस चीज का साक्ष्य वो भी संसद के पटल पर देखने को मिला. इससे बडी शर्म की बात भारतीय लोकतंत्र के लिये क्या हो सकती हैं.&lt;br /&gt;इस तरह भाकपा के महासचिव की बात सही ही साबित हो गयी कि करोडों में सांसद खरीदे जा रहे है.जनता के सामने उनके प्रतिनिधियों का चेहरा अब पूरी तरह से बेनकाब हो गया हैं.&lt;br /&gt;इसमें हिंदी खबरिया चैनलों की भूमिका की भी सराहना करनी होगी,जो कि अशोक अर्गल के लापता होने की खबर दिखा रहे थे.वहाँ कुछ ना कुछ खबर दिख ही गयी.&lt;br /&gt;अब जनता क्या सोच रही है? जनता ही जाने.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-7925178483689820901?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/7925178483689820901/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=7925178483689820901' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/7925178483689820901'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/7925178483689820901'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/07/blog-post_22.html' title='संसद में भी दिख ही गयी नोटों की गड्डी'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-5531686105182685786</id><published>2008-07-16T04:03:00.000-07:00</published><updated>2010-01-15T09:03:13.021-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Sports'/><title type='text'>सचिन को चाहिये १७२, सरकार को २७२.</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति में सरकार को बचायें रखने के लिये यूपीए को जादुई संख्या २७२ की चिंता सता रही हैं.वही सचिन तेंदुलकर को अपने नाम एक और रिकॉर्ड करने के लिये सिर्फ १७२ रनों की जरूरत हैं,जिससे वे टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाडी हो जायेंगे. सचिन को इन रनों की चिंता नही होनी चाहिये,वो तो अच्छा खेलेंगे तो बन ही जायेंगे. लेकिन सरकार को बचायें रखने के लिये काँग्रेस अपने सहयोगियों के अलावा ऐसे छोटे-छोटे दलों और इक्का-दुक्का सीट वाले के सामने भी परमाणु समझौते के फायदे सुनाकर अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रही हैं.&lt;br /&gt;समाचार चैनलों पर दोनों संख्या पर कार्यक्रमों का प्रसारण लगातार जारी हैं. कभी कभी १७२ और २७२ देखकर दुविधा में पड जाता हूँ. कभी टी.वी. स्क्रीन के नीचे वाले हिस्से पर नजर आ जाता हैं सिर्फ १७२ की जरुरत. सोचता हूँ सरकार को बचाएँ रखने के लिये सिर्फ १७२ चाहिये. लेकिन बाद में नजर आता हैं ये तो सचिन के रिकॉर्ड के लिये रनों की जरूरत हैं. अगर सचिन को २७२ रन भी बनाने होते,तो वो आसानी से बना सकता हैं.&lt;br /&gt;सरकार रहेगी या जायेगी - इसका फैसला २२ जुलाई को हो जायेगा. वाम दलों ने सरकार को गिराने के लिये कमर कस ली हैं. विपक्ष तो कितने दिनों से इसके लिये तैयार हैं. फिर भी दोनों एक साथ वोट करने के पक्ष में नहीं दिखायी देते हैं. छोटे- छोटे दलों की चाँदी हैं इन दिनों. भाकपा महासचिव ए.बी.बर्धन की अगर माने तो एक एक सांसद की बोली २५-२५ करोड रुपये लगायी जा रही हैं. ऐसे में तो सरकार के गिरने का सवाल ही नहीं उठता हैं.लेकिन सचिन का भाव दिन-प्रतिदिन गिरता जा रहा हैं. पेप्सी ने सचिन के साथ अपना अनुबंध बढाया नही.लेकिन सचिन रनों का पहाड खडा करेगा.&lt;br /&gt;सरकार ने अगर सदन में बहुमत साबित कर लिया तो अपना कार्यकाल पूरा कर लेगी. वैसे ही अगर सचिन ने पूर्व की भाँति लंका में रनों का अंबार खडा किया तो २०११ का विश्व कप खेलने के सपने को जीवित बनायें रखेंगे.दोनों स्थितियाँ संभव सी जान दिखायी पडती हैं.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-5531686105182685786?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/5531686105182685786/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=5531686105182685786' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5531686105182685786'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5531686105182685786'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/07/blog-post.html' title='सचिन को चाहिये १७२, सरकार को २७२.'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-9039623041519097268</id><published>2008-06-23T05:14:00.000-07:00</published><updated>2010-01-15T09:03:40.795-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Sports'/><title type='text'>आखिर कब तक मनाते रहेंगे ८३ की जीत का जश्न</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;२५ जून २०३३. भारतीय क्रिकेट टीम को क्रिकेट का विश्व कप जीते पचास साल हो गया,इस अवसर पर फिफ्टी-५० वाली टीम को एक बार फिर से नयी दिल्ली में सम्मानित किया गया. बडी विडंबना हैं कि भारतीय टीम ने पिछले पचास साल में पचास ओवर के प्रारूप में एक ही बार विश्व कप जीता. साथ ही साथ पिछले साल धोनी की टीम का भी ट्वेंटी-२० के पच्चीस साल पूरे होने पर भी टीम के हर सदस्य को पच्चीस पच्चीस करोड रुपये दिये गये. बडे गर्व की बात हैं कि इन्हीं दो जीतों को अभी तक हम सेलेब्रेट करते नजर आ रहे हैं.आखिर कब तक ऐसा होता रहेगा?&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-9039623041519097268?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/9039623041519097268/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=9039623041519097268' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/9039623041519097268'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/9039623041519097268'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/06/blog-post_23.html' title='आखिर कब तक मनाते रहेंगे ८३ की जीत का जश्न'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-3779425921967717272</id><published>2008-06-10T04:11:00.000-07:00</published><updated>2010-01-15T09:04:19.704-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Sports'/><title type='text'>सचिन ने संन्यास लिया!</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;दुनिया के जाने माने क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया. ये अपने आप में एक बडी खबर हैं.ये खबर ब्रेक की हमारे मीडिया में ही काम करने वाले एक मित्र ने. मुझे सुनकर अचंभा हुआ,मुझे तो इसकी खबर भी नहीं लगी.ऐसी खबर जिसके ऊपर समाचार चैनलों का एक दिन तो आसानी से बीत जायेगा. अखबारों में दो-तीन पेज तो आसानी से दिये जा सकते हैं. हुआ यूँ कि ये खबर उस मित्र ने सपने में देखा था.ये जानकर मेरे जान में जान आयी.&lt;br /&gt;सचिन के संन्यास पर ना जाने कितने जानकारों ने अपनी टिप्पणी देने में कोई कोताही नहीं की वाकई पूछा जायें तो सचिन कब संन्यास लेंगे ये तो सचिन भी नहीं जानते हैं. अभी लीग के मुकाबले में चोटिल होने के कारण बाद के ही कुछ मैच खेल पायें. बांग्लादेश दौरे से भी नाम वापस ले लिया. ऐसी स्थिति में भी सचिन पर ऊँगली नहीं उठायी जायेगी. अब कुछ खास सीरीज में ही खेलते खेलते विश्व कप २०११ खेलने की ही मंशा सचिन की दिखायी देती हैं.&lt;br /&gt;सबसे ज्यादा विश्व कप खेलने का रिकॉर्ड जो कि जावेद मियाँदाद के नाम हैं,उन्होंने भी यह रिकॉर्ड कैसे बनाया था-ये किसी से छिपा नही हैं. क्या सचिन भी उसी तरीके से यह रिकॉर्ड अपने नाम पर करना चाहते हैं.सचिन मैदान पर खेलते नजर आयें-ये सभी चाहते हैं,लेकिन उनका भी बल्ला टाँगने का समय आयेगा ही.उस समय यह देखना ज्यादा रोचक होगा कि सचिन ने जब क्रिकेट को अलविदा कहा तो उनके ना कितने रिकॉर्ड हैं,और कितने उनमें से कभी नहीं टूटने वाले हैं. शायद मित्र महोदय ने यह सपना नहीं देखा.चलिये अच्छा ही हैं.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-3779425921967717272?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/3779425921967717272/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=3779425921967717272' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/3779425921967717272'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/3779425921967717272'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/06/blog-post_8238.html' title='सचिन ने संन्यास लिया!'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-1588831439468955266</id><published>2008-06-10T03:27:00.000-07:00</published><updated>2010-01-15T09:04:56.585-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Crime'/><title type='text'>आज के घरेलू नौकर घरेलू कैसे?</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;फिल्म 'आनंद' के रामू काका को हम घरेलू नौकर की श्रेणी में रखे तो कुछ बात समझ में आती हैं,लेकिन आज के नौकरों को किस श्रेणी में रखे,जिनकी नजर में घर के कीमती सामान ही सबकुछ होता हैं. इसके लिये वे अपने मालिक की भी हत्या करने में तनिक भी संकोच नहीं करते हैं. आए दिन खबरों में नौकरों के द्वारा मालिकों की हत्या की घटनाएँ इतनी आम हो गयी हैं,फिर भी लोग इससे सबक नहीं लेते हैं.&lt;br /&gt;पहले परिवारों में रहने वाले नौकरों के साथ नौकर जैसा व्यवहार ना कर परिवार के आम सदस्य जैसा व्यवहार किया जाता था. सच मायने में हम उन्हें घरेलू नौकर कह सकते थे.पर्व हो या त्योहार, परिवार के सदस्यों की ही तरह उनके लिये भी नये कपडे सिलवाना,उनकी हर जरूरतों का खयाल रखना-ये सब शामिल था. अगर सेवक बुजुर्ग हुये तो उन्हें काका की भाँति सम्मान देना साथ ही साथ उनकी राय को भी सुना जाता था.जिस घर में काम करते उसी घर में सारी जिंदगी बीता देना,कभी ऊँची आवाज में बात ना करना. लेकिन अब ये सब चीजें कहाँ देखने को मिलती हैं.&lt;br /&gt;महानगरों की दौडती भागती जिंदगी में अपने काम के लिये समय ना निकाल पाने की स्थिति में नौकरों पर निर्भरता जरूरी जान पडती हैं. ऐसे में घरेलू नौकर रखे जाते हैं,जिसे की विभिन्न प्लेसमेंट एजेंसियाँ मुहैया करवाती हैं. समय समय पर पुलिस के द्वारा हिदायत देने के बाद भी वेरिफिकेशन का काम पूरा ना होने के बाद भी लोग इन नौकरों को अपने यहां काम पर रख लेते हैं और नतीजा एक सप्ताह से लेकर एक महीने के बीच में ही देखने को मिल जाता हैं.&lt;br /&gt;बुजुर्ग लोग इन नये जमाने के नौकरों का सबसे आसान निशाना बनते हैं.सबसे ज्यादा खबरें बुजुर्गों की हत्या से संबंधित ही आती हैं.एकल परिवार की संकल्पना भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं. महानगरों में माता-पिता से अलग रहने का क्रेज बढता जा रहा हैं,जीवन की संध्या बेला में भी नौकरों के भरोसे रहना पड तो ऐसे औलाद किस काम के.&lt;br /&gt;घरों में नौकर रखने की जरूरत ना पडे,इसका सबसे आसान उपाय हैं कि अपने सब काम स्वयं ही किये जायें.भले ही कम काम हो,लेकिन इससे दूसरे पर निर्भरता तो नहीं रहेगी.धीरे धीरे कर अपने सब काम कर लेने से सेहत भी बनी रहेगी. साथ ही फालतू काम भी नहीं करने पडेंगे.अगर अपने से नहीं संभव हैं तो स्वयं अपने घर में यमराज को आमंत्रण दीजिये,ना जाने कब आपके छोटे-मोटे काम को करते हुये आपका ही काम तमाम कर दें.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-1588831439468955266?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/1588831439468955266/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=1588831439468955266' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/1588831439468955266'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/1588831439468955266'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/06/blog-post_10.html' title='आज के घरेलू नौकर घरेलू कैसे?'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-7379910802885870432</id><published>2008-06-05T05:28:00.000-07:00</published><updated>2010-01-15T09:05:33.569-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Economy'/><title type='text'>एक नया आतंकवाद : आर्थिक आतंकवाद</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;पेट्रोल,डीजल और कुकिंग गैस के दामों में बढोत्तरी होने के साथ ही एक नये टर्म से भी पाला पडा,वो हैं भाजपा के द्वारा दिया गया 'आर्थिक आतंकवाद'.ना जाने इस टर्म का क्या अभिप्राय हैं? समझने की कोशिश चल रही हैं.इसका अर्थ कोई अर्थशास्त्री बतायेंगे या रक्षा-विशेषज्ञ खोज जारी हैं. वैसे कच्चे तेल की बढती कीमतों को देखते हुये ऐसा करना जरूरी था,आखिर कब तक सरकारें सब्सिडी देती रहेगी. ऐसी स्थिति में किसी भी पार्टी की सरकार रहती तो तेल की कीमतों को बढाती ही.चुनावी साल में जब काँग्रेस को सहयोगियों और विपक्षी दलों के विरोध के बाद भी तेल की कीमतों को बढाना पडा,तो किसानों को जो कर्ज माफी दी गयी या लोकलुभावन बजट पेश किया गया सब पर पानी फिर गया.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भाजपा इस मुद्दे को अच्छी तरीके से भुनाने की कोशिश करेगी,बैठे-बैठाये एक मुद्दा जो मिल गया.आगामी आम चुनाव को देखते हुये काँग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार भी काफी दिनों से तेल की कीमतों को टालती आ रही थी,लेकिन जब सार्वजनिक तेल कंपनियों ने दो-तीन महीने के भीतर कैश ना होने की स्थिति में कच्चे तेल ना खरीद पाने की असमर्थता जाहिर की,तब जाकर सरकार ने मजबूरी में यह फैसला लिया. वाम मोर्चा से ऐसी स्थिति में ना विरोध करते बन पा रहा हैं ना समर्थन करते.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तीन,पाँच और पचास के अनुपात में भाजपा को अपनी लोकसभा की सीटें बढती हुयी नजर आ रही हैं. इधर प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय चैनल दूरदर्शन पर आकर यह सफाई देनी पड रही कि किस स्थिति में हमें यह कदम उठाना पडा, इसकी कोई जरूरत नहीं थी. वाम मोर्चा भी इस मुद्दे से फायदा उठाना चाह रहा हैं,लेकिन सरकार के साथ रहकर.&lt;br /&gt;अंततः तेल व गैस की कीमतें बढ गयी हैं.इस सच्चाई से हम सब वाकिफ हैं,कुछ दिनों में ही इसका असर हमारे रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखने लगेगा.नेता राजनीति करते रहेंगे,अपनी जेबें भरते रहेंगे.महँगाई दर डबल-डिजीट को छुएँ, महँगाई के कारण जनता का बुरा हाल हो-इन सब चीजों से कोई मतलब नहीं हैं.नये जुमले उछाले जायेंगे और हम आम जनता उसी में माथा-पच्ची करते रह जायेंगे.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-7379910802885870432?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/7379910802885870432/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=7379910802885870432' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/7379910802885870432'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/7379910802885870432'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/06/blog-post.html' title='एक नया आतंकवाद : आर्थिक आतंकवाद'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-3987097588190844474</id><published>2008-05-24T17:16:00.000-07:00</published><updated>2010-01-15T09:06:15.471-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Relations'/><title type='text'>कितने अजीब रिश्ते हैं यहाँ पे....</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;एक छोटे शहर से महानगरों की ओर आने वाले युवा अपने आँखों में ना जाने कितने सपने लेकर आते हैं.कुछ अलग करने की चाहत. भीड का हिस्सा ना बने रह जाये,इसके लिये कोई भी रास्ता अख्तियार करने के लिये तैयार. हर कीमत पर सफलता पाना ही उनका एकमात्र मकसद होता हैं.इसके लिये अपने साथियों का साथ मिले तो ठीक,नहीं तो ऐसे साथी की तलाश शुरू कर देते हैं जो कि उनके सपने को साकार करने में मदद करें.बस यही से शुरू होती हैं प्रोफेशनल रिश्तों की शुरूआत. सफलता मिली,पुराने साथी छुटे और नये प्रोफेशनल दोस्तों की तलाश जो कि इस सफलता को बनाये रखें.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कभी कभी पुराने साथी से छुटकारा पाना इतना आसान नहीं होता हैं,तो उस से मुक्ति पाने के लिये कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं.मीडिया में महानगरों की खबरों की अधिकता होने के कारण हर क्राइम की स्टोरी किसी ना किसी तरह जगह पा ही जाती हैं. पिछले कुछ दिनों की घटनाओं को देखे तो हम पाते हैं कि किस तरह खून के रिश्ते हो या महानगरों में बनने वाले नये नये रिश्ते हो, सभी में खून ही बाहर निकलता हुआ नजर आता हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;देश से बाहर भी विदेशों में जाकर पढने वाले भारतीय छात्रों पर होने वाले हमले भी इसी तरफ इशारा करते हैं. घर से हजारों मील दूर अपने सपनों को साकार करने के लिये जाने वालों का ऐसा हस्र निश्चय ही चिंताजनक हैं.कहने को तो पूरा संसार एक "ग्लोबल विलेज" हो गया हैं. लेकिन क्या यहाँ अपने गाँवों में दिखने वाला अपनापन दिखायी देता हैं? कतई नहीं. सूचना तकनीक से सिर्फ जुडना ही हमारे लिये पर्याप्त नहीं हैं एक गाँव की अवधारणा के लिये.यही हाल हमारे महानगरों का भी होता जा रहा हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;महानगरों में बनने वाले दोस्ती के रिश्ते भी अजीब होते जा रहे हैं. जब तक साथ पढ रहे हैं या काम कर रहे हैं तब तक रिश्तों में गरमाहट बनी रहती हैं,लेकिन ज्यों ही अपने कैरियर की सीढी चढने लगे तो तो ये रिश्ते बेमानी होने लगते हैं. तब यहाँ दोस्ती को निभाने का जिम्मा सोशल नेटवर्किंग साइट के जरिये होता हैं. अब तो दोस्तों से वर्चुअल वर्ल्ड में ही मिलना अच्छा लगता हैं.यही दोस्ती निभाने का नया रूप हैं,नया ढंग हैं. ना अब वह गरमाहट रही, ना ही वह अपनापन. तो कैसे निभेंगे ये रिश्ते.सोचने की बात हैं.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-3987097588190844474?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/3987097588190844474/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=3987097588190844474' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/3987097588190844474'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/3987097588190844474'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/05/blog-post_24.html' title='कितने अजीब रिश्ते हैं यहाँ पे....'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-99738503743765913</id><published>2008-05-16T04:04:00.000-07:00</published><updated>2010-01-15T09:28:29.302-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='film'/><title type='text'>ये वर्चस्व की लडाई हैं.....</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;एक जंग शुरू हो चुकी हैं सितारों के बीच, ज्यादा से ज्यादा चमकने की. अपनी चमक से दूसरे सितारे की चमक को फीकी करने की. इसके लिये उन्हें किसी भी हद तक क्यों ना जाना पडे. पहले यह काम मीडिया खुद-ब-खुद कर दिया करता था.लेकिन अब "न्यू मीडिया" का सहारा लेकर ये सितारे खुद ही अपने चमक को दूसरे की चमक से ज्यादा बता रहे हैं. जी हाँ, बात हो रही हैं आमिर खान के ब्लॉग की,जिसमें उन्होनें पंचगनी में छुट्टी बीताने के बारे में लिखा. इसमें बात ही बात में एक कुत्ते का भी जिक्र आ गया.जो कि पालतू होने के कारण आमिर के तलवे चाटता हैं और साथ ही साथ उनका ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश भी करता हैं.&lt;br /&gt;अगर इतना ही जिक्र हुआ होता तो किसी का ध्यान इस तरफ जाता भी नहीं,और ना ही यह खबर बनती. सब गडबडी नाम को लेकर हो गयी. कुत्ते का नाम के कारण ही सब पंगा हो गया. कुत्ते का नाम शाहरूख रखा गया था उस कुत्ते के पूर्ववर्ती मालिक के द्वारा. इस ब्लॉग को आमिर ने बैड टेस्ट में लिखा हैं.यह बात तो स्पष्ट रूप से दिखती हैं. साथ ही साथ इस पर लिखे गये कमेंट से प्रशंसकों के गुस्से को भी साफ साफ देखा जा सकता हैं.&lt;br /&gt;आमिर और शाहरूख की यह प्रतिद्वंदिता पिछले कुछ दिनों से काफी सुर्खियां भी बटोर रही हैं.हर बार निशाना दागने का काम आमिर ने ही किया हैं. लेकिन बडी संजीदगी के साथ शाहरूख हर बार दोस्तों के बीच ऐसी बात होती रहती हैं कह कर टाल जाते हैं. इस बार भी नाम पर कॉपीराइट ना होने का हवाला देते हुये बात को टाल गये.&lt;br /&gt;इसी तरह अपने विरोधियों को जवाब देने के लिये भी सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी ब्लॉगिए हो गये हैं. जिस छवि के कारण उन्होनें अपने को इस फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित किया , वही छवि फिर से बनाते हुये अपनी चमक को कम नहीं होना देना चाहते. एक तरह से उन्हें जिस बात का डर सबसे ज्यादा सताता हैं वह हैं - ना पहचाने जाने का डर. यह चीज बडे सितारों में जल्दी से घर भी कर जाती हैं.&lt;br /&gt;एक तरह से यह लडाई हैं अपने को दूसरे से ऊँचा दिखाने की,दूसरे को पूरी तरह से खारिज करने की. ये सितारे कहीं ना कहीं यह भूल जाते हैं कि इनको आसमान पर बैठाने का काम दर्शकों ने किया हैं ना कि ये अपने से इतने बडे सितारे बन गये. अमिताभ हो, आमिर हो या शाहरूख हो, सभी दर्शकों के कारण ही उस मुकाम पर हैं,जिस पर होने का सपना हर कोई देखा करता हैं. ये सितारे एक दूसरे को खारिज करने के चक्कर में दर्शकों की नजर में अपने को खारिज कर रहे हैं. दर्शकों का क्या हैं वो नये सितारे खोज लेंगे.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-99738503743765913?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/99738503743765913/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=99738503743765913' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/99738503743765913'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/99738503743765913'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/05/blog-post_6305.html' title='ये वर्चस्व की लडाई हैं.....'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-8741417168456525369</id><published>2008-05-16T03:55:00.000-07:00</published><updated>2010-01-15T09:07:43.158-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Sports'/><title type='text'>पल भर में बदलते नायक,इसमें एक हरभजन भी.</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;थप्पड मामले में हरभजन सिंह को मिली सजा उनके लिये सबक हैं.सबसे पहले तो आई.पी.एल.लीग के दस मैचों में नहीं खेलने का प्रतिबंध लगा, इससे जो आर्थिक नुकसान हुआ, उसके बारे में यह कहा गया कि उनके द्वारा श्रीसंथ को मारा गया तमाचा तीन करोड रुपये का नुकसान दे गया,बदनामी हुयी सो अलग. अब बी.सी.सी.आई. ने पाँच एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैच ना खेलने की पाबंदी लगायी.साथ ही साथ यह भी चेतावनी दी गयी अगर भविष्य में अगर इस तरह का कोई मामला आया तो आजीवन प्रतिबध लगा दिया जायेगा.&lt;br /&gt;ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद हरभजन सिंह को भारतीय मीडिया ने हाथोंहाथ लिया और इसी दौरान एक चैनल पर इंटरव्यू के दौरान फिर ऑस्ट्रेलियाई खिलाडियों पर भडास निकाली,तब क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया द्वारा बी.सी.सी.आई. को इस बारे में कदम उठाने के लिये कहा ,तो एक बार फिर से हरभजन को मीडिया में कुछ ना बोलने की सलाह देकर छोड दिया गया.लेकिन इस बार मामला किसी दो देशों के बीच ना होकर बी.सी.सी. आई. के सबसे बडे खेल तमाशे आई.पी.एल. लीग के दौरान सामने आया,इसलिये सर्वेसर्वा के रूप में बोर्ड को ही फैसला लेना था.क्या होता जब यह थप्पड भारतीय खिलाडी के बजाए किसी विदेशी खिलाडी को लगा होता? ऐसे में बोर्ड का क्या रूख रहता देखने वाला होता. वैसे शेन वार्न का गांगुली के खिलाफ बोलना ज्यादा बडा मसला नहीं बना.&lt;br /&gt;नस्लवाद के नायक के रूप में उभरे हरभजन पर आनन-फानन में भारतीय डाक विभाग ने डाक टिकट भी जारी करने की घोषणा कर दी. क्या इतना आसान हैं भारतीय डाक टिकट पर आ जाना. डाक टिकट किसी देश की सभ्यता संस्कृति का परिचायक होती हैं.इन पर छपने वाले व्यक्तित्व अपने क्षेत्र में बडी सफलता हासिल किय होते हैं. ये उस देश के प्रतिनिधि के रूप में देखे जाते हैं. इतनी जल्दी ही हरभजन नायक से खलनायक हो जायेंगे,किसी ने सोचा भी नही था.लेकिन डाक विभाग मीडिया द्वारा बनाये गये नये ऑयकनों के पीछे भागने के बजाए अपने सोच समझ से निर्णय ले तो ज्यादा अच्छा होगा.&lt;br /&gt;इसी तरह अमेरिका की प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन ने भी आनन फानन में पटना के तत्कालीन जिलाधिकारी गौतम गोस्वामी को एशियन हीरो घोषित तो किया था, लेकिन जैसे ही बाढ राहत घोटाले में नाम आया,तो उसके संवाददाता को अपने इस निर्णय पर जवाब देते नहीं सूझ रहा था. आपका नायक जब खलनायक निकल जाता हैं तो सबसे ज्यादा दुख आप ही को होता हैं. इसलिये कोई भी निर्णय लेने से पहले उस पर सोचा जाता हैं.खली की भी भारत लौटने के बाद हरभजन से मिलने की बडी इच्छा थी,लेकिन "स्लैपगेट" के बाद खली को भी हरभजन से मिलना सही नही लगा.&lt;br /&gt;अब हरभजन का यह बयान आना कि उसके जिंदगी के दो मनहूस दिनों में एक थप्पड वाला दिन था,तो अब यह बात समझ में आ रही हैं कि कितनी बडी गलती हो गयी. इतनी भी समझ आने के बाद भविष्य में अपने कंडक्ट को सही रखे तो ज्यादा अच्छा होगा.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-8741417168456525369?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/8741417168456525369/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=8741417168456525369' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8741417168456525369'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8741417168456525369'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/05/blog-post_16.html' title='पल भर में बदलते नायक,इसमें एक हरभजन भी.'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-8460172125718684654</id><published>2008-05-10T04:50:00.000-07:00</published><updated>2010-01-15T09:09:23.396-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Politics'/><title type='text'>अर्जुन के तीर</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने जब से राहुल गाँधी में प्रधानमंत्री बनने की योग्यता देखी,तब से ही "चापलूसी और वफादारी" की डिबेट शुरू हो गयी.इसके बाद काँग्रेस के कुछ और नेताओं ने राहुल को प्रधानमंत्री के रूप में देखने को उचित ठहराया.इस बीच प्रवक्ताओं ने भी अपना काम भली भाँति किया,अर्जुन सिंह जैसे कद्दावर नेता के विजन को सिक्फैंसी की संज्ञा दे दी.किसी सिक मानसिकता वाले ने ऐसा बयान दे दिया,नहीं तो सब कुछ तो योजना अनुरूप चल रहा था.राहुल गाँधी ने भी अपने को युवराज कहने को प्रजातांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बतलाया.मीडिया हैं कि मानता ही नहीं,गाहे बगाहे जो आदत पड गयी हैं,वह सामने प्रकट हो ही जाता हैं.कुल मिलाकर पिछले कुछ महीनों की काँग्रेसी खींचतान को देखे तो पाते हैं कि इतिहास में जिस तरह एक वंश में उत्तराधिकारी के नाबालिग होने या अन्य किसी कारणों से केयरटेकर की व्यवस्था कर ली जाती थी,उसी प्रकार की परंपरा को निर्वाह करने के लिये सभी काँग्रेसी दिग्गज उतावले नजर आते हैं.इसी तरह कल फिर से अर्जुन सिंह का यह बयान आना कि पार्टी में अब वफादारी के मूल्यांकन का दायरा काफी सीमित हो गया हैं.यानि कि अब पार्टी में वफादारों की बात सुनी नहीं जा रही हैं और पार्टी चापलूसों से ज्यादा भर गयी हैं,अब उनकी ही ज्यादा चलती हैं.काँग्रेस ने भी उनकी इस टिप्पणी से असहमति जतायी कि निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाया हैं। &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div align="justify"&gt;ज्यों ज्यों आम चुनाव नजदीक  आते जा रहे हैं , वफादार काँग्रेसी नेताओं की छटपटाहट बढती जा रही हैं कि किस तरीके से अपनी वफादारी ज्यादा से ज्यादा दिखाये जाये.चापलूसों का अपना दर्द हैं. सत्ता में उन्हें भी तो अपनी भागीदारी चाहिये.आम जनता की बात करने वाली पार्टी किस तरह कुछ खास जनता या परिवार तक सीमित हैं यह बात तो हर कोई जानता हैं.चापलूस भी भली-भांति जानते हैं.तो क्यूँ ना फायदा उठाया जायें. आम जनता का हाथ बस हाथ के साथ में होना चाहिये.अर्जुन के तीर अभी निशाने पर नहीं लग रहे हैं,तो तिलमिलाना जरूरी हैं.पहले तो तीर निशाने पर लगते थे तब तो पार्टी में प्रजातंत्र भी था और वफादारों का सही मूल्यांकन भी होता था.लेकिन अब पार्टी की कार्यशैली भी अच्छी नहीं लग रही हैं. अब तो उन्हें समझ लेना चाहिये कि पार्टी जब युवा नेतृत्व चाह रही हैं,तो टीम भी युवा ही होगी.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-8460172125718684654?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/8460172125718684654/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=8460172125718684654' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8460172125718684654'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8460172125718684654'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/05/blog-post_4097.html' title='अर्जुन के तीर'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-4380338527373366728</id><published>2008-05-09T04:03:00.000-07:00</published><updated>2010-01-15T09:10:10.698-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Media'/><title type='text'>जरा सोचिए...  क्यूँ जरूरत पडी फिर से सोचने की</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;हकीकत जैसी, खबर वैसी का राग को छोडते हुये अब जी न्यूज ने सोचने के लिये मजबूर कर दिया,इसको लेकर अब एक नये पंचलाइन "जरा सोचिए" के साथ अपने समाचार चैनल को फिर से नये कलेवर,नये तेवर के साथ प्रस्तुत करने का काम कल रात नौ छप्पन से शुरू हुआ. सूत्रधार के रूप में हिन्दी टी.वी. पत्रकारिता के आज के छात्रों के सबसे बडे ऑयकन पुण्य प्रसून वाजपेयी अवतरित हुये.कार्यक्रम में कन्नूर की घटना को लेते हुये "वोट का अग्निपथ" नामक खबर को बडी खबर बनाया गया.&lt;br /&gt;बात हो रही थी समाचारों की. समाचार चैनलों पर आज के दिन समाचार नहीं दिखाया जा रहा हैं,ऐसी स्थिति में एकबार फिर से जी न्यूज ने समाचार को इस तरह से दिखाने का फैसला किया हैं ,जो कि आम जनता को सोचने पर मजबूर कर देगी.ऐसी उदघोषणा के साथ जी समूह के मालिक सुभाष चंद्रा ने अपने समाचार चैनल को नये कलेवर में पेश किया. कम से कम किसी खबरिया चैनल का मालिक यह तो दर्शकों को आकर कहता हैं कि आज समाचार नहीं दिखाया जा रहा हैं. इससे पहले टाइम्स नाउ के एक कार्यक्रम में भी कहा था.&lt;br /&gt;हिन्दी खबरिया चैनलों को फिर से खबर तो दिखाना शुरू करना ही हैं,कब तक मनोरंजन करवाते रहेंगे.इस सिलसिले में दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का यह बयान देना कि मीडिया को देश को एक नयी सोच देने में मदद करनी चाहिये ,काफी महत्त्वपूर्ण हैं. आज मीडिया के पास खबरें हैं,ऐसे पत्रकार भी हैं जो कि ऐसी खबरे भी दिखा सकते हैं जो कि आम जनता को सोचने पर मजबूर भी कर सकते हैं,लेकिन रेवेन्यू खोने का डर इतना समाया रहता हैं कि खबरों के साथ न्याय करना भूल गये हैं.&lt;br /&gt;अँग्रेजी चैनलों को तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का सामना करना पडता हैं,इसलिये वे खली और बजरंगबली पर अपने प्राइम टाइम को बर्बाद नही कर सकते हैं. हिन्दी खबरिया चैनलों को भी मन्नु और रंजन के बाप के पीछे नहीं पडकर ठोस खबरों के पीछे पडना चाहिये.कुछ ऐसा विश्लेषण करना चाहिये कि लोगों में एक नयी सोच विकसित हो सके.&lt;br /&gt;जी ने पहल की हैं, देखिये कब तक बाकी चैनल ऐसा करते हैं.वैसे बडी खबर में कन्नूर की घटना पर जितनी निष्पक्षता से कार्यक्रम रखा गया,वाकई प्रयास सराहनीय था.हम भी आने वाले समय में ऐसे ही परिवर्त्तन के वाहक बने.बस इसके लिये सोचने की जरूरत हैं.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-4380338527373366728?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/4380338527373366728/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=4380338527373366728' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/4380338527373366728'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/4380338527373366728'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/05/blog-post.html' title='जरा सोचिए...  क्यूँ जरूरत पडी फिर से सोचने की'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-5077143206695902255</id><published>2008-04-05T17:08:00.000-07:00</published><updated>2010-01-15T09:11:21.548-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Politics'/><title type='text'>पानी को लेकर ही होगा तीसरा महायुद्ध</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;किसी ने सही ही कहा हैं कि तीसरा महायुद्ध पानी को लेकर ही होगा.इससे पहले के महायुद्ध भले ही जमीन को लेकर हुये हैं,लेकिन हाल कि बनती हुयी परिस्थिति में हम देख सकते हैं कि जब अपने देश के भीतर ही पानी को लेकर दो राज्यों के बीच कानून और व्यवस्था की स्थिति इतनी बिगड जाती हैं,तब अगर यह स्थिति किन्हीं दो देशों के बीच पैदा हो तो स्थिति की भयावहता की अभी तो कल्पना मात्र ही की जा सकती हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अभी हाल में ही कर्नाटक और तमिलनाडु एकबार फिर से कावेरी नदी के पानी बँटवारे को लेकर एक दूसरे के सामने खडे हैं.बात हो रही हैं होगेनक्कल परियोजना की. कर्नाटक और तमिलनाडु की सीमा पर कावेरी नदी होगेनक्कल नामक स्थान पर तमिलनाडु में प्रवेश करती हैं.वहाँ पर तमिलनाडु की सरकार ने पीने के पानी के लिये एक जल-संग्रह की परियोजना पर काम कर रही जिससे कि सूखे से प्रभावित धर्मपुरी और कृष्णागिरी जिले को पानी मुहैया कराया जा सकेगा.१९९८ पर दोनों राज्यों के बीच इस मुद्दे पर सहमति बन गयी थी. कर्नाटक को भी बेंगलूरू के लिये इससे पानी मिलना तय हुआ था.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लेकिन कर्नाटक में चुनाव की सरगर्मी को देखते हुये यह मुद्दा एकाएक नेताओं के हाथ लग गया जिससे कि सभी राजनीतिक दल अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकना चाहते हैं.इस सिलसिले में शिपिंग मिनिस्टर टी.आर.बालू और कर्नाटक के काँग्रेसी नेता एस.एम.कृष्णा का प्रधानमंत्री से मिलना हुआ.लेकिन आज ही तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. करूणानिधि ने इस परियोजना पर कर्नाटक में चुनाव होने तक रोक लगाकर इसे राजनीतिक मुद्दा बनने से रोकने की कोशिश की हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पिछले तीन चार दिनों से बेंगलूरू और चेन्नई में एक-दूसरे के राज्यों के लोगों के खिलाफ हिंसा का दौर जारी हैं जिसके कारण कर्नाटक में तमिल मीडिया और तमिलनाडु में कन्नड मीडिया चैनलों को बंद करने की भी धमकी दी गयी.कर्नाटक में एक छोटे से राजनीतिक समूह कर्नाटक रक्षा वेदिके ने राज ठाकरे की नीति पर चलते हुये इस मुद्दे पर जगह जगह प्रदर्शन किये.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हद तो तब हो गयी जब दोनों राज्यों के फिल्म कलाकारों ने इस मसले पर अपना विरोध अपने अपने राज्यों में एकजुट होकर अपने तरीके से दर्ज कराया.वैसे भी दक्षिण भारत में फिल्मी कलाकारों को भगवान से कम नहीं माना जाता हैं.इसी में जब दक्षिण के सुपरस्टार रजनीकांत ने अपने जन्मभूमि के बदले कर्मभूमि के समर्थन में आवाज उठायी तो मुंबई में शिवसेना ने अमिताभ को रजनीकांत के सामने बौना साबित कर दिया.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;फिलहाल इस मुद्दे पर कर्नाटक चुनाव तक शांति बनी रहेगी,लेकिन जल विवाद का यह मामला इतनी आसानी से दम तोडने वाला नहीं.भले ही ग्लोबल वार्मिंग के कारण विश्व के समुद्र तटों के कारण बसने वाले शहर जलमग्न होने जा रहे हैं,लेकिन इसी जल के कारण विश्वयुद्ध होने जा रहा हैं- ऐसी स्थिति बनी तो निश्च्य ही यह एक भयावह स्थिति होगी.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-5077143206695902255?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/5077143206695902255/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=5077143206695902255' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5077143206695902255'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5077143206695902255'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/04/blog-post_7086.html' title='पानी को लेकर ही होगा तीसरा महायुद्ध'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-7116463117637769868</id><published>2008-04-03T15:59:00.000-07:00</published><updated>2010-01-15T09:36:03.665-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Sports'/><title type='text'>भारत ने अहमदाबाद में खेला ट्वेंटी-२०</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;९६३३०१४२१०१०० जी हाँ, देखने में तो ये कहीं का मोबाइल नंबर लगता हैं,लेकिन ऐसा नही हैं. १३ अंकों की यह संख्या बयान कर रही हैं भारतीय टीम के धुरंधर बल्लेबाजों की क्रम से बनायी गयी रन संख्या को. जिसमें बीच के १४ और २१ क्रमशः धोनी और पठान ने बनाये हैं, बाकी बल्लेबाज दहाई का भी आँकडा पार करने में सफल नही हुये.भारत ने भी पूरे बीस ओवर खेल कर ७६ रन बनाकर दिखा दिया कि अब भी हम ट्वेंटी-२० के ही मोड में हैं.चाहे विपक्षी टीम टेस्ट खेलने के मूड में क्यों न हो.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चेन्नै टेस्ट में विकेट इतनी सपाट थी कि दोनों टीम के खिलाडियों ने जमकर रनों का अंबार लगाया. गेंदबाजों ने जमकर पिच को कोसा.अब मोटेरा में ऐसी विकेट बन गयी कि भारतीय खिलाडियों को यहाँ सीम करती हुयी गेंद ही नजर ही नहीं आयी. टॉस जीतकर बल्लेबाजी लेना एक सही निर्णय हो सकता था लेकिन बल्लेबाजों ने पहले ही दिन मैच गंवा दिया. लंच से पहले ही टीम के सभी बल्लेबाजों ने पिछले मैच के सैकडों की याद को भूलाते हुये टीम का भी सैंकडा नही बनने दिया.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हमारे गेंदबाज अब उसी विकेट पर निस्तेज साबित हो रहे हैं.पहली पारी के आधार पर दक्षिण अफ्रीका एक बडी बढत की ओर अग्रसर हो रही हैं. अब इस टेस्ट में तो भारत के हाथ जीत लगने से रही.इसका एक कारण साफ हैं इस टेस्ट से पहले भारत की टीम जहाँ एड कैम्पेन में लगी रही वही अफ्रीकी टीम ने जमकर पसीना बहाया.इसकी साफ झलक इस टेस्ट मैच के दौरान देखने को मिल रही हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक प्रदर्शन पर फूल कर कुप्प्पा हो जाने की आदत टीम इंडिया की अभी तक गयी नहीं हैं. इसका खामियाजा दूसरे मैच में देखने को हमेशा मिलता हैं.ऐसी आदत से टीम इंडिया को बचना चाहिये.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-7116463117637769868?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/7116463117637769868/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=7116463117637769868' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/7116463117637769868'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/7116463117637769868'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/04/blog-post.html' title='भारत ने अहमदाबाद में खेला ट्वेंटी-२०'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-8538176693246886328</id><published>2008-03-28T17:45:00.000-07:00</published><updated>2010-01-15T09:38:24.863-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Sports'/><title type='text'>"मुल्तान के सुल्तान" बने चेन्नई के बादशाह</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;"मुल्तान के सुल्तान" वीरेंद्र सेहवाग ने चेन्नई टेस्ट में दूसरा तिहरा शतक लगाकर बता दिया कि लंबी पारी खेलने की कूव्वत अगर भारतीय टीम में किसी खिलाडी के पास हैं तो वो सिर्फ नजफगढ के वीरू ही हैं. भारतीय सरजमीं पर घरेलू दर्शकों के सामने पहली बार भी तिहरा शतक मारने का कारनामा भी वीरेंद्र सेहवाग के ही नाम गया.सबको इससे पहले एक आस जगायी थी वी.वी.एस. लक्ष्मण ने,लेकिन वे १९ रन से चूक गये थे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज की पार को भी सेहवाग ३०९ रनों तक ले गये हैं. टेस्ट इतिहास में दूसरी बार तिहरा शतक मारने वाले तीसरे खिलाडी बनने का सौभाग्य वीरू को प्राप्त हुआ. इससे पहले ये कारनामा सर डॉन ब्रैडमैन और ब्रायन लारा के नाम हैं. लारा के नाम तो टेस्ट क्रिकेट में ४०० रन मारने का अनोखा रिकॉर्ड हैं.इसकी बराबरी करना ही कल वीरू का पहला लक्ष्य होगा.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;टीम चयन के बाद सबसे ज्यादा सवाल भारतीय टीम की ओपनिंग जोडी पर उठाये जा रहे थे. कहाँ तो ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिये संभावित खिलाडियों की सूची में भी वीरेंद्र सेहवाग का नाम नही था.लेकिन उनके एडिलेड टेस्ट के डेढे शतक के बाद इस सीरिज के लिये लेना तो जरूरी था ही,इसके साथ ही वन-डे टीम के लिये भी अपनी दावेदारी मजबूत कर ली हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सभी खेल प्रेमी कल उनके ४०० रन का इंतजार करेंगे,अगर वे ऐसे ही खेलते रहे तो वो मंजिल भी पाना कोई मुश्किल काम नही होगा. सबसे तेज तिहरे शतक बनाने के बाद लारा के रिकॉर्ड का टूटने का हम इंतजार कर रहे हैं.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-8538176693246886328?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/8538176693246886328/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=8538176693246886328' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8538176693246886328'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8538176693246886328'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/03/blog-post_28.html' title='&quot;मुल्तान के सुल्तान&quot; बने चेन्नई के बादशाह'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-5350647954337608401</id><published>2008-03-27T15:50:00.000-07:00</published><updated>2008-03-27T03:20:57.968-07:00</updated><title type='text'>हिन्दी खबरिया चैनलों की मानसिक दिवालिएपन की "वंदना"</title><content type='html'>अब कुछ दिन का और इंतजार ,खबरिया चैनलों के गड्ढे वाले समाचार की अपार सफलता के बाद दूसरे जूली-मटूकनाथ की खोज जारी हैं.सभी चैनल वालों ने अपने रिपोर्टरों को ऐसे ही एक जोडे की खोज के लिये अपने अपने शहर के विश्वविद्यलयों या कोचिंग संस्थानों के लिये भेज दिया हैं. प्रिंस के बाद वंदना के गिरने में समय का जो अंतराल हैं,उसी के अनुसार जूली की खोज जारी हैं. अगर नही मिल रही हैं तो रिपोर्टरों तुम्हारी खैर नही.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कल फिर से समाचार चैनल देखते वक्त उन्हीं परिस्थितियों का सामना करना पडा जो आज से दो साल पहले करना पडा था.सभी चैनल 'वंदना' को बोरवेल से वेल तरीके से निकालने में अपने चैनल की टीम को भेजे हुये थे.कैमरामैन से लेकर रिपोर्टर तक को घूम घूम कर प्रिंस का वाकया याद आ रहा था.क्या उतनी देर ही हमें जूझना पडेगा या कम ही देर में काम हो जायेगा बच्ची को बचाने का. इधर सभी न्यूज चैनलों के न्यूजरूम में बस एक ही बात ..देखो जब वो चैनल इस खबर से खेल रहा हैं तो हम क्यों नहीं. ऐसा करते करते अँग्रेजी के भी समाचार चैनल भी इसी खबर से खेलने में लग गये.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"टाइम्स नाउ" ने तो इस खबर को मीडिया हाइप बताकर कुछ चर्चा भी कर ली.लेकिन बाकी सभी चैनलों ने तो इस घटना का लाइव प्रस्तुतीकरण देना ही बेहत्तर समझा. बीच बीच में कुछ समझदार प्रस्तोता यह सवाल उठा देते कि इतने गहरे गड्ढे को ढँका क्यूँ नही गया. अबे होशियार एंकरों अगर उस बोरवेल का मुँह ढँका रहता तो तुम्हारा मुँह सत्ताइस घंटे के लिये कैसे खुलता.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रोड्यूसर से लेकर दूसरे बीट तक के सभी लोग खुश.चलो आज की तो हो गयी छुट्टी.आज के दिन वंदना ने बचा लिया,नही तो कहाँ से कोई कहानी बनकर आती. फिल्मी स्टाइल में पुराने फिल्मों का रीमेक  बनने में कई दशक लग जाते हैं.वैसे ही समाचारों का रीमेक बन जायें तो बुरा नहीं हैं.लेकिन समाचार के साथ फिल्मों वाली बात नहीं हैं.समाचारों का उतना असर नहीं होता हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हिन्दी खबरिया चैनल वाले अब कितना भी दर्शकों को बेवकूफ समझ ले लेकिन इस चक्कर में वे स्वयं ही कितनी बुरी तरीके से समाचारों से कटते जा रहे हैं,इसका उन्हें एह्सास तक नही हैं.अब तक सँभलने का काम नही हो रहा हैं,वह दिन दूर नहीं हैं जब समाचार चैनलों को चलाने का लाइसेंस देने वाली सरकार ही जब "कंटेंट कोड" लायेगी तो इसे प्रजातंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला मान लिया जायेगा.जितनी जल्दी से लाइसेंस मिले है उतनी जल्दी ही ब्लैक आउट होने का खतरा बना रहेगा. पूछना हैं तो "लाइव इंडिया" में काम करने वालो से पूछिए उनकी हालत तब कैसी हो गयी थी जब उमा खुराना स्टिंग के कारण चैनल का भविष्य ही अंधकारमय नजर आने लगा था.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब भी वक्त हैं दर्शकों को बेवकूफ समझना बंद कर समाचार दिखाना शुरू करें,नही तो दूसरे को बेवकूफ समझते समझते कही बेवकूफी मे किसी दूसरे  चैनल पर यह खबर नही चल जायें कि फलाँ चैनल अब "हिस्ट्री" हो गया हैं,क्योंकि उसकी न्यूजों की "डिस्कवरी" नेशनल  ज्योग्राफी क्षेत्र में नही थी.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-5350647954337608401?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/5350647954337608401/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=5350647954337608401' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5350647954337608401'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5350647954337608401'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/03/blog-post_27.html' title='हिन्दी खबरिया चैनलों की मानसिक दिवालिएपन की &quot;वंदना&quot;'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-7713169416418374985</id><published>2008-03-25T15:51:00.000-07:00</published><updated>2008-03-25T03:21:47.363-07:00</updated><title type='text'>वेतन तो बढा, वे तन की क्षमता को बढायेंगे क्या?</title><content type='html'>छठे वेतन आयोग की सिफारिशें सब के सामने आ चुकी हैं. कैबिनेट सचिव को तीस हजार के बदले अब नब्बे हजार रूपये वेतन के रूप में मिलेंगे.सबकी आँखे कल से टेलीविजन के बाद आज अखबारों से चिपकी पडी हैं. चालीस से पचास फीसदी की बढोत्तरी बतायी जा रही हैं, लेकिन यहाँ तो सीधे तौर पर देखने पर दो सौ फीसदी की बढोत्तरी देखने को मिल रही हैं. गणना का क्या हिसाब हैं,देश के नीति-निर्माता ही जाने. लेकिन बढोत्तरी को जायज बताया जा रहा हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज के युवाओं को देश की सरकारी नौकरी की तरफ आकर्षित करने की यह पहल काफी सराहनीय हैं. खासकर सेना में घटती संख्या देश के लिये एक चिंता का विषय थी,इस बार सेना में भी वेतन बढोत्तरी कर इसे भी युवाओं के लिये एक कैरियर ऑप्शन के रूप में देखने के लिये मजबूर करेगा. 'प्रतिभा-पलायन' को भी रोकने के लिये इसे अहम माना जा रहा हैं.प्राइवेट सेक्टर और विदेशों में पैसा के लिये जाने वाले लोग तो अब भी जायेंगे.लेकिन कहीं ना कहीं एक बार फिर से प्राइवेट के ऊपर लोग सरकारी नौकरी को तरजीह जरूर देंगे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वेतन तो बढा,खूब बढा. लेकिन क्या सरकारी कर्मचारी से क्या हम उस तरह के काम की आशा रख सकते हैं जो कि प्राइवेट सेक्टर के लोग करते हैं. सिर्फ वेतन बढा देने से सरकारी कर्मचारियों की कार्य क्षमता में बढोत्तरी हो जायेगी,ऐसा अभी तो होता हुआ नही प्रतीत होता हैं. इसके लिये सरकार को कडे कायदे कानून लाने पडेंगे तभी जाकर कुछ स्थिति सुधर सकती हैं."हायर और फायर" पॉलिसी के तहत निजी क्षेत्रों में काम को कम समय में और सही तरीके से करने का दवाब बना रहता हैं. ऑउटपुट भी ज्यादा आता हैं. इसे सरकारी क्षेत्र में भी लागू करना होगा तभी जाकर कोई बात बन सकती हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अभी तक जो सरकारी "बडा बाबू" या छोटे से छोटे स्तर का कर्मचारी वेतन कम होने की दुहाई देते हुये चाय-पानी का पैसा लेना अपनी मजबूरी बताता था. क्या वे इस चाय पानी का खर्च अपने वेतन से ही करना पसंद करेंगे के अभी भी वेतन बढने के बाद भी घूसखोरी जैसे परम पावन कर्त्तव्य को जारी रखेंगे.जिसे एक्स्ट्रा आमदनी का नाम देने से नही चूकते हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सरकार ने तो केंद्रीय कर्मचारियों को तो चुनावी साल में होली के अवसर पर काफी बडा तोहफा तो पकडा दिया हैं,लेकिन क्या राज्य सरकार अपने कर्मचारियों का वेतन इस प्रकार बढा पायेगी? अभी तो संभव नही लगता हैं.ऐसा कोई भी कदम उठने से पहले राज्य सरकारों को कई बार सोचना पडेगा.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वेतन बढा.बहुत अच्छी बात हैं.लेकिन कार्य क्षमता भी बढनी चाहिये."सरकारी" शब्द का प्रयोग भी सही अर्थों में नही होता हैं. कोई ना कोई तलवार लटकानी चाहिये तभी जाकर इन सरकारी कर्मचारियों की कार्यक्षमता में बढोत्तरी होगी.अभी भी वे अपने बढे हुये वेतन के अनुपात में कार्यक्षमता बढा दे तो भारत को २०२० तक सर्वशक्तिसंपन्न देश बनने से कोई नही रोक सकता हैं.अगर नही बढाये तो सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट तब तक आ जायेगी और हम तब भी विकासशील राष्ट्रों की श्रेणी से निकलने की जद्दोजहद करते नजर आयेंगे.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-7713169416418374985?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/7713169416418374985/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=7713169416418374985' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/7713169416418374985'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/7713169416418374985'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/03/blog-post_25.html' title='वेतन तो बढा, वे तन की क्षमता को बढायेंगे क्या?'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-5676077237369168839</id><published>2008-03-21T16:37:00.000-07:00</published><updated>2008-03-21T04:15:51.148-07:00</updated><title type='text'>अनहोनी को होनी सिर्फ कर सकता है धोनी</title><content type='html'>होनी को अनहोनी कर दे,अनहोनी को होनी जब एक जगह जब जमा हो तीनों सचिन,सौरव और द्रविड.(कुछ जमा नही,कोई बात नही. आगे देखते हैं) जी हाँ,ऐसी ही तस्वीर थी पिछले एक दशक से भारतीय क्रिकेट की.इन तीनों रनबाँकुरों पर ही भारतीय टीम को भरोसा था कि अगर इनमें से कोई एक भी चल गया था तो भारत किसी भी परिस्थितियों में मैच जीत सकता हैं. २००७ के विश्व कप तक तो सबकुछ ठीक चला लेकिन टीम इंडिया के लीग मुकाबलों से बाहर होने के साथ साथ यह तस्वीर कुछ धुँधली नजर आने लगी.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसी बीच धोनी को वन-डे और ट्वेंटी-२० की कप्तानी मिली,दोनों फॉर्मेट में बडी बडी जीतों ने उपरोक्त गाने को सही रूप दे दिया.होनी को अनहोनी कर दे,अनहोनी को होनी जब एक जगह जब जमा हो तीनों- एक सीनियर,बाकी जुनियर और कप्तान धोनी.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हाल में कप्तान के एक बयान को लेकर सारे मीडिया में हल्ला हैं कि उनके कहने पर ही दो सीनियर्स- सौरव और द्रविड को वन-डे टीम से बाहर रखा गया. पूर्व खिलाडियों ने इस बयान की आलोचना की. साथ ही कुछ घंटे पूर्व शरद पवार साहब को यह कहना पडा कि सचिन के कहने पर ही टीम इंडिया की कमान धोनी को सौंपी गयी थी.&lt;br /&gt;अब ऐसी टिप्प्णी से यह कयास लगाये जा रहे हैं कि कही इसी कारण मास्टर ब्लास्टर टीम में तो नही बने हुये हैं.नही तो फाइनल की दो पारियाँ हमें देखने को नही मिलती.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ऐसी बातों का बाहर खुलकर सामने आने से खिलाडियों के बीच चल रही राजनीति तो सामने आती ही है,साथ ही इन सब चीजों का खिलाडियों के मनोबल पर भी बुरा प्रभाव पडता हैं.ऐसी चीजों से खेल और खिलाडियों को बचना चाहिये.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-5676077237369168839?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/5676077237369168839/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=5676077237369168839' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5676077237369168839'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5676077237369168839'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/03/blog-post_5600.html' title='अनहोनी को होनी सिर्फ कर सकता है धोनी'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-589818819444667206</id><published>2008-03-21T16:03:00.000-07:00</published><updated>2008-03-21T03:34:01.134-07:00</updated><title type='text'>भारत के चीफ मिनिस्टर कौन हैं?</title><content type='html'>आजकल समाचार चैनलों में डी.डी. न्यूज का समाचार आप ना देखो तो एक केंद्रीय मंत्री के हिसाब से आप गद्दार हैं.अगर देखो तो नित नये नये सामान्य ज्ञान से परिचय होता है."भारत के चीफ मिनिस्टर के.जी. बालाकृष्णन" ऐसा कहते हुये एक न्यूज स्टोरी की शुरूआत अंग्रेजी के एक न्यूज बुलेटिन में किया जाता हैं.वैसे भी डी.डी. न्यूज के न्यूजरूम में यह एक आम धारणा प्रचलित हैं कि हमारा समाचार चैनल देखता ही कौन हैं.इसलिये जो चलता है चला दो.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह न्यूज स्टोरी १५ मार्च को सुबह साढे आठ बजे वाले बुलेटिन में( समाचार वाचिका थी कोई)चलायी गयी.ऐसे में यह समाचार चैनल अपनी विश्वसनीयता ऐसे ही खोता जा रहा हैं और न्यूजरूम की मानसिकता भी इसमें अहम भूमिका निभा रहा हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इससे ठीक एक दिन पहले डी.डी. के नेशनल चैनल पर डेढ घंटे का एक कार्यक्रम चलाया गया था जिसमें टी.आर.पी. को लेकर मीडिया जगत के दिग्गजों को बुलाकर एक 'हेल्दी' डिस्कशन करवाया गया. जिसमें डी.डी. के ४० प्रतिशत प्रसार की बात ग्रामीण क्षेत्रों में हैं,ऐसा बताकर डी.डी. के टी.आर.पी. के चक्कर में ना पडने की बात उनके प्रतिनिधि ने बतायी थी. तो क्या  जिन जगहों पर सिर्फ दूरदर्शन ही समाचार या मनोरंजन का साधन है वहाँ भी इसी तरह की 'चलता है' वाली मानसिकता वाले समाचार के भरोसे रहना होगा.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वैसे जो चल रहा हैं निजी समाचार चैनलों पर वह तो पूरी तरह से मानसिक दिवालिएपन की निशानी है.इसलिये&lt;br /&gt;निजी हो या सरकारी समाचार चैनलों के लिये अब सरकार को कंटेंट कोड बनाना ही पडेगा,जिससे कि हमें वास्तव में समाचार देखने को मिले ना कि 'मेट्रो नाऊ' या इसी तरह के किसी अखबार से उठायी गयी स्टोरी का  दृश्यात्मक विवरण देखने को मिले.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-589818819444667206?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/589818819444667206/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=589818819444667206' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/589818819444667206'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/589818819444667206'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/03/blog-post_21.html' title='भारत के चीफ मिनिस्टर कौन हैं?'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-1852851077028175581</id><published>2008-03-19T16:17:00.000-07:00</published><updated>2008-03-19T03:48:25.680-07:00</updated><title type='text'>राष्ट्रीय पशु,पक्षी और खेल सब खतरे में</title><content type='html'>बचपन में जब हम नन्हे सम्राट पढा करते थे तो बीच के पृष्ठों में मूर्खिस्तान के दो पन्ने जरूर पढा करते थे,जो कि कार्टून की शक्ल में हुआ करता था.वहाँ भी राष्ट्रीय पशु,पक्षी और खेल हुआ करते थे,ये क्रम से बंदर(?),उल्लू और गिल्ली-डंडा थे.राष्ट्रीय बाघ,मोर और हॉकी से ज्यादा ये हमे अपीलिंग लगा करते थे.लेकिन आज के दिन में  वो बात नहीं रही. आज मीडिया में ये हमारे राष्ट्रीय धरोहर कुछ ज्यादा ही सुर्खियाँ बटोर रहे हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सबसे पहले बात करे राष्ट्रीय पशु बाघ की. इस पर तो एन.डी.टी.वी. ने तो 'सेव द टाइगर' कैम्पेन चलाकर बाघ को बचाने की मुहिम ही छेड रखी हैं. बाघ की गिरती संख्या वास्तव में ही चिंता का विषय हैं. डेढ हजार से भी कम संख्या में इनकी उपस्थिति आने वाले समय में पारिस्थितिकी तंत्र पर उल्टा असर डाल सकता हैं. सरकार तो उपाय करने में लगी हुयी ही हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुछ यही हाल हमारे राष्ट्रीय पक्षी मोर का भी हाल हैं. आज ही सुबह एक टी.वी. समाचार के अनुसार बुलंदशहर में एक आदमी ने पचास मोरो को मारकर दफन कर दिया हैं. इसी तरह कुछ दिन पहले भी एक दृश्य में मरे हुये मोरों को बच्चें हाथ में पकडे हुये दिखाये जा रहे थे,यह खबर किसी दूसरे जगह से थी. मोरों या बाघों को मारकर शिकारी लोग उनके पंखों और खाल की तस्करी करते हैं, जो कि सही नहीं हैं. सरकार भी इस दिशा में कोई कदम नहीं उठा रही हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब बात करे 'अस्सी साल बनाम सत्तर मिनट' खबर की यानि कि सत्तर मिनट में अस्सी साल का गौरव खत्म करने वाले राष्ट्रीय खेल  हॉकी के खिलाडियों की.ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम नजर नहीं आयेगी.चलिये वैसे भी वे वहाँ जाकर क्या उखाड लेते, इससे तो बढिया हुआ कि जाकर सिर्फ बीजिंग घूम कर आते और  आठवाँ या नौंवा स्थान में ही संतोष करते.सबसे बडी बात तो यह हुयी कि बहुत सारे लोगों ने इस खबर से यह तो जान लिया होगा कि भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी हैं. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पूर्व हॉकी खिलाडी भी फूले नही समा रहे थे कि जब वो खेला करते तो उन्हें कोई जाना नहीं करता था, अब तो उस दिन हर कोई उन्हें टी.वी. पर देख रहा था और पहचानने कि कोशिश कर रहा था.साथ ही सभी खबरिया चैनलों ने इतना सारा समय हॉकी जैसे खेल पर दिया मानो हॉकी की भी स्थिति वैसी ही हुयी जैसे सौ सुनार की और एक लुहार की. जितना समय हम अपने "नेशनल" खेल को देते है,उतना समय कम से कम एक दिन के लिये तो राष्ट्रीय खेल ने भी तो पा ही लिया. इस बात की खुशी भी पूर्व खिलाडियों को थी.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वैसे हॉकी खिलाडियों का भी कोई दोष भी नही हैं, एक हजार की इनाम राशि एक गोल के लिये वो भी पूरे टीम को,यानि कि "आपके जमाने में बाप के इनाम" पर कैसे एक टीम अपने खेल के प्रदर्शन को सुधार सकती हैं, और हॉकी के मठाधीश इसी तर्ज पर सोने के तमगे की उम्मीद लगाये बैठे थे.तो खिलाडियों ने भी घर पर ही सोना उच्त समझा.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-1852851077028175581?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/1852851077028175581/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=1852851077028175581' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/1852851077028175581'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/1852851077028175581'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/03/blog-post_19.html' title='राष्ट्रीय पशु,पक्षी और खेल सब खतरे में'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-5067427729890761581</id><published>2008-03-06T17:18:00.000-08:00</published><updated>2008-03-06T03:48:39.414-08:00</updated><title type='text'>हमारे वक्त में 'बहरूप' के बहरूपिये</title><content type='html'>ये सब कुछ हमारे ही वक्त में होना था&lt;br /&gt;वक्त को रूक जाना था थकी हुयी जंग की तरह &lt;br /&gt;और कच्ची दीवारों पर लटके कैलेंडरों को &lt;br /&gt;प्रधानमंत्री की फोटो बनकर रह जाना था&lt;br /&gt;मेरे यारों हमारे वक्त का एहसास बस इतना ही ना रह जाए&lt;br /&gt;कि हम धीरे धीरे मरने को ही जीना समझ बैठे थे&lt;br /&gt;कि वक्त हमारी घडियों से नही हड्डियों के खुरने से नापा गया&lt;br /&gt;ये गुरूड हमारे ही वक्त का होगा,&lt;br /&gt;ये गुरूड हमारे ही वक्त को होना हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मंडी हाउस के श्रीराम सेंटर में बहरूप ग्रुप की प्रस्तुति 'हमारे वक्त में' प्ले देखने गया, वही इन पंक्तियों से परिचय हुआ. काफी अच्छी लगी इसलिये इसे उधृत कर रहा हूँ.प्ले मीडिया पर था जिसके पहले ही दृश्य में नेपथ्य से राँची के आकाशवाणी केंद्र से पढा गया समाचार अंतिम समाचार था और फिर इन पंक्तियों को भी नेपथ्य से ही कहा गया.&lt;br /&gt;पहले सीन मे इलेक्ट्रोनिक मीडिया की एक पत्रकार ने देश के गृहमंत्री का इंटरव्यू लिया और जाने के क्रम में उनका नाम स्पेलिंग के साथ पूछा. काश ये सिर्फ नाटक में हुआ रहता तो अच्छा था लेकिन सच मे ऐसा हुआ था.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मीडिया के दशा और दिशा पर नाटक ने काफी सटीकता के साथ प्रकाश डाला.शाहिद अनवर साहब की स्क्रिपटिंग और के.एस.राजेंद्रन साहब के  निर्देशन में कलाकारों ने काफी अच्छा अभिनय कर नाटक में जान डाल दिया. केके और घावरी का अभिनय लोगों ने ज्यादा पसंद किया.कलाकारों द्वारा एक शब्द के गलत उच्चारण पर दर्शक दीर्घा में एक साहबान की टिप्पणी कि सारे नाटक का सत्यानाश कर डाला - निश्चय ही यह सोचने पर मजबूर करती है कि अब भी आपके द्वारा बोले गये एक एक शब्द की स्क्रूटनी की जाती हैं,ऐसे ही आप गलत बोलकर अपना काम नही चला सकते हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बहरूप से मेरा जुडाव ज्यादा पुराना नहीं हैं. जे.एन.यू. में या मंडी हाउस के किसी ऑडिटोरियम में इस ग्रुप के नाटक को देखने का सिलसिला पिछले एक साल से ही हैं. एक दर्शक के रूप में ही जुडाव हैं.ऊपर लिखी गयी पंक्तियाँ अवतार सिंह साहब की हैं जो पाश नाम से पंजाबी में कवितायें लिखते थे.हमारे वक्त में इन बहरूप के बहरूपियों की यह प्रस्तुति समय  के गुरूड  को रेखांकित करती हैं जो अच्छा हैं और होना भी चाहिये.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-5067427729890761581?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/5067427729890761581/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=5067427729890761581' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5067427729890761581'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5067427729890761581'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/03/blog-post.html' title='हमारे वक्त में &apos;बहरूप&apos; के बहरूपिये'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-6402721607109108040</id><published>2008-02-26T03:53:00.000-08:00</published><updated>2008-02-26T03:59:32.051-08:00</updated><title type='text'>नफरतों के फल जायका नहीं देते.</title><content type='html'>रंज दे कर आखिर क्यूँ मुस्कुरा नही देते&lt;br /&gt;तुम सजा तो देते हो, हौसला नही देते&lt;br /&gt;मौसमों की साजिश से पेड फल तो देते हैं,&lt;br /&gt;नफरतों के फल जायका नहीं देते।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  एक शायर ने हाल में ही क्या खूब कहा. देवबंद के दारूल उलूम के द्वारा आतंकवाद को गैर-इस्लामिक घोषित किये जाने के बाद ये शायरी खूब फिट बैठती हैं उन नफरतों के सौदागरों पर जो बेमतलब के अमन और शांति के दुश्मन बने हुये हैं.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-6402721607109108040?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/6402721607109108040/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=6402721607109108040' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/6402721607109108040'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/6402721607109108040'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/02/blog-post_26.html' title='नफरतों के फल जायका नहीं देते.'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-6318051852908608694</id><published>2008-02-23T01:28:00.001-08:00</published><updated>2008-02-23T01:28:49.513-08:00</updated><title type='text'>"तमाशबीन" शब्द का सही अर्थ क्या हैं?</title><content type='html'>तमाशबीन बनी देखती रही पुलिस&lt;br /&gt;यह स्लग आज दोपहर बारह बजे देश के सबसे तेज कहे जाने वाले समाचार चैनल 'आज तक' पर बिहार के हाजीपुर की घटना के संदर्भ में बार बार दिखाया जा रहा था. पुलिस के सामने एक आरोपी युवक को पीट पीट कर अधमरा करने के फूटेज भी दिखाये जा रहे थे.&lt;br /&gt;बाद में समय चैनल ने भी इसी शीर्षक का उपयोग अपने न्यूज फ्लैश में भी किया.&lt;br /&gt;पुलिस तमाशा तो देखती रही, लेकिन क्या वह वाकई में तमाशबीन थी या तमाशाई? कॉलेज में पढने के क्रम में एक शिक्षक ने  तमाशबीन शब्द पर जोर देते हुये कहा था कि इसका अर्थ कोठे पर जाने वाला होता हैं, सही शब्द हैं तमाशाई.&lt;br /&gt;इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में इस शब्द का धडल्ले से उपयोग हो रहा हैं. बी.बी.सी. हिन्दी की साइट पर भी इस शब्द का प्रयोग अँग्रेजी के ऑनलुकर या स्पेक्टेटर के रूप में होता हैं.क्या यह इस शब्द का सही अर्थ हैं या  इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हमारे लिये नई शब्दावली गढ रहा हैं?&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-6318051852908608694?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/6318051852908608694/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=6318051852908608694' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/6318051852908608694'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/6318051852908608694'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/02/blog-post_23.html' title='&quot;तमाशबीन&quot; शब्द का सही अर्थ क्या हैं?'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-3429301701368368568</id><published>2008-02-21T03:09:00.000-08:00</published><updated>2008-02-21T03:10:03.660-08:00</updated><title type='text'>धोनी ने फिर मारा "छक्का"</title><content type='html'>क्रिकेट में छक्का मारने में माहिर भारतीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने मंगलवार को श्रीलंका के खिलाफ एक अहम मुकाबले में भले ही एक भी बाउंड्री नही मारी हो,लेकिन आई.पी.एल. लीग के लिये लगने वाली बोली में वे ही एक मात्र खिलाडी थे जिन्हें छह करोड में चेन्नई सुपर किंग टीम ने खरीदा.यानि कि मैदान के बाहर भी छक्का मारने में वे ही सफल हुये.&lt;br /&gt;एक समय था जब मैदान में टीम इंडिया को जीतने के लिये कुछ रनों की आवश्यकता होती थी तब धोनी से दर्शक छक्का मार जिताने की डिमांड करते थे.लेकिन आज समय के अनुरूप खेल में काफी परिवर्त्तन किया और अब एक अच्छे फिनीशर की भूमिका बखूबी निभा रहे हैं.एक चौका भी नही लगा श्रीलंका के खिलाफ मैच जिताना धोनी की जीवटता की निशानी हैं. काफी कम समय में कप्तान के पद पर पहुँचने में उनकी समझदारी ने ही अहम भूमिका निभायी,नही तो युवराज का कप्तान बनना तय माना जा रहा था.&lt;br /&gt;धोनी की ऊँची कीमत मे  उसके ब्रांड वैल्यू ने भी बडी भूमिका निभायी.बाजार के इस फॉर्मूले ' जो दिखता हैं वह बिकता हैं'ने भी धोनी की कीमत तय करने में मदद की. पैसे की बरसात के बीच उसके पिता पान सिंह धोनी ने कहा खूब तरक्की करे मगर पैर  जमीन पर ही रहे तो अच्छा हैं. राँची जैसे छोटे शहर से निकलकर क्रिकेट जगत में लोहा मनवाने वाले धोनी के पैर जमीन पर ही हैं, मीडिया में ही समय समय पर कप्तान के रूप में मनमानी करने के आरोप लगते रहते हैं. युवराज को हालिया श्रृंखला में असफल रहने के बावजूद मौका देने को मीडिया ने काफी जोर शोर से उठाया , लेकिन अंततः धोनी का निर्णय सही साबित हुआ.&lt;br /&gt;आई. पी. एल. लीग में सबसे ज्यादा बोली लगने के बाद उनके ब्रांड वैल्यू में और भी इजाफा हुआ हैं,लेकिन दर्शक अभी भी उनके द्वारा यॉर्कर बॉल पर छक्का मारते देखना चाहते हैं ,जो कि उनका कॉपीराइट शॉट हैं.ना कि मैदान के बाहर लगने वाले ये छक्के.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-3429301701368368568?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/3429301701368368568/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=3429301701368368568' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/3429301701368368568'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/3429301701368368568'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/02/blog-post_21.html' title='धोनी ने फिर मारा &quot;छक्का&quot;'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-3299561517841540417</id><published>2008-02-19T03:12:00.000-08:00</published><updated>2008-02-19T04:00:27.812-08:00</updated><title type='text'>खल गया खली का हारना</title><content type='html'>हिन्दी खबरिया चैनलों के लिये पिछले कई महीनों से हाथ लगा एक मसाला एकाएक इस रविवार को हाथ से फिसल गया. तीन मिनट में डब्लयू.डब्लयू.ई. के रेस्टलिंग मुकाबले में धूल चाटने वाले खली ने देश के सभी प्रमुख चैनलों के प्राइम टाइम के तीन तीन घंटे की बाट लगा दी. खली का हारना इतना खला कि उसकी हार को प्राइम टाइम में तीन मिनट भी नहीं मिले.&lt;br /&gt;टी.आर.पी. के खेल ने जहाँ देश के सभी हिन्दी चैनलों को खली का खेल दिखाने को मजबूर किया, वहीं इसकी हार ने इस खबर पर सोमवार को चैनलों को खेलना का मौका नहीं दिया. शनिवार और रविवार को सभी न्यूज चैनल खली की खबर पर इतना खेले कि उन्हें आगे खेलने का मौका ही नहीं मिला.&lt;br /&gt;हकीकत जैसी खबर वैसी का दावा करने वाले चैनल " जी न्यूज" ने तो शनिवार को प्राइम टाइम में खली के अलावा आधा घंटा संजय दत्त की शादी बचाने को दे दिया नही तो पता ही नही चल रहा था कि हम कोई समाचार चैनल देख रहे हैं. रविवार को भी वही हाल रहा.'जूनियर खली', 'खली बनो बजरंगबली' जैसे कार्यक्रम जारी रहे.लेकिअन हार को अगले दिन तीन मिनट भी नहीं मिले.&lt;br /&gt;आज तक ने भी इसमे कोई कसर नही छोडी. स्टार न्यूज तो कितनी बार खली को ही दिखाकर टी.आर.पी. के खेल में नंबर वन चैनल बना था तो वो भी पीछे नहीं रहा.आज तक ने 'खेल रहा है खली' , 'आई लव यू खली' और 'खली बन जा काली' दिखा अपने प्राइम टाइम के समय का सही उपयोग किया.&lt;br /&gt;अंततः खली का हारना इन चैनलों के लिये सबसे बडी हार साबित हुयी. फिर से उन्हीं खबरों पर लौटना जो कि टी.आर.पी. ला सके की खोज जारी हैं. इंतजार करते रहिये अगले खली या राम का जो कि प्राइम टाइम पर करिश्मा दिखा सके.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-3299561517841540417?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/3299561517841540417/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=3299561517841540417' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/3299561517841540417'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/3299561517841540417'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/02/blog-post_4734.html' title='खल गया खली का हारना'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-8150336294595443591</id><published>2008-02-19T03:11:00.000-08:00</published><updated>2008-02-19T03:12:10.977-08:00</updated><title type='text'>बिजनेस अखबारों ने भी समझा हिन्दी का मह्त्त्व</title><content type='html'>"हिन्दी तो देश की धडकन हैं"- प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने आवास पर आये इकोनॉमिक टाइम्स के पत्रकारों से कहा, जब उन्होनें इस अखबार का हिन्दी संस्करण का पहला अंक प्रधानमंत्री को सौंपा.पिछले एक हफ्ता में यह बिजनेस अखबारों का हिन्दी में निकलने वाला दूसरा पत्र बना. इससे पहले बिजनेस स्टैंडर्ड ने भी हिंदी में ही बिजनेस अखबार निकाला. इस तरह एक ही सप्ताह में देश के दो अँग्रेजी के प्रमुख बिजनेस अखबारों ने अपना हिन्दी में संस्करण निकाल जहाँ हिन्दी भाषी वर्ग के बीच अपनी पैठ बनाने की सोची हैं, वही यह बात भी साबित हो रही हैं कि इस देश में अभी भी हिन्दी भाषा का अँग्रेजी से कमतर महत्त्व नही हैं.&lt;br /&gt;देश में पहले से ही दो हिन्दी के बिजनेस चैनल - सीएनबीसी आवाज और जी बिजनेस दर्शकों में बाजार में होने वाले उठापटक की तस्वीरें दिखाकर सम्मोहित करने में कोई कसर नहीं छोड रखा हैं.अब जाकर प्रिंट मीडिया ने भी इस तरफ पहल की हैं, जो कि आने वाले समय में काफी लाभ का सौदा साबित होगा. इकोनॉमिक टाइम्स ने तो इससे पहले गुजराती संस्करण निकाल क्षेत्रीय भाषा में अपनी पैठ बना रखी थी, वहाँ की सफलता देख हिन्दी में बिजनेस अखबार निकालना मुनाफे का ही सौदा लगा. अब किसी भी काम का बॉटमलाइन जहाँ सिर्फ प्रॉफिट रह गया हैं वहाँ इन बिजनेस अखबारों के इतने दिन बाद निकलने का सिर्फ यही एक मतलब हैं.&lt;br /&gt;शेयर बाजार में रोज हो रही उठा पटक को समझने के लिये भी सिर्फ चैनलों या अखबारों के एक पन्ने के भरोसे तो नहीं रहा जा सकता हैं इसलिये हिन्दी भाषी लोगों के लिये यह एक जरूरत भी बन गयी. लाल-पीले रंग के दिखने वाले इन अखबारों को पढकर एक्सपर्ट तो नहीं बना जा सकता हैं लेकिन बाजार की भेडचाल को समझने के लिये एक माध्यम हो सकता हैं.&lt;br /&gt;बाजार की समझ और हिन्दी में पकड रखने वालों के लिये भी बिजनेस पत्रकारिता के नये एवेन्यू खुलेंगे.एक बार तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक बिजनेस अखबार ने बहुत पहले अपने अखबार में कॉलम लिखने के लिये एक लाख रूपये महीने देने की पेशकश की थी, लेकिन इतनी बडी राशि होने के कारण उन्हें यह जँचा नही. हिन्दी अर्थशास्त्रीयों के लिये भी यह सुनहरा मौका होगा कि वे भी अपना ज्ञान इन अखबारों के माध्यम से पाठकों के साथ शेयर करें.&lt;br /&gt;बाजार ने भी अंततः हिन्दी की महत्ता समझी,लेकिन इसमें भी लाभ देखकर ही,ऐसे नहीं.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-8150336294595443591?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/8150336294595443591/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=8150336294595443591' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8150336294595443591'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8150336294595443591'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/02/blog-post_19.html' title='बिजनेस अखबारों ने भी समझा हिन्दी का मह्त्त्व'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-7469582173441667491</id><published>2008-02-16T02:39:00.000-08:00</published><updated>2008-02-16T03:22:24.485-08:00</updated><title type='text'>अगर शादी करने जा रहे हैं तो बनाइये अपना "वेडपेज"</title><content type='html'>जी हाँ. इंटरनेट के इस युग में अगर अपने दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले संबंधियों और दोस्तों को इस बात की शिकायत रहती हैं कि कार्ड नहीं मिला,तो उनकी इस शिकायत को दूर करने के लिये भी इंटरनेट पर ऐसी सेवायें मौजूद हैं कि आप अपने सगे-संबंधियों को ई-निमंत्रण भेज सकते हैं.इसके लिये आपको कुछ ऐसी साइटे है जहाँ जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करवाना होगा.और अपने मनपसंद ले-आउट में, पसंद के रंगों में ऐसे "वेडपज" बना सकते हैं,जिसमे कि आपकी,आपके जीवन-साथी की जानकारी,तस्वीरें और शादी के कार्यक्रमों की पूरी सूचना के अलावा शादी-स्थल की जानकारी और आपके शहर में पडने वाले अन्य महत्त्वपूर्ण स्थलों की जानकारी हो सकती हैं.&lt;br /&gt;अभी अपने देश में यह पहल नयी हैं,फिर भी ऐसे साइटों पर इसके विषय में जानकारी लेनेवालों की कमी नहीं है.ये साइटे हैं- ऑवरवेडिंग.इन , फर्स्टफेरा.कॉम और माईड्रीमशादी.कॉम . इन साइटों पर जाकर आप भी अपनी शादी के निमंत्रण कार्ड बनवा सकते हैं और इसे अक्सेस करने के लिये अपने सगे संबंधियों को इसका कोड भेज सकते हैं.इतना ही नही अगर शादी के बाद भी आप अपनी शादी को यादगार बनाकर रखना चाहते हैं तो शादी के फोटो डॉउनलोड कर इस वेडपेज को लंबे समय तक भी रख सकते हैं.&lt;br /&gt;अब आपके दूर के सगे संबधी इस बात की शिकायत तो नही कर सकेंगे कि आपका तो कार्ड ही नही मिला,इतना ही नहीं शादी की सूचना मिलने के बाद उनकी यह जिज्ञासा भी कि लडका या लडकी क्या कर रहे हैं? कैसे हैं? कब मिले? क्या फैमिली बैकग्राउंड हैं- शांत हो जायेगी. इन सब चीजों की जानकारी वेडपेज पर रहने से आप भी इन तरह के सवालों से बच जायेंगे.&lt;br /&gt;अब आप आसानी से अपने डी-डे की सूचना आने सगे संबंधियों या यारों-दोस्तों को एक नये तरीके से दे सकते हैं.तो देर किस बात कि हैं अगर शादी करने जा रहे हैं तो एक "वेडपेज" भी बना डालिये नये तरीके से आमंत्रण भी दे डालिये.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-7469582173441667491?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/7469582173441667491/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=7469582173441667491' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/7469582173441667491'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/7469582173441667491'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/02/blog-post_1583.html' title='अगर शादी करने जा रहे हैं तो बनाइये अपना &quot;वेडपेज&quot;'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-5362661642545513278</id><published>2008-02-16T02:06:00.000-08:00</published><updated>2008-02-16T02:37:50.266-08:00</updated><title type='text'>मुंबई हमारी....क्यूँ भाई चाचा, हाँ भतीजा.</title><content type='html'>मुंबई और महाराष्ट्र के और इलाकों  से उत्तर भारतीयों का पलायन होना जारी हैं.मुंबई से रेल से जुडे उत्तर भारत के प्रमुख शहर के स्टेशनों पर सैकडों की संख्या में भागकर वापस आए लोगों का यह कहना कि अपने यहाँ रूखा-सूखा ही क्यों ना मिले वही खाकर रह लेंगे, लेकिन वापस बंबई नहीं जायेंगे - यह अपने आप में एक दर्द को बयाँ करता हैं. यह दर्द हैं उनकी उस बेबसी का जिसमें उनकी राज्य की सरकारें अपने यहाँ दो वक्त की रोटी नहीं मुहैया करवा पा रही हैं और अगर दूसरे राज्य में जाकर अगर किसी तरह दो जून की रोटी मय्यसर होती हैं तो वहाँ के सियासतदाँ अपनी सियासत चमकाने के खातिर संविधान तक को बदलने की मांग करते हैं.&lt;br /&gt;जी हाँ, बात हो रही हैं महाराष्ट्र में पिछले एक पखवाडे से चल रही उठा पटक करने वालों की. बात हो रही हैं राजनीति में अपनी पारी शुरू करने वाले राज ठाकरे की, जो कि अपने चाचा शिव सेना सुप्रीमो बाल ठाकरे के राजनीतिक वारिस तो नही बन सके,लेकिन उनकी ही पुरानी नीति पर चलकर अपनी राजनीति को चमकाने का काम किया हैं.यही हैं राज की 'राजनीति'.&lt;br /&gt;साठ के दशक में जहाँ बाल ठाकरे ने दक्षिण भारतीयों को खदेड कर अपनी राजनीति चमकाने का काम किया था,वही काम आज उनके भतीजे राज उत्तर भारतीयों को खदेडकर कर रहे हैं और काफी हद तक इस काम में उन्हें सफलता भी मिली हैं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के इस युग में काफी कम समय में राज ठाकरे को लोगों ने जान लिया.उनके इस दाँव से शिव सेना को अपने हाथ से मराठी मानुष,मी मुंबईकर का मुद्दा निकलता हुआ नजर आ रहा हैं. इसलिये तो 'सामना' में तरह तरह के आलेखों के द्वारा अपने बिखरते वोट बैंक को बचाने की कवायद दिन-प्रतिदिन की जा रही हैं.&lt;br /&gt;महाराष्ट्र सरकार के द्वारा हिंसा के शुरूआती दिनों में अपने से कोई कदम नहीं उठाना भी उनकी इसी मानसिकता का परिचायक हैं.केंद्र सरकार के कहने पर ही कुछ कदम उठाये गये,लेकिन ये भी नाकाफी साबित हो रहे हैं.लोगों का पलायन जारी हैं,उनको एक नयी जिंदगी शुरू करने की मजबूरी एकाएक सामने आन पडी. जब अपने देश में ही इस तरह की स्थिति का सामना करना पडेगा तो फिर राष्ट्रीय एकता का क्या मतलब रह जायेगा.&lt;br /&gt;इस तरह की राजनीति कर देश का कोई भला नहीं  होने वाला हैं . क्षेत्रीयता,जातीयता,संप्रदायिकता और भाषावाद पर होने वाली राजनीति से किसी का भला नही होता हैं, भला होता हैं तो सिर्फ राजनेताओं का जो लोगों के मन में छिपी इस तरह की भावनाओं को उभारकर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने का काम करते हैं और पिसती हैं आम जनता . हाल की ही घटना की बात करे तो नासिक में मरने वाला पहला व्यक्ति महाराष्ट्रीयन ही था.क्या राज ठाकरे के पास इस बात का कुछ जवाब हैं,नहीं उन्हें तो अपनी राजनीति करने से मतलब हैं.&lt;br /&gt;ऐसा भारत में कब तक चलेगा? इसका तो फिलवक्त कोई जवाब नही हैं,लेकिन राजनीति करने वालों के लिये तो ऐसा चले तो वो ही अच्छा हैं.हमारा क्या हैं? यूँ ही पिसते रहेंगे. तब तक चाचा के सुरों पर भतीजे को अपनी तान छेडने दिया ज़ायें.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-5362661642545513278?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/5362661642545513278/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=5362661642545513278' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5362661642545513278'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5362661642545513278'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/02/blog-post_16.html' title='मुंबई हमारी....क्यूँ भाई चाचा, हाँ भतीजा.'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-4616545058729955526</id><published>2008-02-15T03:05:00.000-08:00</published><updated>2008-02-15T03:41:05.517-08:00</updated><title type='text'>"ओबामा" वर्सेस "ओसामा"</title><content type='html'>अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव होने में अभी काफी दिन बाकी हैं.डेमोक्रेट के उम्मीदवार के रूप में बराक ओबामा का चयन लगभग तय ही माना जा रहा हैं,ऐसी स्थिति में परिवर्त्तन चाह रहे अमेरिकी इस बार सत्ता में डेमोक्रेटिक़ उम्मीदवार को ही राष्ट्रपति बनायेंगे.अगर सब कुछ सही चलता रहा तो बराक ओबामा का अगला राष्ट्रपति बनना तय माना जा रहा हैं.तो ऐसी स्थिति में अमेरिका पहली महिला राष्ट्रपति के बजाए पहला अश्वेत राष्ट्रपति पा जायेगा.इतिहास तो बनना तय माना जा रहा हैं.&lt;br /&gt;नाम में क्या रखा हैं? ऐसा भले ही शेक्स्पीयर महोदय कह गये हो लेकिन अगर ऊपर वाली स्थिति बनती हैं तो फिर पूरे विश्व में आतंकवाद को बढावा देने वाले और आतंकवाद को समाप्त करने वाले दो प्रमुख शख्स के नामों में सिर्फ एक अक्षर का ही फर्क रह जायेगा और वो भी उल्टा. अक्षर हैं - 'ब' और 'स'. जिस शख्स के नाम में 'ब'हैं,वह उसे समाप्त करने की कोशिश करता नजर आयेगा,जबकि ठीक इसके उल्ट जिसके नाम में 'स' हैं वह तो इसे बढाने का काम कर ही रहा हैं. तब यह जंग और भी रोचक हो जायेगी.&lt;br /&gt;पूरे विश्व के लिये नासूर बनता जा रहा आतंकवाद अब सिर्फ एक देश कि लडाई ही नही बन कर रह गया हैं,इस दिशा में सभी देशों को एक साथ पहल करनी होगी.यह आने वाले दिनों में ओबामा वर्सेस ओसामा की लडाई बन कर नही रह जायें. अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को आतंकवाद से लडने के लिये दिये गये धन का उपयोग जिस तरह पाकिस्तान ने भारत से लडने के लिये किया वह सही नही हैं, आज वही पाकिस्तान बारूद के ढेर पर खडा हैं.&lt;br /&gt;विश्व के सभी देश किसी ना किसी रूप में इस नासूर से त्रस्त हैं इस लिये आने वाले समय में समेकित पहल की जरूरत हैं, भले ही इसे नाम देने के लिये "ओबामा" वर्सेस "ओसामा" का नाम दे दिया जायें.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-4616545058729955526?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/4616545058729955526/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=4616545058729955526' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/4616545058729955526'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/4616545058729955526'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/02/blog-post_8055.html' title='&quot;ओबामा&quot; वर्सेस &quot;ओसामा&quot;'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-9194544107565749042</id><published>2008-02-15T02:51:00.000-08:00</published><updated>2008-02-15T03:02:30.417-08:00</updated><title type='text'>प्रेमियों के लिये तो हैं ही वसंत</title><content type='html'>हर साल १४ फरवरी आती हैं और बीत जाती हैं. एक दशक पहले तो यह एक आम तारीख हुआ करती थी.आयी और गयी.लेकिन इस एक दशक में ही इतना कुछ बदल गया हैं कि सभी इस तारीख का इंतजार किया करते हैं.चाहे प्रेम करने वाले प्रेमी जोडे हो या इस पर पहरा देने वाले हमारे संस्कृति के ठेकेदार. जी हाँ, हम बात कर रहे हैं वेलेंटाइन डे की,जिसे खास तौर पर विदेश से प्रेम करने वाले दिन के रूप में आयातित किया गया हैं या यूँ कहे कि बाजारवाद ने इसे हम पर थोप दिया हैं.&lt;br /&gt;बात करते हैं प्यार का इजहार करने वाले इस दिन की. संयोग से यह तारीख उस समय पडती हैं जब पूरा वातावरण बसंत के आगोश मे पहले से ही खोया रहता हैं. बसंत तो यूँ ही प्यार का प्रतीक हैं, एक दिन क्यों, हम पूरे महीने प्यार के उत्सव को मना सकते हैं,लेकिन नही मनायेंगे तो इसी खास तारीख को ही.चलिये आज की तेज भागती हुयी जिंदगी में एक ही दिन सही.प्रेमी जोडे को जिस शिद्दत से इस दिन का इंतजार रहता हैं उसी तरह इस दिन का इंतजार उनके प्रेम में खलल डालने वालों को भी रहता हैं,क्योंकि मुफ्त में उन्हे मीडिया का एटेंशन मिल जाता हैं जो कि उनकी राजनीति को चमकाने के लिये काफी जरूरी होता हैं.जगह जगह प्रदर्शन किया, तोड फोड की हो गया उनका वेलेंटाइन विरोध.&lt;br /&gt;इन दोनों वर्गों से भी एक बडा एक वर्ग है जो कि इस दिन का रचयिता हैं यानि की बाजार. कार्डस,फूल,गिफ्ट और ना जाने क्या क्या सभी चीजों की बिक्री आने चरम पर रहती हैं. यह बाजार ही डिसाइड करता हैं कि कैसे अपने स्रोतों का उपयोग कर इस दिन को अपने लिये ज्यादा फायदेमंद बनाया जा सके. मीडिया भी इस चीज में बाजार का खूब साथ देती हैं. टी.वी. चैनलों और एफ.एम रेडियो स्टेशनों में तो सप्ताह बर पहले से ही इस दिन के लिये कार्यक्रमों की रूपरेखा खींच ली जाती हैं. वो स्वयं ऐसा नही करते बल्कि बाजार उनसे ऐसा करवाता हैं.&lt;br /&gt;इस बार तो प्रेम के इस उत्सव को सफल बनाने के लिय जगह जगह प्यार में खलल डालने वालों से बचाने के लिये पुलिस का पहरा लगाया गया था. इस बात की खुशी प्रेमी जोडे के चेहरों पर देखी जा सकती थी.लेकिन उनकी खुशी को भी घर के लोगो के द्वारा जब जासूस लगवाकर मॉनिटर किया जाता हैं तो बात वही पर घूम फिर कर आ जाती हैं क्यों ना हम कितने मॉड बने घूमते फिरते हैं,सोच तो अभी भी भारतीय ही हैं.यही अपनी संस्कृति हैं और अपनी संस्कृति में तो प्रेम के लिये एक दिन नहीं पूरा महीना हैं.महीना क्या, साल हैं बशर्तें कि आप सही से देखे तो.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-9194544107565749042?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/9194544107565749042/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=9194544107565749042' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/9194544107565749042'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/9194544107565749042'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/02/blog-post_15.html' title='प्रेमियों के लिये तो हैं ही वसंत'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-1392945889694025354</id><published>2008-02-15T02:16:00.000-08:00</published><updated>2008-02-15T02:17:48.135-08:00</updated><title type='text'>फिल्में भी परिवर्त्तन के वाहक बने तो अच्छा हैं..</title><content type='html'>सिनेमा समाज का आईना होती हैं.कभी कभी समाज को भी इससे काफी कुछ सीखने को मिलता हैं.आमिर खान की निर्देशक के रूप में पहली फिल्म 'तारे जमीन पर' ने जहाँ सफलता के नये प्रतिमान स्थापित किये वही इस फिल्म से समाज के कुछ क्षेत्रों में बदलाव भी आने शुरू हो गये हैं.फिल्म में डिस्लेक्सिया से पीडित बच्चे को रचनात्मक तरीके से समझाना और उसकी भीतर छिपी हुयी प्रतिभा को बाहर लाना दिखाया गया हैं.&lt;br /&gt;इस फिल्म का समाज पर पडने वाले असर की बात करें तो अभिभावक अब अपने बच्चों की पढाई के प्रति कम रूचि होने के कारणों को खोजने में ज्यादा लग गये हैं. अखबार में छपी एक खबर की बात करे तो अब डॉक्टरों के पास अभिभावक बच्चों को इस लिये लेकर आने लगे कही उनका बच्चा डिस्लेक्सिया बीमारी का शिकार तो नहीं. डॉक्टरों ने भी इस तरह के केसेज बढने के भी संकेत दिये हैं.&lt;br /&gt;केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानि सी.बी.एस.ई. ने भी इस बार से बोर्ड के परीक्षा में इस बीमारी से ग्रसित बच्चों को एक घंटा ज्यादा समय देने का फैसला किया हैं.इस तरह हम पाते हैं कि यह सीधा सीधा इस फिल्म का ही असर हैं नही तो  इससे पहले इसके विषय में सोचा भी नही गया था.&lt;br /&gt;फिल्मों के माध्यम से अगर इसी तरह भविष्य में समाज और देश के समस्याओं में किसी तरह का सुधार आता हैं तो निश्चय ही यह फिल्मों का एक अच्छा योगदान साबित होगा. मनोरंजन के साथ साथ लोगों के मन-मस्तिष्क को झकझोरने वाली फिल्में हमेशा के लिये एक मिसाल बन जाती हैं.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-1392945889694025354?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/1392945889694025354/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=1392945889694025354' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/1392945889694025354'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/1392945889694025354'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/02/blog-post.html' title='फिल्में भी परिवर्त्तन के वाहक बने तो अच्छा हैं..'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-8340526107075651317</id><published>2008-01-29T02:52:00.000-08:00</published><updated>2008-01-29T02:55:14.180-08:00</updated><title type='text'>मासूमों की जिंदगी</title><content type='html'>मुंबई में स्कूल बस में एल.पी.जी. सिलेंडर के फटने के कारण चार स्कूली बच्चों को अपने जान से हाथ धोना पडा.मेरठ में मिड-डे मील बनाते वक्त एक शिक्षा मित्र के साथ चार बच्चें आग से झुलसे.पाकिस्तान में आतंकियों के द्वारा दो सौ स्कूली बच्चों को अपनी बात मनवाने के लिये बंधक बनाना फिर छोडना .इन सभी खबरों में स्कूली बच्चे ही शिकार बने हैं.स्कूली बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की बनती है,लेकिन इन सब मामलों में देखा गया हैं कि कहीं ना कहीं लापरवाही बरती गयी ,जिसकी कीमत या तो बच्चों को जान देकर चुकानी पडी या ये घटनायें मासूमों के मन-मस्तिष्क में जिंदगी भर का घाव दे गयी.&lt;br /&gt;बच्चों को स्कूल ले जाने के लिये जिन वाहनों का प्रयोग किया जाता हैं वे स्कूलों के निजी वाहन होते है या ठेके पर स्कूल द्वारा लिये जाते हैं. स्कूलों का अपना वाहन होने के कारण दुर्घटना की कम संभावना रहती हैं.फिर भी इन वाहनों की समय समय पर जाँच होती रहनी चाहिये.घर से निकलने के बाद जितनी देर बच्चा स्कूल के लिये बाहर रहे तब तक स्कूल की जिम्मेदारी होती है,लेकिन आजकल स्कूल में ही बच्चों के द्वारा अपने सहपाठियों को गोली मारने की घटनायें अपने देश में भी घट रही हैं.यह एक चिंता जनक विषय हैं.स्कूल प्रबंधन भी ऐसी घटनाओं के समय मामले की लीपापोती में जुट जाता हैं.&lt;br /&gt;सरकारी योजनायें भी बच्चों के स्कूली जीवन में नयी नयी तरह की समस्या लाने का काम कर रही हैं. मिड-डे मील योजना के तहत मेरठ में हुयी दुर्घटना से बच्चों के झुलसने की घटना भी कम ह्रृदयविदारक नहीं हैं.बच्चे स्कूल पढने के लिये जाते हैं ना कि भोजन बनाने के लिये. इससे पहले भी इसी मिड-डे मील को किसी निम्न जाति की महिला द्वारा बनाये जाने पर बच्चों द्वारा खाने से इंकार करने पर कहीं ना कहीं इन बच्चों में जाति का जहर घोला जा रहा हैं.&lt;br /&gt;पाकिस्तान में पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत की एक इलाके में पूरे स्कूली बच्चों को बंधक बनाकर छोडने की घटना भी इस ओर इशारा करती हैं कि स्कूली बच्चों को आसानी से निशाना बनाया जा सकता हैं.वैसे भी बच्चों की अपहरण की घटना को ज्यादातर स्कूल से आते या जाते वक्त ही अंजाम दिया जाता हैं.ऐसे में स्कूल प्रबंधन ज्यादातर अपना पल्ला झाडने का ही काम करती हैं,जबकि ऐसा नही होना चाहिये.महानगरों में वैसे भी माता-पिता दोनों काम पर जाते हैं जिस कारण भी बच्चों को ज्यादा एटेंशन नहीं दे पाते हैं,जिस कारण भी तरह तरह की घटनाएँ घटती रहती हैं.&lt;br /&gt;स्कूल जाने की उम्र में ही बच्चों को उपरोक्त किसी घटना से दो-चार होना पडे,तो यह उनके मानसिक विकास के लिये ठीक नही हैं.इसलिये हमें चाहिये कि आज के बच्चों को ज्यादा से ज्यादा सुरक्षा मुहैया करवाया जायें,स्कूल प्रबंधन भी समय समय पर ऐसे कदम उठायें जिससे कि बच्चों की सुरक्षा में कहीं चूक ना हो ताकि वे भी हँसते खेलते हुये अपने स्कूली जीवन को जीयें.साथ ही ऐसे सामाजिक और नैतिक मूल्यों का भी पाठ पढायें कि आगे चलकर वे भी एक आदर्श नागरिक बन सके.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-8340526107075651317?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/8340526107075651317/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=8340526107075651317' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8340526107075651317'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8340526107075651317'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/01/blog-post_29.html' title='मासूमों की जिंदगी'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-5002567187118271367</id><published>2008-01-26T06:40:00.000-08:00</published><updated>2008-01-26T06:41:05.868-08:00</updated><title type='text'>शेर ही टिकते हैं शेयर बाजार में</title><content type='html'>नये साल में मुंबई शेयर बाजार के सूचकांक ने जिस तरह से २१ हजार की ऊँचाई को छुआ,उसी तरह इस सोमवार और मंगलवार को भारी गिरावट दिखा छोटे निवेशकों का दो दिनों में दस लाख करोड का नुकसान करा दिया. वैसे भी यह बात समझ नही आती हैं कि छोटा निवेशक जब इस लालच में बाजार में पैसा लगाने जाता हैं कि उसका पैसा चंद दिनों में दुगुना हो जायेगा.तो उसे इस बात की समझ नही रहती हैं कि यह आधा भी हो सकता हैं.शेयर बाजार कोई जादुई जगह नही हैं जहाँ पैसा रातों रात जेनेरेट होता हैं और सुबह जब बाजार खुलता है तो ये निवेशक उसे लेकर चलते बनेपैसा तो उतना ही रहता हैं, यह सिर्फ एक हाथ से दूसरे हाथ में चला जाता हैं.इसमें पहला वाला हाथ भी आपका हो सकता है और दूसरा वाला भी.&lt;br /&gt;आजकल हर कोई नया व्यक्ति लाल-पीले अखबार और बिजनेस चैनलों को देखकर कुछ दिन में ही अपने को शेयर बाजार का एक्सपर्ट समझने लगता हैं.साथ ही साथ लोगों के मुँह से यह सुनकर कि फलाँ का पैसा दो दिन में दुगुना हो गया यह सुनकर बाज़ार में पैसा लगाने चला आता हैं.शेयर बाजार नें शुरूआती दिन में जहाँ गिरा वहीं सप्ताह कें अंत में ह्ज़ार अंक ऊपर भी तो गया.यहाँ बाज़ार गिरता देख काफी छोटे निवेशक तो अपना पैसा निकाल चुके होंगे.बस यही पर वे मात खा जाते हैं.बाजार गिरता देख बडे बडे खिलाडी पैसा लगाकर पैसा बनाने का काम करते हैं.यही छोटे और नये निवेशक धीरज नही रख पाते है और हडबडी में  निवेश किये पैसे को गँवा बैठते हैं.&lt;br /&gt;भारतीय अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल्स सही होने की दुहाई प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री देते रहे,लेकिन लोगों को सिर्फ अपने पैसे दुगुने होने से मतलब रहता हैं. निवेशक वह है जो पैसा लगाये और भूल जाये.कम से कम एक तिमाही का समय तो दे,यहाँ तो पैसा लगाया और नियम से प्रतिदिन उस शेयर का दाम देखने चला जाता है.जो कि सही नही हैं.इन्हें स्पेकटेटर कहा जाता हैं जो कि देखे और लपक पडे.नुकसान भी इन्हें ही उठाना पडता हैं.अतः इस बाजार में बडे से बडे खिलाडी भी धोखा खा जाते हैं.नये निवेशकों की बिसात ही क्या हैं? इसलिये इस बाजार से दूर ही रहना ज्यादा सही हैं.जो इस क्षेत्र में माहिर हैं वही इसे ब्लीड होता हुआ देख सकते हैं और साथ ही इस घाव को भरता भी देखते हैं.यहाँ तो शेर ही खून बहाता है और उसका मजा भी उठाता हैं.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-5002567187118271367?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/5002567187118271367/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=5002567187118271367' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5002567187118271367'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5002567187118271367'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/01/blog-post_26.html' title='शेर ही टिकते हैं शेयर बाजार में'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-925960817722001223</id><published>2008-01-25T02:37:00.000-08:00</published><updated>2008-01-25T02:38:52.711-08:00</updated><title type='text'>आई.पी.एल.के लिये भी तो खिलाडी चाहिये</title><content type='html'>वर्त्तमान ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिये वन-डे टीम का चयन किया गया तो उसमें दो वरिष्ठ खिलाडी को नहीं चुना गया.राहुल द्रविड और सौरव गांगुली की जगह नये खिलाडियों को मौका दिया गया.गांगुली को खराब फील्डिंग के कारण निकाला जा रहा हैं जब कि राहुल द्रविड जब टेस्ट में ही इतनी गेंद ले रहे हैं रन बनाने के लिये तो फिर वन-डे में क्या वे खाक रन बना पायेंगे.इसी बाच तरह तरह कि अफवाह चली कि धोनीअपनी टीम में युवा खिलाडी चाहते थे. वेंकटेश प्रसाद के कहने पर ऐसा हुआ. टीम में सीनियर और जूनियर खिलाडियों के दो धडे बन गये हैं.तरह तरह के कयास लगाये जा रहे हैं.जब कि ऐसा कुछ नही हैं.&lt;br /&gt;बी.सी.सी.आई. की मह्त्त्वाकांक्षी योजना 'इंडियन प्रीमीयर लीग' की शुरूआत अप्रैल महिने से होनी है,इसके लिये भी तो खिलाडी चाहिये.तो क्यों ना कुछ ऐसा किया जाये कि ये खिलाडी पूरी तरह से इस धनकुबेर प्रतिस्पर्धा में तन और मन से लग जाये,धन तो इनपर बरसेगा ही साथ ही साथ बी.सी.सी आई. के भी वारे-न्यारे हो जायेंगे.यह एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया जा रहा हैं.&lt;br /&gt;दादा और द्रविड को वन-डे से आराम देकर ट्वेंटी-२० में अपने जौहर दिखाने का मौका दे रही हैं बी.सी.सी.आई. यहाँ आराम का मतलब संन्यास ले लेने से हैं.इसलिये अगले दिन ही अखबारों में यह खबर दिखायी दी कि इन खिलाडियों को ऑइकॉन खिलाडी के रूप में देखा जायेगा.अब तो कुछ दिनों बाद इन खिलाडियों की बोली लगने वली हैं.अब खिलाडी भी बिकेंगे. बोर्ड का सिर्फ एक ही मकसद हैं किसी तरह अपनी तिजोरी भरना.टीमें तो बिक ही चुकी हैं,अब खिलाडी बिकेंगे.&lt;br /&gt;आई.सी.एल. और आई.पी.एल. सरीखी प्रतियोगिताओं के शुरू होने के बाद जो अंतर्राष्ट्रीय खिलाडी संन्यास ले लेता है,उसके तत्काल खेलने और अधिक से अधिक पैसा बनाने की चाह तो पूरी हो जाती हैं लेकिन जो खिलाडी अपने देश की तरफ से कुछ दिन और खेलना चाहता है,उसे अपने कैरियर के ढलान पर वैसा ही प्रदर्शन करना पडेगा जैसा कि वो अपने सुनहरे दौर में किया करता था.सब बढती प्रतिस्पर्धा का नतीजा हैं.&lt;br /&gt;ऐसी स्थिति में क्रिकेट में काफी दिनों से चले आ रहे कहावत का भी कोई मायने नहीं रह जायेंगे- फॉर्म इस टेम्पररी,क्लास इज पर्मानेंट. खराब फॉर्म तो क्लास दिखाने इन लीगों में शामिल हो पैसा बनाइये ना कि सेलेक्टरों के लिये सिरदर्द बनिये.देश के लिये तो आपने खेला ही अब कुछ दिनों के लिये इन धनकुबेरों के लिये खेलिये.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-925960817722001223?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/925960817722001223/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=925960817722001223' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/925960817722001223'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/925960817722001223'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/01/blog-post_25.html' title='आई.पी.एल.के लिये भी तो खिलाडी चाहिये'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-9131688774508324864</id><published>2008-01-24T03:56:00.001-08:00</published><updated>2008-01-24T03:56:34.607-08:00</updated><title type='text'>गोविन्दा का थप्पड</title><content type='html'>अशोक चक्रधरजी ने गोविंदा के थप्पड पर एक कुंडली लिखी और जिस दिन लिखी उसी दिन दो कार्यक्रमों में उसे सुनाया. कुंडली मतलब जन्मकुंडली नहीं बल्कि जिस शब्द से कविता शुरू की जाती है,उसी शब्द पर आकर खत्म हो जाती हैं. इस छोटी कविता का अपना भाव हैं. यह कुछ इस प्रकार से थी - &lt;br /&gt;कुर्सी दर्शक से हिली, थप्पड़ मारा एक,टीवी ने तकनीक से, थप्पड़ किए अनेक।थप्पड़ किए अनेक, तैश में थे गोविन्दा,राजनीति में खेल चल पड़ा निन्दा-निन्दा।चक्र सुदर्शन, अगर रोकनी मातमपुर्सी,क्षमा मांग ले, वरना हिल जाएगी कुर्सी।&lt;br /&gt;इस कविता के माध्यम से मीडीया पर भी निशाना साधा. खैर बात गोविन्दा की हो रही है, आखिर क्यों एक आम जनता को थप्पड मारा गोविन्दा ने? यह वही आम जनता हैं जिसके सामने चुनाव के वक्त हाथ जोडकर वोट देने की बात करते हैं. यह वही जनता हैं जो उनकी फिल्मों को सफल करवाती हैं तो यह कहते हुये नही अघाते है कि मुझे दर्शकों का ढेर सारा प्यार मिला. थप्पड मारने के दो दिन बाद जब थप्पड खाने वाला मीडिया के सामने आया तो गोविन्दा ने भी अपने बयान को सही साबित करने के लिये दो जूनियर आर्टिस्ट को समने खडा कर दिया.इससे तो एक बात स्पष्ट होती है कि अपनी गलती पर पर्दा करने के लिये पर्दे से ढँकी दो लड्कियों की मदद लेनी पडी.मीडिया द्वारा यह पूछने पर कि आप उनसे माफी माँगेगे तो जवाब था मैं एक थप्पड और मारता हूँ. जब बात इस हद तक बढ चुकी है तो गोविन्दा कैसे माफी माँग ले.&lt;br /&gt;एक बार फिर से कमबैक करने वाले गोविन्दा का अगर यही हाल रहा तो फिल्मों में तो किसी तरह पारी सँभल जायेगी लेकिन राजनीति में ऐसा नही होता हैं.जब यही आम जनता वोट रूपी ताकत का एह्सास करवाएगी तब जाकर पता चलेगा अगर माफी माँग लेते तो ज्यादा अच्छा होता.वैसे भी उनके लोकसभा क्षेत्र में ऐसे होर्डिंग लगे है कि हमारे क्षेत के सांसद गोविन्दा आहूजा लापता हैं उनका पता बताने वाले को इनाम दिया जायेगा. संसद में भी उनकी उपस्थिति काफी कम हैं ऐसी स्थिति में क्या वो अपने फिल्मी कैरियर और राजनीतिक कैरियर से न्याय कर पा रहे हैं? नहीं. दर्शक अभी भी गोविन्दा को एक एक्टर के रूप में ही जानता हैं,अगर वहाँ भी अपनी इमेज में बट्टा लग्वाते रहे तो किसी भी कुर्सी के लायक वो नही रह जायेंगे.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-9131688774508324864?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/9131688774508324864/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=9131688774508324864' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/9131688774508324864'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/9131688774508324864'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/01/blog-post_24.html' title='गोविन्दा का थप्पड'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-5818149780556799587</id><published>2008-01-23T03:10:00.000-08:00</published><updated>2008-01-23T03:45:02.801-08:00</updated><title type='text'>टी.आर.पी. काल में रामायण</title><content type='html'>एनडीटीवी इमैजिन चैनल के लांच के साथ ही एक बार फिर से भारतीय दर्शकों को फिर से "रामायण" सीरियल देखने का मौका मिला. एक नये कलेवर और नये स्टारकास्ट के साथ रामायण का पहला एपिसोड देखने के वक्त आज से बीस साल पहले रामानंद सागर द्वारा बनाये गये रामायण की याद आना स्वाभाविक है और साथ ही तुलना करना भी. उस वक्त सिर्फ दूरदर्शन चैनल था और रविवार की सुबह सभी काम को छोड सपरिवार रामायण सीरियल देखने का एक अलग ही आनंद था.&lt;br /&gt;पिछले एक महीने में जेनेरल इंटरटेनमेंट चैनल कैटेगरी में जी समूह का 'जी नेक्स्ट',आई.एन.एक्स ग्रुप का 'नाइन एक्स' और अब  एनडीटीवी का 'इमैजिन' चैनल लांच हुआ हैं, इन तीनों चैनलों में मुख्य रूप से वही प्रोग्राम आयेंगे, जो कि आज कल दर्शकों की पसंद के माने जाते हैं जैसे फैमिली ड्रामा, रियलिटी शो आदि. लेकिन यही इमैजिन चैनल के सीईओ समीर नायर ने एक बार फिर से भारतीय दर्शकों के सामने एक बार फिर से पौराणिक कथा को पेश कर अपनी दूरदर्शिता का परिचय दिया हैं.यह एक कार्यक्रम ही इन तीन चैनलों में इमैजिन को अलग पहचान दिलवा रहा हैं.&lt;br /&gt;आजतक भारतीय चैनल पर अगर सबसे ज्यादा टी.आर.पी. अगर किसी सीरियल ने बटोरी है तो वह रामायण सीरियल ही है.इसी बात का ध्यान रखते हुये एकबार फिर से रामायण सीरियल को पर्दे पर लाने की जिम्मेदारी सागर आर्टस को ही मिली.अभी भी सागर आर्टस सब से ज्यादा देखे जाने वाले चैनल दूरदर्शन के लिये ही कार्यक्रम बनाने के लिये इच्छुक था,लेकिन समीर नायर के रामायण बनाने के प्रस्ताव को टाल नही सका और जिसकी परिणिति महानगरों के दर्शकों के लिये एक नये रामायण के साथ आयी. इस बार की रामायण में पिछले बार के रामायण से कुछ खास अंतर तो देखने को नही मिलेगा, लेकिनइस बार की रामायण में पिछले बार के रामायण की कहानी से कुछ खास अंतर तो देखने को नही मिलेगा, लेकिन नयी तकनीक के उपयोग से इसे और भी भव्य बनाया गया हैं.&lt;br /&gt;पिछले रामायण की एक दो चीजें खोजने का प्रयास हमने किया  तो वो नही मिली.एक तो कलाकारों के असली नाम जो कि बचपन में हम बच्चें याद करना या यूँ कहे कि एपिसोड के अंत में आने वाले कलाकारों का नाम बताने की होड लगी रहती थी और दूसरा स्वाभिकता. कलाकारों के अभिनय में आनंद सागर ने रामानंद सागर वाला काम नही निकलवाया.वैसे इस बार राम का किरदार गुरमीत चौधरी और सीता का किरदार देबिना बनर्जी ने निभाया है.&lt;br /&gt;आज के दिन फिल्म जगत में जहाँ रीमेक बनाने की होड चल रही हैं वही टीवी में भी अपने जमाने के सबसे लोकप्रिय धारावाहिक को फिर से प्रस्तुत करना अनोखी पहल हैं.ऐसा नही है कि धार्मिक सीरियलों का जमाना लद गया हैं, अभी भी अगर सही तरीके से बनाया जाये तो इसे देखने वालों की संख्या बधेगी ही. सिर्फ स्पेशल एफेक्टस के जरिये सफलता की कामना करना बेवकूफी हैं.&lt;br /&gt;भारतीय संस्कृति की यह कहानी जीवन में ऊँचे नैतिक मूल्यों और आदर्शों को स्थापित करने की सीख देती है, क्या यह आज परिवार को तोडने वाले सीरियलों पर  भारी पडेगा? यह आने वाले समय में टी.आर.पी से ही पता चल पाएगा.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-5818149780556799587?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/5818149780556799587/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=5818149780556799587' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5818149780556799587'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5818149780556799587'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/01/blog-post_23.html' title='टी.आर.पी. काल में रामायण'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-3567008243604769293</id><published>2008-01-11T04:04:00.000-08:00</published><updated>2008-01-11T04:05:30.475-08:00</updated><title type='text'>टाटा का 'कार'नामा</title><content type='html'>बात सन १९८७ की है,जब मैं अपनी नानी के यहाँ जा रहा था.चाचा ने मारूति की ओमनी गाडी नयी नयी ली थी.उसी से सपरिवार हम जा रहे थे.बातों ही बातों में मैंने गाडी की कीमत का अनुमान दस हजार रूपये लगाया,तो यह उत्तर आया कि अगर यह इतनी सस्ती होती तो सडक पर चलने की जगह नहीं होती.उस समय गाडी की कीमत एक लाख रूपये थी.जो कि मेरे कल्पना से बाहर थी.&lt;br /&gt;आज फिर हम उसी बीस साल पहले वाली स्थिति में हैं,एक लाख की गाडी फिर से सडक पर आने वाली हैं,लेकिन एक लाख रूपया आज दूसरे अंदाज में चौंकाता हैं.रतन टाटा ने एक परिवार को स्कूटर पर जाता देखकर इस कार की कल्पना की और चार साल बाद  अपने वादे को निभाते हुये एक लाख की कीमत में ही कार की लाँचिंग की.३३ हॉर्सपावर और ६२४ सीसी इंजन वाली यह "नैनो" कार भारत की अब तक सबसे सस्ती कार मारूति ८०० के मुकाबले भीतर से २१ फीसदी बडी होगी वही बाहर से ८ फीसदी छोटी होगी. एक लीटर में बीस किलोमीटर का दावा करने वाली यह गाडी फुल फ्रंटल टेस्ट से भी गुजर चुकी हैं,जो कि अभी भारत की सडक पर चलने वाली कई गाडी इस टेस्ट से नही गुजरी हैं.&lt;br /&gt;कार से प्रदूषण कम हो इसका भी ध्यान रखा गया हैं.यह गाडी भारत-थ्री और यूरो-फॉर मानकों पर खडी उतरती हैं,इसका मतलब भविष्य को ध्यान में रख कर बनाया गया हैं क्योंकि भारत में अभी तक यूरो-फॉर मानक की गाडियाँ अभी तक बाजार में नही आयी हैं.इसी पर लाँच करते वक्त रतन टाटा ने पचौरी साहब और सुनीता नारायण के चैन से सोने की बात की. लेकिन एक साल में ढाई लाख यूनिट सडकों पर उतारने का लक्ष्य प्रदूषण के साथ साथ सडक पर वाहनों को रेंगने वाली स्थिति में ला देगा.&lt;br /&gt;भारत की राजधानी दिल्ली में इस वक्त जहाँ प्रगति मैदान में नैनो गाडी की लाँचिंग हुयी वही उसके बाहर सडकों पर दो-दो घंटे का जाम लोगों को झेलना पड रहा हैं. सात करोड दुपहिया वाहनों और एक करोड निजी कार वाले देश में अभी ही सडकों पर जाम की स्थिति आम हैं.इसका एकमात्र कारण सरकार द्वारा सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर ध्यान नही दिया जाना हैं.ऐसी स्थिति में लोग निजी वाहन की व्यवस्था ना करे तो और क्या करे.अब नैनो के सितंबर माह से आने के बाद दिल्ली में तो स्थिति बिगडने वाली ही हैं.अभी भी दिल्ली में अकेले अन्य तीन महानगरों से भी ज्यादा वाहन हैं.&lt;br /&gt;नैनो की लाँचिंग भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिये एक मील का पत्थर साबित होगी.१९८० के शुरूआती दशक में जहाँ भारत में कार उत्पादन की संभावनायें तलाशी जा रही थी वहीं आज जैगुआर और लैंडरोवर जैसी गाडी भारतीय कंपनी के ब्रांड के रूप में निकलेगी.भारतीय उद्यमिता की यह नायाब मिसाल है कि आज हम विश्व को सबसे सस्ती गाडी देने में सफल हुये हैं.चीन से उत्पादित होने वाली सबसे सस्ती गाडी से आधे मूल्य पर यह गाडी अब लोगों को मिल सकेगी.&lt;br /&gt;तीस हजार करोड रूपये वाली कंपनी टाटा मोटर्स ने भले ही इस गाडी की मनक कीमत अभी एक लाख रूपये रखे हैं,लेकिन कितने दिनों तक इस कीमत पर कायम रहेगी,इस पर बोलने को कोई तैयार नही हैं, साथ ही इस गाडी पर कंपनी को कितना मुनाफा होगा,यह भी तय नहीं हैं.लेकिन मध्यम वर्ग को इन सबसे क्या लेना देना,अब तो कुछ ही दिनों में उनका भी कार रखने का सपना पूरा होने वाला हैं,क्यों न पेट्रोल और डीजल की बढती कीमतों के बीच यह उनके घर के आगे एक नुमाइश की वस्तु ही बनकर खडी हो.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-3567008243604769293?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/3567008243604769293/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=3567008243604769293' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/3567008243604769293'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/3567008243604769293'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/01/blog-post_11.html' title='टाटा का &apos;कार&apos;नामा'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-626199714653264330</id><published>2008-01-10T02:41:00.000-08:00</published><updated>2008-01-10T03:25:13.960-08:00</updated><title type='text'>माइंड गेम से हारी टीम इंडिया</title><content type='html'>"इंडिया विन सिडनी टेस्ट" शीर्षक वाली खबर द टाइम्स ऑफ इंडिया में देखकर अचंभा हुआ.एक बार तो सहसा विश्वास ही नही हुआ,ये आखिर हुआ कैसे? क्या यह मैच भारत को दे दिया गया या इस शीर्षक के कोई और मायने हैं.हरभजन सिंह पर तीन टेस्ट मैचों की पाबंदी के बाद भारतीय मीडिया ने तो इसे भारत की प्रतिष्ठा का विषय ही बना दिया. देश के सर्वश्रेष्ठ कहे जाने वाले चैनलों के लिये अपने प्राइम टाइम का पूरा समय भी दिया जाना कम लग रहा था.अगर अखबार और टेलीविजन चैनलों की बात करे तो दोनों माध्यमों ने  अंपायर स्टीव बकनर को लताडने में कोई कोर कसर नहीं छोडी.इतना सब होने के बाद भी हम कहे कि हमने सिडनी टेस्ट जीता हैं तो यह सरासर गलत होगा.&lt;br /&gt;टेस्ट मैच के दौरान पहली पारी में भारतीय टीम द्वारा बढत लेना जब ऑस्ट्रेलियाई टीम को नागावार गुजरने लगा तब उसी समय दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम नें 'माइंड गेम' खेलना शुरू किया और एक वक्त ड्रॉ के तरफ जा रहे मैच को अपने पक्ष में करने में कामयाब रही.इस बार इस माइंड गेम का शिकार बनाया हरभजन सिंह को और वो इसमें फँस भी गये.हरभजन सिंह ने दूसरी छोड पर बैटिंग कर रहे सचिन से कोई सीख लेने की कोशिश नही की.सचिन को भी कितनी बार स्लेजिंग का सामना करना पडा हैं,लेकिन उसका जवाब हमेशा अपने बल्ले से दिया हैं न कि पलट कर जवाब देकर.हरभजन के बॉडी लैंग्वेज से यही लगता हैं कि साइमंडस की बात का वह जवाब नही देते तो वर्बल मैच तो वे वही हार जाते.पलट कर जवाब देने की कोई जरूरत नहीं थी. ऑस्ट्रेलियाई अपने चाल में कामयाब हो गये.&lt;br /&gt;अगला टेस्ट पर्थ में खेला जाना हैं और उस मैच में भारत को यह साबित करना ही होगा कि सिडनी में अगर अंपायरिंग डिशीजन गलत नहीं होते तो मैच का नतीजा कुछ और ही होता.पर्थ की उछाल भरी पिच पर भारतीय बल्लेबाजों की अग्नि-परीक्षा होने वाली हैं.जीत से नीचे कुछ भी परिणाम भारतीयों के लिये अपने को साबित करने के लिये नाकाफी होगा.क्योंकि जीतने वाली ही टीम नियम तय करती है.सिडनी में भारत की हार के लिये सिर्फ बकनर और बेंसन को ही जिम्मेदार ठहराना ठीक नही होगा. दूसरी पारी में भारतीय बल्लेबाजों के लिये 'तू चल मैं आया' वाली स्थिति हो गयी थी. मैच को आसानी से ड्रॉ कराया जा सकता था,लेकिन अब २-० की बढत के साथ ऑस्ट्रेलिया को मनोवैज्ञानिक बढत मिल गयी हुई हैं,इसलिए भारतीय टीम की राह अब भी आसान नही हैं.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-626199714653264330?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/626199714653264330/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=626199714653264330' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/626199714653264330'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/626199714653264330'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/01/blog-post_10.html' title='माइंड गेम से हारी टीम इंडिया'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-8602823160771801703</id><published>2008-01-04T03:28:00.000-08:00</published><updated>2008-01-04T03:29:03.697-08:00</updated><title type='text'>सबसे पहले हँसा कौन?</title><content type='html'>स्टार वन के सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज पार्ट-तीन'के दौरान कुलदीप दुबे नाम के प्रतिभागी ने इतिहास के किताब में 'लाफ्टर आंदोलन'की बात कही थी,उसी दौरान एक मैडम ने अपने क्लास में छात्रों से पूछा कि हँसी का आविष्कार किसने किया? तो छात्र ने जवाब दिया आविष्कार का तो पता नही लेकिन इसका सबसे ज्यादा उपयोग नवजोत सिंह सिद्धू ने किया .इस बात पर हँसी तो आयी,लेकिन हँसी आयी कहाँ से? सबसे पहले किसने इसका उपयोग किया था? यह प्रश्न मेरे दिमाग में घूमता रहा.&lt;br /&gt;अंततः इस बात का पता चल ही गया कि हँसी का आविष्कार हम मानवों ने नही बल्कि हमारे पूर्वजों यानि लंगूरों की एक प्रजाति ऑरंगउटन ने की. इसका पता अंतर्राष्ट्रीय शोधार्थियों ने चार विभिन्न जगह पर पच्चीस ऑरंगउटन पर किये गये शोध के पश्चात यह निष्कर्ष निकाला.पोर्टसमाउथ यूनिवर्सिटी की शोधार्थी डॉ. मरियाना डेविला रॉस के अनुसार मानव में फेसियल मिमिक्री करने की क्षमता से पहले यह लंगूरों में आ चुकी थी.&lt;br /&gt;शोध में यह भी पाया गया कि अपने साथी कि नकल करने में यह ऑरंगउटन आधे सेकेंड का वक़्त लेते हैं.जो कि हमारे द्वारा लिये गये समय से भी कम है,तो सोच सकते है कि हँसने के मामले मे भी हम फिसड्डी ही हैं.अगर सिद्धु साहब कि बात कि जाये तो वे भी एक सेकेंड का तो वक्त ले ही लेते हैं.&lt;br /&gt;ये तो रही हँसी की बात.लेकिन आपने कभी सोचा हैं कि हमारे जिंदगी में हँसी नही रहे तो क्या होगा,दवाब के कारण हम अपना कोई भी ठीक तरीके से करने में सक्षम नहीं हो सकेंगे,इसलिये तो हिन्दी के मनोरंजन चैनलों के बाद समाचार चैनलों ने भी हँसी के कार्यक्रमों के लिये स्पेशल  बुलेटिन ही बना दिये हैं.वो अलग बात हैं कि समाचार चैनलों पर मनोरंजन चैनलों पर दिखाये जाने वाले ही कार्यक्रमों के फुटेज के बीच एंकर की उपस्थिति दर्ज कराकर इसे अपना बुलेटिन बना लिया जाता हैं.हँसी का ओवरडोज होने के कारण अब यह भी प्रयोग भी अब बोरिंग लगने लगा हैं.कुछ नयापन हो तो कोई बात भी,लेकिन समाचार चैनलों ने तो कुछ नया ना करने की कसम खा रखी हैं.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-8602823160771801703?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/8602823160771801703/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=8602823160771801703' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8602823160771801703'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8602823160771801703'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/01/blog-post_04.html' title='सबसे पहले हँसा कौन?'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-6354911939593946234</id><published>2008-01-01T04:00:00.000-08:00</published><updated>2008-01-01T04:01:54.539-08:00</updated><title type='text'>भारत को सिडनी में डालना होगा जीत का सीड</title><content type='html'>नये वर्ष के आगमन पर सिडनी का आकाश रंग-बिरंगी आतिशबाजियों से इस कदर नहा गया कि देखने वालों के लिये यह मनोरम नजारा उनकी स्मृति में समा गया होगा.टेलीविजन के माध्यम से देश-विदेश के करोडों लोगों ने यह नजारा देखा होगा.इस नजारे को देखने के लिये भारतीय क्रिकेट टीम सिडनी में ही मौजूद थी,जो कि साल के दूसरे दिन पिछले साल की मेलबर्न टेस्ट की हार को भुलाते हुये नये साल में ऑस्ट्रेलिया के लिये सामने नयी चुनौती रखेगा.&lt;br /&gt;भारतीय टीम के प्रदर्शन को देखते हुये ऐसा लगता हैं कि २००३ के दौरे से पहले एक क्रिकेट अधिकारी ने जो परिणामों के लिये भविष्यवाणी की थी ,वह इस बार सही साबित होगी. भारतीय टीम को एक बार फिर से इतने अहम दौरे से पहले अभ्यास मैचों के नाम पर एक वर्षा बाधित मैच खेलना पडा जो की काफी नही था.मेलबर्न टेस्ट के पहले दिन जब भारतीय टीम ने नौ विकेट चटकाये थे तब तो ऐसा लग रहा था कि यह मुकाबला पाँचवे दिन तक जायेगा.लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने दोनों पारियों में महज दो सौ रन का भी ऑकडा नही छुआ और मैच का नतीजा चौथे दिन ही आ गया.गेंदबाजों ने अपना कमाल तो दिखाया लेकिन बल्लेबाज फिसड्डी साबित हुये.सिर्फ एक अर्ध-शतक देखने को मिला वह भी तेंदुलकर के बल्ले से.&lt;br /&gt;सिडनी के मैच से पहले भारतीय टीम के सामने ओपनिंग बल्लेबाज की समस्या को सुलझाना हैं.सेहवाग को मौका दिये जाने की स्थिति में गाज युवराज पर ही गिरेगी.एक विशेषज्ञ सलामी बल्लेबाज से आगाज करने के बजाय दो सलामी बल्लेबाज से ओपनिंग कराना ज्यादा ठीक होगा.रक्षात्मक बल्लेबाजी करके तो राहुल द्रविड ने तो पहले ही टीम को बैकफुट पर धकेल दिया था.सेहवाग के बल्ले से अगर सिडनी में रनों की बरसात हो जाती हैं तो ऐसी स्थिति में मध्यक्रम भी काफी अच्छा करके दिखा सकता हैं.&lt;br /&gt;गेंदबाजी में अच्छा करने वाले जहीर के चोटिल होने के कारण  तेज अनुभवी गेंदबाज की कमी खलेगी. मेलबर्न टेस्ट में दो स्पिनरों के साथ खेलना एक तरह से सही ही निर्णय रहा .इस तरह दोनों गेंदबाज को अनुभव तो मिला.कुंबले व हरभजन की जोडी आने वाले मैचों में भारत के लिये मैच जीताने वाली भी जोडी भी बन सकती हैं.जहाँ तक तेज गेंदबाजी का सवाल हैं,इरफान और आर.पी. पर फॉर्म में चल रहे मैथ्यू हेडेन और फिल जैक्स का विकेट जल्द से जल्द निकल कर देने की चुनौती होगी. वही हरभजन के लिये रिकी का विकेट एक बार फिर से प्राइज विकेट साबित हो सकता हैं.&lt;br /&gt;सिडनी में भारत अगर मैच ड्रॉ कराने में भी सफल होता है,तो यह पिछली हार से निकलने का एक सही रास्ता होगा.पिछली बार भी  एडिलेड टेस्ट में भारत की जीत के बारे में किसने सोचा था.भारतीय खिलाडियों को भी एक टीम के रूप में खेलते हुये एक सकारात्मक सोच के साथ मैच में उतरना पडेगा.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-6354911939593946234?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/6354911939593946234/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=6354911939593946234' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/6354911939593946234'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/6354911939593946234'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/01/blog-post_01.html' title='भारत को सिडनी में डालना होगा जीत का सीड'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-1453618993938573911</id><published>2008-01-01T02:53:00.000-08:00</published><updated>2008-01-01T02:54:07.151-08:00</updated><title type='text'>नये वर्ष की नयी चुनौतियाँ</title><content type='html'>नव-वर्ष के आगमन के साथ ही भारतीय राजनीति को नयी चुनौतियों का सामना करना पडेगा.बीते साल या यूँ कहे तो बीते सप्ताह में दो राज्यों के विधान-सभा के परिणाम भाजपा के पक्ष में जाने के साथ केंद्र की राजनीति में काँग्रेस को अपनी स्थिति और खराब होती हुयी दिखायी दे रही है.भारत-अमेरिकी परमाणु करार पर पहले से ही वाम दलों का दबाब झेल रही काँग्रेस इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में ही डाल कर रखना चाहेगी.भाजपा और वाम दलों के लिये एक कमजोर काँग्रेस ही उनकी राजनीति को केंद्र स्तर पर और मजबूत करेगी.इस साल सबसे पहले कर्नाटक में होने वाले विधान-सभा चुनाव में काँग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टी अपने बल पर ही वहाँ की सत्ता में आना चाहेगी.यही से दोनों पार्टी का राजनीतिक साल निर्धारित होगा.&lt;br /&gt;भाजपा के लिये जहाँ मध्य प्रदेश,राजस्थान और छत्तीसगढ में एंटी इनकम्बेंसी का सामना करना पडेगा ,वही दिल्ली में काँग्रेस को भी कुछ ऐसी ही स्थिति का सामना करना पडेगा.भाजपा के लिये अपने गढों को बचाने का दबाब रहेगा वही काँग्रेस के लिये इन राज्यों में लौटते हुये आगामी लोक सभा में अपनी दावेदारी मजबूती से रखने का मौका मिलेगा.हिन्दीभाषी राज्यों में दोनों राष्ट्रीय पार्टी आमने सामने होती है,इसलिये दोनों पार्टी के लिये २००९ के आम चुनावों से पहले  इन राज्यों का चुनाव  शक्ति परीक्षण के लिये अहम सिद्ध होगा.&lt;br /&gt;भारतीय जनता पार्टी द्वारा गुजरात चुनाव के दौरान लाल कृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार घोषित किये जाने का फायदा गुजरात के चुनावों में तो देखने को मिला ही,साथ ही भाजपा ने इस घोषणा के साथ ही आगामी आम चुनाव के लिये अपनी चुनावी तैयारी शुरू कर दी.काँग्रेस के लिये फिर से अगले चुनाव के लिये प्रधानमंत्री पद के लिये अपने उम्मीदवार की घोषणा करना काफी मुश्किल काम होगा.मनमोहन सिंह को फिर से प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करना संभव नही.सोनिया गाँधी के २००४ के 'त्याग' के कारण वह भी इस पद की उम्मेदवार नही हो सकती है.पुराने काँग्रेसी नेताओं में अर्जुन सिंह,प्रणव मुखर्जी भी अब कही इस पद के लिये हाशिये पर चले गये हैं.युवा चेहरे के रूप में राहुल गाँधी ही एक ऐसे नेता नजर आते है,जिन्हे की इस पद के लिये काँग्रेस सामने ला सकती हैं.&lt;br /&gt;देश में एक स्थिर और मजबूत सरकार ही आंतरिक और बाह्य समस्याओं से निपट सकती हैं.सरकार परमाणु करार के मुद्दे को एक बार छोड भी दे तो ऐसी स्थिति में वाम दल महँगाई और अन्य मुद्दों पर काँग्रेस को केंद्र में घेरेगी.सरकार में रहते हुये मुख्य विपक्ष की भूमिका निभाने का दायित्व वाम दल कर रही हैं और आने वाले समय में भी करती रहेगी.ऐसी स्थिति में केंद्र में चल रही सरकार को कमजोर माना जायेगा और हो सके तो यह आने वाले चुनाव में एंटी इनकम्बेंसी का कारण बनेगा.&lt;br /&gt;काँग्रेस के लिये नये साल में अपनी स्थिति मजबूत करने के ज्यादा अवसर हैं.अगर वह राज्यों में होने वाले विधान सभा चुनावों में सही कदम उठाते हुये चुनाव जीतते जाये,तो वापस सत्ता में आने के अच्छे अवसर हैं.भाजपा के लिये अपने राज्यों की सत्ता बचाने की चुनौती के साथ साथ नये राज्यों में भी उपस्थिति दर्ज कराने की जरूरत हैं,तभी जाकर दिल्ली की सत्ता हाथ आयेगी.तीसरा मोर्चा भी नये साल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश करेगा.&lt;br /&gt;नया साल राष्ट्र को  चहुँमुखी विकास की ओर ले चले.यही कामना हैं.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-1453618993938573911?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/1453618993938573911/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=1453618993938573911' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/1453618993938573911'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/1453618993938573911'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2008/01/blog-post.html' title='नये वर्ष की नयी चुनौतियाँ'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-9197014791375699358</id><published>2007-12-22T23:10:00.001-08:00</published><updated>2007-12-22T23:10:54.804-08:00</updated><title type='text'>फिर खिला कमल</title><content type='html'>गुजरात में भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ एक बार पुनः सत्ता पर काबिज हुई.इसे मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत माना जा रहा हैं,जो सही भी हैं.तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद एक बार पुनः जीत हासिल करना अपने आप में एक बडी बात हैं.भारतीय प्रजातंत्र में पहली बार विकास के मुद्दे पर कोई सरकार जीतकर पुनः सत्ता में आयी है,वैसे भी भाजपा का वापस सत्ता में आने का रिकॉर्ड ना के बराबर हैं.इस चुनाव के परिणामों का भारतीय राजनीति और भाजपा के अंदरूनी राजनीति पर भी दूरगामी प्रभाव पडेगा.इस जीत के साथ भाजपा जहाँ केंद्र की राजनीति में अपने हमले तेज करेगी वहीं अगले साल जो भाजपा शासित राज्य विधान सभा चुनाव में जाने वाले हैं,वहाँ पर भाजपा बागियों की अब दाल नहीं गलने वाली हैं.गुजरात में निश्चय ही मोदी का कद और बढा हैं.विकास के मुद्दे के साथ साथ चुनाव प्रचार के दौरान कॉग्रेस ने ही भाजपा को बैठे बैठे हिन्दुत्व का मुद्दा दे दिया था.इस चुनाव से एक बात और सामने आयी मीडिया जितना मोदी के खिलाफ बोला,मोदी को उतना ही फायदा हुआ."वाइब्रेटिंग गुजरात" का स्लोगन इस बार इंडिया शाइनिंग की तरह फ्लॉप साबित नहीं हुआ,क्योंकि यह इस बार इंडिया शाइनिंग की तरह मुख्य मुद्दा नहीं रहा.जहाँ तक नरेंद्र मोदी की बात हैं, इस बार एक क्षेत्रीय क्षत्रप  के रूप में  उनका उदय हुआ हैं.केंद्र की राजनीति से वे दूर ही रहेंगे.भाजपा के लिये यह जीत काफी अहम साबित होगी.आगामी लोकसभा चुनाव में केंद्र की कमजोर सरकार के विकल्प के रूप में भाजपा अपने आप को रखेगी.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-9197014791375699358?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/9197014791375699358/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=9197014791375699358' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/9197014791375699358'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/9197014791375699358'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2007/12/blog-post_22.html' title='फिर खिला कमल'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-9002115310497425227</id><published>2007-12-12T04:09:00.000-08:00</published><updated>2007-12-12T04:10:12.701-08:00</updated><title type='text'>क्या ऐसे ही टीम जीतेगी डॉउनअंडर में</title><content type='html'>भारत ने पाकिस्तान से टेस्ट श्रृंखला भले ही १-०  से जीती हो,लेकिन इसका परिणाम कम से कम २-० तो होना ही चाहिये.बेंगलुरू टेस्ट हम जीतने के करीब थे,लेकिन खराब रौशनी के कारण हम यह मैच नही जीत सके.पाकिस्तान की कमजोर ऑकी जाने वाली टीम श्रृंखला में दो मैंचों को बल्लेबाजी के कारण ड्रॉ करवाने में सफल रही. पूरी श्रृंखला में बल्लेबाज छाए रहे.शतकों की झडी लगी रही.बडे बडे शतक लगे. गेंदबाजी दोनों टीम के तरफ से दोयम दर्जे की रही.&lt;br /&gt;भारत के प्रदर्शन की बात करे,तो कुछ खास प्रदर्शन नही रहा.आगामी टेस्ट श्रृंखला में भारतीय टीम को ना तो इस तरीके की बॉलिंग अटैक का सामना करना पडेगा,ना ही ऐसी पिच मिलेगी.अगर इसी तरह का एप्रोच रहा तो टीम को डॉउनअंडर में काफी मुश्किलों का सामना करना पडेगा.बल्लेबाजी तो कमोबेश ठिक हैं,लेकिन बॉलिंग अटैक की बात करे तो कही से भी गेंदबाजी में धार नही दिखायी देती हैं.वैसे भी सभी तेज गेंदबाज  अभी फिट नही हैं,साथ ही ब्रांड नयी अटैक पर  विश्वास नहीं किया जा सकता हैं.&lt;br /&gt;श्रृंखला से यह बात सामने निकल कर आयी कि भले ही पुराने शेर २०-२० मैच नही खेल रहे हो लेकिन टेस्ट मैचों में उनका स्थान लेना इतना आसान काम नही हैं.सौरभ,लक्ष्मण के साथ साथ जाफर और युवराज ने जहाँ बल्ले से कमाल दिखाया, वही इशांत ने अपने पहले ही मैच में ५ विकेट लेकर अपने चयन को सही बताया.इरफान ने बल्ले से कमाल तो दिखाया लेकिन पिछले ऑस्ट्रेलियाई दौरे की तरह गेंदबाजी में जौहर दिखाने से चूक गये.कार्तिक ने कीपिंग से जहाँ सभी को निराश किया वही बल्ले से भी कुछ नही कर दिखाया. इसलिए भारत के सामने ओपनिंग बल्लेबाज की समस्या बनी हुयी हैं.गौतम गंभीर को मौका मिलने की पूरी उम्मीद हैं क्योंकि एक तो वो खब्बू बल्लेबाज हैं और दूसरे स्पेशलिस्ट ओप्निंग बल्लेबाज हैं.&lt;br /&gt;पाकिस्तान के खिलाफ १-० से मिली जीत भारतीय टीम का मनोबल बढाने के लिये नाकाफी हैं.जब अपनी ही धरती  पर इतना खराब परिणाम सामने आया तो बॉक्सिंग डे से शुरू होने वाली  टेस्ट श्रृंखला के लिये भारत को अभी से ही कमर कस लेनी चाहिए. ऑस्ट्रेलिया टीम जहाँ अपने द्वारा सर्वाधिक टेस्ट जीतने का नया रिक़ॉर्ड कायम करना चाहेगी वही भारतीय टीम पिछली बार की तरह अगर श्रृंखला बराबर भी करवा लेती हैंतो यह भारत के लिये जीत होगी.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-9002115310497425227?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/9002115310497425227/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=9002115310497425227' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/9002115310497425227'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/9002115310497425227'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2007/12/blog-post_12.html' title='क्या ऐसे ही टीम जीतेगी डॉउनअंडर में'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-3651384252101188788</id><published>2007-12-11T04:01:00.000-08:00</published><updated>2007-12-11T04:02:37.565-08:00</updated><title type='text'>आई आडवाणी की बारी</title><content type='html'>भारतीय जनता पार्टी ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिये पार्टी में नंबर दो माने जाने वाले नेता लाल कृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया हैं.इस तरह काफी दिनों से चले आ रहे उन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया गया कि पार्टी में अटल बिहारी वाजपेयी के बाद कौन प्रधानमंत्री पद के लिये भाजपा का चेहरा होगा.इस घोषणा के समय की बात करें तो यह एक ऐसे समय की गयी हैं जब कुछ ही घंटों में गुजरात में पहले चरण का मतदान होने जा रहा था.साथ ही साथ वाम दलों द्वारा परमाणु करार पर समर्थन वापस ले लेने की स्थिति में मध्यावधि चुनाव की संभावना बनती दिखायी दे रही हैं.&lt;br /&gt;भाजपा की सितंबर माह में भोपाल में संपन्न हुयी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इस मुद्दे पर उस वक्त विराम लग गया था जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने को उस समय  राजनीति में सक्रिय होने की बात कही थी. इस समय अपने स्वास्थ्य का हवाला देते हुये राजनीति में अब सक्रिय भूमिका नही निभा पाने की बात कही,उसी आलोक में यह निर्णय लिया गया.&lt;br /&gt;गुजरात में पहले चरण के मतदान से कुछ घंटे पूर्व इस घोषणा के कई मायने हो सकते हो सकते हैं. गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की अनुपस्थिति से यह चुनाव मोदी केंद्रित हो गया.इससे भाजपा की छवि मोदी के इर्द-गिर्द ही सिमट कर रह गयी. नरेंद्र मोदी की छवि एक कट्टर हिन्दूवादी नेता की हैं,उस छवि से बाहर निकालने का प्रयत्न है केंद्र स्तर पर लाल कृष्ण आडवाणी को पार्टी नेता घोषित करना.साथ ही आडवाणी भी गुजरात से ही आते है,अतः वोटरों के मन में यह बात भी बैठाना कि केंद्र स्तर पर भी भाजपा का प्रतिनिधित्व उनके ही राज्य का व्यक्ति करेगा.&lt;br /&gt;इससे पहले केंद्र स्तर पर जब भाजपा में वाजपेयी और आडवाणी में तुलना की जाती थी तो आडवाणी को ज्यादा हार्डलाइनर माना जाता था.बदलती परिस्थितियों में समय समय पर अटल बिहारी वाजपेयी का राजनीति से संन्यास लेने की खबर से नेतृत्व का सवाल खडा हो गया था.  एन.डी.ए. के घटक दलों द्वारा आडवाणी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार ना माने जाने की स्थिति में भाजपा में ही नेतृत्व को लेकर कलह सामने आया. लेकिन अब स्थिति स्पष्ट हैं.इसमें देर करना भाजपा के लिये समस्या खडा कर सकती थी.लेकिन यह घोषणा चुनाव के बाद भी की जा सकती थी.&lt;br /&gt;प्रधानमंत्री पद के लिये लाल कृष्ण आडवाणी को भाजपा का उम्मीदवार बताया जाना भले ही पार्टी का अंदरूनी मामला हो सकता हैं लेकिन आने वाले आम चुनाव में एन.डी.ए. के घटक दलों के लिये इसे स्वीकार करना कठिन भी हो सकता हैं.इससे एक बाद स्पष्ट हैं भाजपा अगला चुनाव हिन्दुत्व के ही मुद्दे पर लडेगी.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-3651384252101188788?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/3651384252101188788/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=3651384252101188788' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/3651384252101188788'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/3651384252101188788'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2007/12/blog-post_125.html' title='आई आडवाणी की बारी'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-2313716587085013688</id><published>2007-12-11T02:40:00.000-08:00</published><updated>2007-12-11T02:41:16.202-08:00</updated><title type='text'>भारत की ऊर्जा जरूरते</title><content type='html'>संयुक्त राष्ट्र की ताजा मानव विकास रिपोर्ट २००७ के अनुसार यदि विकसित देश २०२० ईस्वी तक अपने कार्बन उत्सर्जन में ३० प्रतिशत और २०५० तक ८० प्रतिशत तक की कमी नहीं करते हैं तो जलवायु परिवर्त्तन पर इसका बुरा प्रभाव पडेगा.विकासशील देशों के लिये २०५० तक २० प्रतिशत कमी करने की बात कही गयी हैं.इस समय धनी और विकसित राष्ट्र पूरे विश्व में ५० प्रतिशत कार्बन के उत्सर्जन के लिये जिम्मेदार हैं.भारत जैसा विकासशील देश कार्बन उत्सर्जन के मामले में अभी विकसित देशों से काफी पीछे हैं.ऐसी स्थिति में भविष्य को देखते हुये भारत को ऐसी कार्बन मुक्त तकनीक का विकास करना चाहिये ताकि हम निर्धारित आर्थिक वृद्धि के लक्ष्य को पा सके. योजना आयोग ने वर्त्तमान में देश में ४०० अरब किलोवाट प्रति घंटे व्यवसायिक ऊर्जा की जरूरत बतायी हैं. इस आधार पर २०३० तक हमें २०,००० अरब किलोवाट प्रति घंटे व्यवसायिक ऊर्जा की जरूरत पडेगी.वर्त्तमान में भारत की ९७ प्रतिशत ऊर्जा की आपूर्ति कोयला,तेल और गैस से होती हैं. ये सभी कार्बनयुक्त ऊर्जा स्रोत हैं.निकट भविष्य में अगर १५% भी कार्बनमुक्त ऊर्जा का उत्पादन करने में सक्षम होता हैं तो यह एक उपलब्धि होगी.ऐसी ऊर्जा उत्पादन के लिये हमारे पास निम्न साधन हैं- पवन ऊर्जा,बायो-ईंधन,जल-विद्युत,नाभिकीय ऊर्जा और सौर ऊर्जा. देश मे कोयला से कुल विद्युत उत्पादन का ५१ प्रतिशत ऊर्जा जरूरतों की आपुर्ति होती हैं,लेकिन इससे कार्बन उत्सर्जन काफी ज्यादा होता हैं.कोयले से उत्पादित प्रत्येक किलोवाट प्रति घंटे विद्युत वातावरण में एक किलो कार्बनडॉयऑक्साइड की वृद्धि के लिये जिम्मेदार हैं.पवन ऊर्जा के उत्पादन में भारत विश्व में चौथे स्थान पर हैं.यूरोप की अपेक्षा में यहाँ पवन की गति कम होने के कारण हम ज्यादा से ज्यादा ऊर्जा आवश्यकताओं का मात्र एक प्रतिशत उत्पादन करने में ही हम सक्षम हैं.इसलिये यह अहम भूमिका नही निभायेगा.बायो-ईंधन के रूप में जैट्रोफा,महुआ और एथनोल का प्रयोग विद्युत उत्पादन के लिया किया जाता हैं.लेकिन अभी देश में व्यवसायिक रूप से इस तकनीक का उपयोग होना नही शुरू हुआ हैं.बायो-ईंधन के उत्पादन सुनियोजित तरीके से होता हैं,लेकिन इसके उत्पादन के लिये ख्हद्य उत्पादन से समझौता नहीं किया जा सकता हैं.अभी देश मे तीन करोड हेक्टेयर उपजाऊ जमीन खाली पडी हैं. अगर दो करोड हेक्टेयर जमीन पर भी बायो-ईंधन उत्पादित करने की फसल उगायी जाये,तो दो प्रतिशत ऊर्जा की जरूरत पूरी करेगा.इसी प्रकार जल-विद्युत भी दो प्रतिशत ऊर्जा उत्पादित करने में सक्षम हैं.भारत में अरूणाचल प्रदेश एक ऐसा राज्य है जहाँ जल-विद्युत उत्पादन की असीम संभावना हैं.वैसे भारत में पुनर्वास जैसी समस्या इस राह में काफी रोडे अटकाती हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;नाभिकीय ऊर्जा भी कॉर्बनरहित ऊर्जा का भविष्य में एक अच्छा स्रोत हो सकता हैं.अभी जो संयंत्र भारत में लगे हुये हैं ,उससे हम ४१२० मेगावाट ही बिजली उत्पादित कर सकते हैं,जो कि कुल विद्युत उत्पादन का केवल तीन प्रतिशत हैं.भारत में यूरेनियम सीमित मात्रा में हैं.अभी देश में त्रि-स्तरीय कार्यक्रम के तहत पहले प्लूटोनियम आधारित ब्रीडर फिर थोरियम आधारित ब्रीडर विकसित किया जायेगा. प्रस्तावित भारत अमेरिकी परमाणु करार से हमें २०३० तक २४००० मेगावाट बिजली ही प्राप्त हो सकेगी.यह अभी दूर की कौडी प्रतीत होती हैं क्योंकि अभी इसके लिये काफी ब्रीडर की जरूरत पडेगी और ब्रीडर के प्रोटोटाइप की सफलता पर भी यह निर्भर करता हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सौर-ऊर्जा भारत के लिये एक काफी अच्छा विकल्प साबित हो सकता हैं क्योंकि भारत के ज्यादा भागों में अच्छी सूर्य की रौशनी पडती हैं.दो करोड हेक्टेयर भूमि पर पडने वाली सूर्य की रौशनी से २४००० बिलियन किलोवाट प्रति घंटे बिजली उत्पादित की जा सकती हैं,जो कि हमारे कुल विद्युत आव्श्यकताओं से ज्यादा ही हैं. अतः यह एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता हैं.लेकिन यह काफी खर्चीली प्रक्रिया हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भारत के सामने आने वाले समय में बिजली उत्पादन के उपरोक्त उल्लिखित स्रोतों पर विचार करना होगा. ऊर्जा जरूरतों के साथ साथ वातावरण को नुकसान ना पहुँचाने वाले विक्लप के विषय मे सोचा जाये तो यह और भी अच्छा होगा&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-2313716587085013688?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/2313716587085013688/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=2313716587085013688' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/2313716587085013688'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/2313716587085013688'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2007/12/blog-post_11.html' title='भारत की ऊर्जा जरूरते'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-6186088561948427225</id><published>2007-12-06T03:35:00.000-08:00</published><updated>2007-12-06T03:39:24.816-08:00</updated><title type='text'>बूढे माँ-बाप : कर्ज या फर्ज</title><content type='html'>उदास चेहरे की झुर्रियों को बरसती आँखे सुना रही थीहमारे सपने को सच करने ज़िगर का टुकडा शहर गया हैं.&lt;br /&gt;जी हाँ,यह त्रासदी हैं उन बूढे माता-पिताओं की जो बडे अरमानों से अपने जिगर के टुकडों को शहरों में पढने के लिये शहर तो भेज देते हैं उनके सपनों को पूरा करने के लिये,लेकिन बाद में यही बेटे पूरी तरह से माता-पिता के द्वारा किये गये बलिदानों को भूल जाते हैं और उनकी कोई खैर खबर नहीं लेते हैं.शहरी चमक-दमक और बंगले और कार के बीच अपने माता-पिता द्वारा दिये गये संस्कारों को भूल जाते हैं.उनके हाल पर उनको छोड देते हैं.&lt;br /&gt;भारतीय परिप्रेक्ष्य में ओल्ड एज होम की कल्पना करना आज से कुछ दिन पहले तक संभव नही था.लेकिन बदलती परिस्थितियों में इनकी संख्या में बढोत्तरी अपने सामाजिक स्थिति की बदहाल तस्वीर को हमारे सामने रखती हैं.जिंदगी भर हमारे लिये  अपना सर्वस्व न्योछवर करने वाले अभिभावकों को उनके जीवन काल की संध्या में हम आश्रय न दे सके यह कितनी शर्म की बात हैं.एकल परिवार की अवधारणा को शहरी संस्कृति  में ज्यादा तवज्जों दी जाती है,जिस कारण बच्चों को दादा-दादी या संयुक्त परिवार के अन्य सदस्यों का प्यार नही मिल पाता हैं.वे रिश्तों को ना जानते हैं ना ही उतनी अहमियत देते हैं.आने वाले समय में वे भी माता-पिता के साथ वही व्यवहार करने से नही चूकते,जो उनके माता-पिता अपने माता-पिता के साथ किये होते हैं.&lt;br /&gt;भारत सरकार  भी संसद में ऐसा कानून लाने की सोच रही हैं,जिससे बूढे माँ-बाप अपने गुजारे के लिये अपना हक माँग सकते हैं.जब कानून के तहत वसीयत पर बेटे अपना हिस्सा माँग सकते है तो कानूनन ही सही अब बूढे माँ-बाप अपने गुजारे के लिये हक से अपने बेटों से पैसा तो माँग ही सकते हैं.लेकिन ऐसी स्थिति आना कितनी शर्म की बात हैं,जीते-जी कोई माँ-बाप के सामने ऐसी स्थिति आती हैं तो यह तो उनके मरने के समान हैं.बेटों का फर्ज बनता है कि वे अपने बूढे मां-बाप की सेवा तन मन से करे.&lt;br /&gt;भारतीय संस्कृति में ऐसी स्थिति का आना निश्चय ही शर्म की बात हैं.अपने सपनों को साकार करने के चक्कर में अपने जडों को भूल जाये,ये कहाँ की होशियारी हैं.हमें यह ध्यान रखना चाहिये कि हमें भी  बूढापे से गुजरना हैं,अगर कल वही स्थिति का सामना करना पडे तो यह भी बडी शर्म की बात होगी.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-6186088561948427225?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/6186088561948427225/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=6186088561948427225' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/6186088561948427225'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/6186088561948427225'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2007/12/blog-post_8694.html' title='बूढे माँ-बाप : कर्ज या फर्ज'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-6886500234023950956</id><published>2007-12-06T02:39:00.000-08:00</published><updated>2007-12-06T02:40:10.440-08:00</updated><title type='text'>ऐं भाई जरा देख के सडक पार करों...</title><content type='html'>दिल्ली में सडकों कों पार करते वक्त अब पदयात्रियों को ध्यान रखना होगा कि वे ज़ेब्रा क्रॉसिंग से ही सडक पार करें,साथ ही यह भी सुनिश्चित करे कि उस वक़्त रेड लाइट हो.दिल्ली में सडकों पर दौडती हुई गाडियों के बीच से लोग  आसानी से सडक पार कर लेते है.ना रेड लाइट का ध्यान रखते है ना ही ज़ेब्रा क्रॉसिंग का.इससे परेशानी वाहन चलाने वालों को होती हैं.एकाएक वाहन के सामने से गुजरने के कारण ड्राइवरों का ध्यान भंग तो होता ही हैं,साथ ही दुर्घटना भी होने की संभावना रहती हैं.&lt;br /&gt;दिल्ली की सडकों पर भूमिगत पैदल पारपथ यानि कि सब-वे का निर्माण सरकार इसलिये करवाती है कि पैदल यात्री आसानी से सडक के दूसरी ओर चले जाये,लेकिन समय बचाने के चक्कर में पदयात्री ट्रैफिक नियमों की धज्जी उडाने से बाज नही आते.लेकिन अब ऐसा करने से पहले  उन्हें सोचना पडेगा. कल दिल्ली की सडकों पर गलत तरीके से  सडक पार करने के कारण १८४ लोगों को चालान किया गया.यह मुख्य रूप से पाँच से छह स्थानों पर किया गया.&lt;br /&gt;एक सब-वे बनाने में सरकार को दो करोड रूपये का खर्च आता हैं,लेकिन पब्लिक इसे उपयोग करने के बजाय सडकों के बीच से ही पार करना पसंद करती हैं.सब-वे के अलावा स्वचालित सीढीयुक्त उपरी पारपथ भी आज बनाये जा रहे हैं. आई.टी.ओ. के पास दिल्ली पुलिस मुख्यालय के सामने बने ऐसे पारपथ का उपयोग लोग इसलिये ज्यादा करने लगे क्योंकि सडकों के बीच मे बने डिवाइडर पर बडी बडी लोहे की छड खडी कर जाम कर दिया गया हैं.&lt;br /&gt;ऐसे नियमों को लाने से पहले सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि सडकों पर जगह जगह पर ज़ेब्रा कॉसिंग होनी चाहिये ताकि पदयात्रियों को सडक पार करने के लिये मीलों दूरी तय नही करना पडे.साथ में इतनी संख्या में पुलिस भी चाहिये ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों को दंडित किया जा सके.लेकिन यह संभव नही हैं.&lt;br /&gt;सडकों पर होने वाली दुर्घटनाओं के मद्देनजर उठाया गया यह कदम अगर दिल्लीवासियों में थोडा भी सिविक सेंस भी भरने में कामयाब होता हैं तो यह एक अच्छा कदम साबित होगा.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-6886500234023950956?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/6886500234023950956/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=6886500234023950956' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/6886500234023950956'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/6886500234023950956'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2007/12/blog-post_06.html' title='ऐं भाई जरा देख के सडक पार करों...'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-1383804704423736159</id><published>2007-12-04T01:45:00.000-08:00</published><updated>2007-12-04T01:46:37.338-08:00</updated><title type='text'>बीजेपी बनाम बीजेपी : भारतीय जनता पार्टी बनाम बागी जनता पार्टी</title><content type='html'>गुजरात में ३ दिसम्बर को सभी अखबारों में केशूभाई पटेल की तस्वीर लगे एक विज्ञापन  ने राज्य में बदलाव लाने की अपील की हैं.इस विज्ञापन को छपवाने से केशूभाई ने भले ही इंकार किया हो लेकिन इसमें छपी बातों से इंकार नहीं किया हैं. गुजरात में बागी भाजपाई किस तरह आगामी चुनाव पर असर डालना चाहते हैं,यह इसका जीता-जागता उदाहरण हैं.&lt;br /&gt;गुजरात में इससे पहले होने वाले चुनावों में कॉग्रेस और भाजपा में सीधा मुकाबला होता था ,लेकिन इसबार बागी भाजपा नेताओं ने एक तीसरा कोण इस चुनाव में ला दिया हैं.ये बागी भी बँटे हुये हैं-कोई कॉग्रेस का समर्थन कर रहा हैं,कोई उमा भारती की पार्टी भारतीय जनशक्ति के समर्थन में हैं और कुछ तो ऐसे है जो भाजपा की ही सरकार चाहते है,लेकिन नेतृत्व परिवर्त्तन के साथ.यानि कि इनकी भी स्थिति स्पष्ट नहीं हैं.लेकिन इससे भाजपा को नुकसान होना तय हैं.नुकसान कितना होगा,यह कहना मुश्किल हैं,ऐसा भी हो सकता हैं कि भाजपा की सरकार जा भी सकती हैं.&lt;br /&gt;चुनाव पूर्व करवाए गये सर्वेक्षणों में नरेंद्र मोदी को सर्वाधिक लोकप्रिय नेता और भाजपा के वोटों में कुछ गिरावट के साथ पुनः सत्ता में लौटने की बात कही गयी है.चुनाव जितना नजदीक आते जा रहा हैं,उतने ही बागी सक्रिय होते जा रहे हैं.केशूभाई पटेल ने अखबारों में छपी बातों का एक तरह से समर्थन ही किया है.इस तरह पटेलों का वोट जो की गुजरात की राजनीति में अहम माना जाता हैं,राज्य में किसी की सरकार लाने व गिराने दोनों में सक्षम हैं.चुनाव आते आते बागियों के वार और तेज हो जायेंगे,ऐसी स्थिति में मोदी इन वारों को झेल पुनः सत्ता में आ जाते है तो और भी प्रखर नेता के रूप में भाजपा में अपना स्थान बनायेंगे,अगर सत्ता मे नहीं आ पाते हैं तो हाशिए पर खडे हो जायेंगे,जहाँ से वापसी करना काफी मुश्किल होगा.&lt;br /&gt;यह चुनाव पहले से ही भाजपा बनाम भाजपा के तौर पर लडा जा रहा हैं.यहाँ विपक्ष के रूप में कॉग्रेस इतनी कमजोर  हैं कि वह बागियों के बल पर सत्ता में आना चाह रही हैं.ऐसा हो भी सकता हैं क्योंकि इस चुनाव में नुकसान उठाने वाली पार्टी भाजपा ही होगी,अगर कॉग्रेस इस मौके को सही तरीके से भुना सके.वैसे अभी भी इस चुनाव को भाजपा बनाम भाजपा के तौर पर ही देखा जा रहा हैं.छोटी पार्टियाँ अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल हो जायेंगी,लेकिन तीसरी शक्ति के रूप में उभरेंगी इसकी कम ही संभावना हैं.मोदी का विकास इस चुनाव में उसे सफलता दिलवाता हैं या उसका तानाशाही रवैया उसे राजनीति के हाशिए पर ला खडा करता हैं- यह तो आने वाला समय ही बतायेगा.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-1383804704423736159?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/1383804704423736159/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=1383804704423736159' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/1383804704423736159'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/1383804704423736159'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2007/12/blog-post.html' title='बीजेपी बनाम बीजेपी : भारतीय जनता पार्टी बनाम बागी जनता पार्टी'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-6618312643560308675</id><published>2007-11-28T04:01:00.000-08:00</published><updated>2007-11-28T04:03:52.659-08:00</updated><title type='text'>तस्लीमा का तिलिस्म</title><content type='html'>बांग्लादेश की विवादास्पद लेखिका तस्लीमा नसरीन इन दिनों एकबार फिर से सुर्खियों में हैं.पिछले सप्ताह नंदीग्राम में हुयी हिंसा के विरोध में जब कोलकत्ता में प्रदर्शन किये जा रहे थे,तभी एक नये मुस्लिम संगठन ने तस्लीमा की वीजा अवधि का मामला इसमें जोर दिया और इसी बीच माकपा नेता बिमान बसु का यह बयान कि अगर तस्लीमा के कारण विधि-व्यवस्था बिगडती है तो उसे देश छोड देना चाहिए.तस्लीमा का कोलकत्ता छोड जयपुर जाना,फिर वहाँ से दिल्ली आना और अब किसी अज्ञात स्थान पर जाना लगातार सुर्खियों में छाया हुआ हैं.&lt;br /&gt;अपने देश को छोड पिछले कई सालों से भिन्न-भिन्न देशों में शरण लेने वाली तस्लीमा भारत को ही अपना घर मानती है.बांग्लादेश मे कट्टरपंथियों के विरोध के कारण उसका देश लौटना अब संभव नहीं हैं. अपने धर्म के खिलाफ लिखने के कारण उन्हें जगह-जगह विरोध का सामना करना पड रहा है.बुद्धिजीवियों के नजर में व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होनी चाहिये ,इसलिये तस्लीमा ने जो भी लिखा उस कारण उसका विरोध नहीं किया जाना चाहिये.लिकिन जो कट्टरपंथी हैं वे इस तर्क को खारिज़ करते है और इसे धर्म पर चोट पहुँचाना मानते हैं.आस्था के इस प्रश्न पर वो किसी को भी बख्शने को तैयार नहीं हैं.&lt;br /&gt;इधर राजनीतिक पार्टियाँ इस मुद्दे पर भी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने से बाज नही आ रही हैं.सबसे पहले माकपा ने जबरन तस्लीमा को जयपुर भेजा ,तब राजस्थान की भाजपा सरकार ने अपने यहाँ से दिल्ली भेज दिया और अपने राजस्थान भवन में ठहराया.मीडिया ने जगह जगह पर लेखिका का पीछा किया.मुद्दा गरमाता देख केंद्र सरकार हरकत में आयी और ऐसे स्थान पर ले गयी जिसकी खबर मीडिया को ना लगे.इसी बीच गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने तस्लीमा बहन को अपने यहाँ आने का न्यौता दे दिया.&lt;br /&gt;भाजपा ने इस मुद्दे पर यह जताने की कोशिश की कि वह मुस्लमानों की कितनी हिमायती हैं.केंद्र सरकार भी पीछे कहाँ रहती ,उसने भी शरणार्थी घोषित करने की जल्दबाजी दिखायी.यहाँ तस्लीमा को पनाह देना मुस्ल्मानों को खुश करना हैं या नाखुश करना,यह तो आने वाला समय ही बतायेगा,लेकिन अभी पूरी पार्टियाँ तस्लीमा के तिलिस्म में उलझी हुयी नजर आती हैं.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-6618312643560308675?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/6618312643560308675/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=6618312643560308675' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/6618312643560308675'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/6618312643560308675'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2007/11/blog-post_28.html' title='तस्लीमा का तिलिस्म'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-5448605138903622940</id><published>2007-11-27T23:52:00.001-08:00</published><updated>2007-11-27T23:52:52.763-08:00</updated><title type='text'>कोच तभी होगा जब वह विदेशी हो.</title><content type='html'>भारतीय क्रिकेट टीम अभी काफी अच्छे दौर से गुजर रही है. इंग्लैंड में टेस्ट श्रृंखला जीती,२०-२० का वर्ल्ड कप जीती,पाकिस्तान के खिलाफ एक-दिवसीय श्रृंखला जीती और वर्त्तमान में चल रहे टेस्ट श्रृंखला में १-० से आगे हैं.ऐसा माना जा रहा है कि टीम जो प्रदर्शन कर रही है वो बिना एक कोच के कर रही है.रॉबिन सिंह,वेंकटेश प्रसाद और लालचंद राजपूत क्या टीम की शोभा बढाने के लिये साथ में रहते हैं क्या? ये कोच की जिम्मेदारी बखूबी नही निभा रहे है क्या,जो एकाएक ऐसे विदेशी कोच का नाम सामने आ गया जिसने शुरूआत में ही कह दिया कि मैं बीसीसीआई पर यह एहसान कर रहा हूँ कोच बन कर.जी हाँ,मैं बात कर रहा हूँ दक्षिण अफ्रीका के सलामी बल्लेबाज गैरी कर्स्टन की,जो कि हाल में ही भारतीय टीम के कोच नियुक्त हुये हैं.&lt;br /&gt;सबसे पहली बात कि भारतीय टीम को अचानक ही कोच की जरूरत क्यों आन पडी.इसका सीधा-सा जबाब हैं भारतीय टीम को अगले महीने ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर जाना हैं जहाँ एक कोच की सख्त जरूरत होगी वह भी विदेशी.आनन-फानन में एक ऐसे पूर्व क्रिकेट खिलाडी को चुन लिया जिसे कोचिंग का नाम मात्र का अनुभव हैं.खिलाडी के तौर पर गैरी का भले ही अच्छा रिकॉर्ड रहा हो लेकिन किसी को कोच चुनने का यह आधार नही हो सकता हैं. और तो और आपके टीम में चार-पाँच तो ऐसे खिलाडी है जो उसके साथ खेले है और कुछ तो ऐसे है जो उनके खेलने से  पहले से ही अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में खेल रहे हैं.&lt;br /&gt;ग्रेग चैपल के विवादास्पद कोचिंग दौर के बाद आठ महीने तक कोई कोच (?) नहीं होने के बाद एक विदेशी को कोच नियुक्त किये जाने पर लालचंद राजपूत का गुस्सा होना यह दिखाता हैं कि किस तरह बोर्ड अभी भी विदेशी कोच होने की मानसिकता से घिरा हैं.भारत में अभी के दौर में चंद्रकांत पंडित,पारस म्हाम्ब्रे,लालचंद राजपूत,संदीप पाटिल जैसे कोच उपलब्ध हैं लेकिन बोर्ड को इनकी योग्यता पर भरोसा नहीं हैं.तो क्या भारत में कोच कभी भी अपने राष्ट्रीय टीम की कोचिंग नही कर पायेंगे.&lt;br /&gt;भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को यह आशंका है कि अगर डाउनअंडर जाने वाली टीम बिना विदेशी कोच के जाती है तो उस पर कोच नहीं नियुक्त किये जाने पर अँगुली उठने लगेगी.टीम ने अगर बुरा प्रदर्शन किया तो इसका ठीकरा आसानी से कोच के सिर पर फोडा जा सकता हैं.इस तरह कोच को आनन-फानन में नियुक्त कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त होने में ही भलाई समझी बोर्ड ने.&lt;br /&gt;भारतीय टीम को निश्चित तौर पर एक कोच की जरूरत हैं लेकिन इस तरह किसी का फेवर लेकर कोच नियुक्त करना कहाँ की समझदारी हैं.नये खिलाडियों को कोच करने की जरूरत से इंकार नहीं किया जा सकता हैं.तीस से उपर के खिलाडी भले ही कोचिंग की जरूरत नही पडे लेकिन नये खिलाडी जितनी जल्दी से भारतीय टीम में दिखायी देते है उतने जल्दी ही गायब हो जाते हैं.नये आने वाले खिलाडीयों में प्रतिभा तो काफी हैं लेकिन उसे निखारने की जरूरत हैं ताकि वह भी आया राम गया राम वाली श्रेणी में शामिल ना हो जायें.इस समय  एक दक्ष कोच की जरूरत थी ना कि कामचलाऊ कोच की.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-5448605138903622940?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/5448605138903622940/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=5448605138903622940' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5448605138903622940'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5448605138903622940'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2007/11/blog-post_27.html' title='कोच तभी होगा जब वह विदेशी हो.'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-3383924510556993925</id><published>2007-11-26T03:42:00.000-08:00</published><updated>2007-11-26T03:45:03.349-08:00</updated><title type='text'>२६ को ही क्यों आते है भूकंप?</title><content type='html'>तारीख: २६ नवम्बर,२००७&lt;br /&gt;समय : ४:४२ प्रातः&lt;br /&gt;स्थान : दिल्ली व आस-पास का इलाका.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जाडे की सर्द सुबह. लोग अपने रजाई व कंबलों में सोये थे तभी अचानक धरती के हिलने के साथ लोगो का सडकों पर भागना शुरू हुआ.भूकंप के झटके महसूस किये गये.पूरी दिल्ली जग गयी.समाचार-चैनलों ने अपने दफ्तर में महसूस किये हुये झटके के फूटेज को ही दिखाना शुरू किया. ४.३ रिक्टर तीव्रता वाले भूकंप से कोई नुकसान तो नहीं हुआ,लेकिन तारीख की बात करे तो अभी हाल में आये हुये भूकंप और सुनामी जैसी विपदाओं की बात करे तों २६ नवंबर २००४ को भारत के दक्षिणी समुद्री तट पर सुनामी का कहर आया हो या २६ जनवरी २००१ को गुजरात के कच्छ इलाके में महसूस किये हुये झटके हो.&lt;br /&gt;भारत में हाल में जितनी भी प्राकृतिक आपदाऍ जो हमारी स्मृति में ताजा हैं वो तो कम से कम २६ तारीख को ही आयी हैं.इसके संदर्भ में ऐसा हो सकता हैं कि २६ के दोनों अंकों को जोडने से २+६=८ बनते है और ये ८ संख्या की बात करे तो पाते हैं कि यह अँग्रेजी में ८ दो शून्यों को जडने से बना हैं जो पृथ्वी के ऊपर एक और पृथ्वी का परिचायक हैं. इन दोनों में अस्थिरता आने पर भूकंप आता हैं,चूँकि २६ को ही यह संतुलन गडबडाता हैं,अतः इसी तारीख को भूकंप आने की ज्यादा संभावना रहती हैं.&lt;br /&gt;अंक-ज्योतिषियों की भी इससे मिलती जुलती राय हो सकती हैं,लेकिन आने वाले २६ तारीखों को तो हम कम से कम सावधान रह ही सकते है.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-3383924510556993925?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/3383924510556993925/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=3383924510556993925' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/3383924510556993925'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/3383924510556993925'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2007/11/blog-post_26.html' title='२६ को ही क्यों आते है भूकंप?'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-4952178977985552532</id><published>2007-11-24T03:48:00.000-08:00</published><updated>2010-03-12T09:15:45.034-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Security'/><title type='text'>क्या सुरक्षित है आम भारतीय?</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;उत्तर प्रदेश में हुये एक के बाद एक बम धमाकों से हमारे सामने यह प्रश्न खडा हो गया हैं कि क्या देश में ऐसा कोई भी इलाका है जहाँ हम भारतीय सुरक्षित हैं. महानगरों के बाद अब छोटे-छोटे शहरों को निशाना बनाया जा रहा हैं.इस बार हुये बम धमाकों की जिम्मेदारी एक ऐसे संगठन ने ली हैं,जिसके विषय में पहले कभी नही सुना गया.इस संगठन की हिम्मत देखिये एक टेलीविजन चैनल के कार्यालय में ई-मेल कर यह सूचना देता है कि अब से पांच मिनट बाद बम धमाके होंगे.हुआ भी ऐसा ही.सिलसिलेवार बम धमाके से पूरा उत्तर प्रदेश दहल गया.&lt;br /&gt;बम धमाकों के बाद आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया.खुफिया-तंत्र का फेल होना बताया गया.क्या ऐसा करने से देश में हो रहे बम-धमाके होने बंद हो जायेंगे? क्या ऐसे ही कोई संगठन कल फिर से एक ही दिन में अस्तित्व में आकर तबाही का मंज़र पैदा करता रहेगा? क्या मुआवजे की राशि ही बाँट कर सरकार अपने उत्तरदायित्व से मुक्त हो जायेगी?&lt;br /&gt;आज फिर से उसी समाचार चैनल के दफ्तर में एक और ई-मेल भेजा जाता है और उसमें किसी खेल के कार्यक्रम की भाँति बम धमाके करने का विस्तृत कार्यक्रम भेजा जाता हैं.पाकिस्तानी टीम को लौटने की सलाह दी जाती है.कल भेजे गये ई-मेल का स्रोत तो मालूम कर लिया गया है और ई-मेल भेजने वाले को पकड भी लिया जायेगा,लेकिन सोचने वाली बात यह हैं कि आतंकवादियों की यह हिम्मत कि वे इस तरह हमारी व्यवस्था का मजाक उडाये.&lt;br /&gt;खुफिया-तंत्र की विफलता के अलावा पुलिस-तंत्र की भी यह विफलता हैं.लखनऊ में धमाके के होने के बाद काफी देर से पुलिस पहुँची और उसके बाद भी स्थिति को सँभालने में विफल रही,तब जाकर वकीलों का गुस्सा भी पुलिस पर फुटा.&lt;br /&gt;एक के बाद एक हो रहे बम धमाकों के बाद भी केंद्र सरकार सचेत नही हो रही हैं. आम जनता की जान की कोई कीमत नहीं नजर आ रही है.वी.आइ.पी. सुरक्षा के पीछे करोडों रूपये बर्बाद किये जा रहे है,लेकिन आम जनता को उसके हाल पर छोडा जा रहा हैं.कहीं भी भीडभाड वाले जगह पर निकलने में भी लोगों को एक अनजाना भय बना रहता हैं.क्या एक आम आदमी की जान की कोई कीमत नही हैं?&lt;br /&gt;पुरा विश्व आतंकवाद की समस्या से जूझ रहा हैं.हालिया मिले ई-मेल से भी यह पता चलता है कि भारत में मुस्लमानों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं हो रहा हैं,उसी का परिणाम हैं यह बम धमाके.इस्लामी जिहाद का नाम दिया जा रहा हैं.कुछ चंद मुठ्ठी भर लोग यह क्यों नही समझते कि सिर्फ हथियार के बल पर आज के युग में अपनी सत्ता कायम नही की जा सकती है.&lt;br /&gt;हर हमले के बाद उस स्थल की सुरक्षा बढा दी जाती है.कुछ दिनों बाद जन-जीवन सामान्य भी हो जाता है,लेकिन वहाँ के उन लोगों की जेहन में एक घाव छोड जाती है हमेशा के लिये,जो इस घटना में अपने को खोते हैं.सुरक्षा व खुफिया तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत हैं ताकि इस तरह की घटनाओं को होने से रोका जा सके और आम जन भी निर्भय हो कर कहीं आ जा सके.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-4952178977985552532?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/4952178977985552532/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=4952178977985552532' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/4952178977985552532'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/4952178977985552532'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2007/11/blog-post_24.html' title='क्या सुरक्षित है आम भारतीय?'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-4133504425670980169</id><published>2007-11-23T04:03:00.000-08:00</published><updated>2010-03-12T08:59:53.332-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मीडिया Trends'/><title type='text'>एड्स रोगियों में कमी अखबार की नजर में</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एड्स रोगियों की संख्या के संबंध में जो नये ऑकडे जारी किये है,उसके अनुसार पुरे विश्व में एड्स रोगियों की संख्या में २००६ के मुकाबले २००७ में ६३ लाख की कमी आयी है.इस खबर को दो अंग्रेजी दैनिकों 'द इंडियन एक्सप्रेस' और 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' ने अपने मुखपृष्ठ पर संक्षेप में स्थान दिया है और अंदर के पृष्ठों पर विस्तार से इस खबर को दिया है.वही 'द हिन्दू' ने भीतर के पृष्ठ पर शीर्षक और उप-शीर्षक के साथ इस खबर को प्रकाशित किया है.&lt;br /&gt;'द इंडियन एक्सप्रेस' ने इसे लीड बनाते हुए शीर्षक दिया है कि भारत द्वारा प्रस्तुत किए गये संशोधित ऑकडे से विश्व के एड्स रोगियों की संख्या में कमी.२००७ में भारत ने एड्स रोगियों की संख्या जुटाने के लिये नयी प्रणाली अपनायी जिसके कारण इस बार प्रमाणिक ऑकडे सामने आये.इस नयी विधि में 'निरीक्षण ऑकडे' और जनसंख्या आधारित सर्वेक्षण दोनों शामिल हैं. इस विधि को आधार मानकर जब संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एड्स संबंधी नये ऑकडे पेश किये तो यह संख्या चार करोड से घटकर तीन करोड तीस लाख ही रह गयी.अखबार ने छह कॉलम की खबर देते हुए ग्राफिक्स के जरिए देश के उन पाँच राज्यों की भी सूची दी है जहाँ सर्वाधिक एड्स रोगी हैं,इसमें मणिपुर,नागालैंड और आँध्र प्रदेश क्रमशः पहले,दूसरे व तीसरे स्थान पर हैं.&lt;br /&gt;वही 'द हिन्दू' ने पाँच कॉलम में खबर देते हुए ऑकडों पर ज्यादा जोर दिया हैं. अफ्रीका के सहारा क्षेत्र में २००७ में सत्रह लाख नये एड्स रोगी चिह्नित किए गये है.२००७ के नये ऑकडे में भारत में एड्स रोगियों की कुल संख्या पच्चीस लाख बतायी गयी है,वही विश्व स्तर पर यह संख्या तीन करोस बत्तीस लाख है.एक अनुमान के मुताबिक प्रत्येक दिन ६८०० नये लोग एड्स से ग्रसित होते हैं.पिछले दो साल मे एड्स से मरने वाले रोगियों की संख्या में कमी आयी है.&lt;br /&gt;'द टाइम्स ऑफ इंडिया' ने भारत में हुये इस नयी प्रविधि के तरीकों पर जोर देते हुये २९ राज्यों में डेढ लाख लोगों के रक्त परीक्षण से इस नये ऑकडे के और अधिक सटीक होने की बात कही.संयुक्त राष्ट्र के एड्स कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर पीटर प्योट की बात को छापा कि सुधार के बाद एचआईवी पीड़ितों के जो आँकड़े मिले हैं उससे इस महामारी की साफ़ तस्वीर हमारे सामने आई है. चार कॉलम में छपी खबर में भारत मे एड्स उन्मूलन की दिशा में कार्यरत नाको संगठन की निदेशक के.सुजाता राव के कथन और भारत में संयुक्त राष्ट्र के एड्स कार्यक्रम के प्रमुख डेनिस ब्रोउन के कथनों को प्रमुखता दी.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-4133504425670980169?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/4133504425670980169/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=4133504425670980169' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/4133504425670980169'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/4133504425670980169'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2007/11/blog-post_23.html' title='एड्स रोगियों में कमी अखबार की नजर में'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-8453311283034193979</id><published>2007-11-22T03:39:00.000-08:00</published><updated>2010-03-12T08:57:33.165-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Politics'/><title type='text'>हवा में उडते बिमान</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;पश्चिम बंगाल में तेजी से बदलते हुए घटनाक्रम के बीच में माकपा नेता विमान बोस के बयान काफी उन्मुक्त रूप से आ रहे हैं.जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पहली बार अपनी चुप्पी तोडते हुए कहा था कि यह घटना काफी दुखद है और राज्य सरकार की यह जिम्मेदारी बनती हैं कि वहाँ सभी को बिना किसी मतभेद के राहत पहुँचाये. प्रधानमंत्री की इस प्रतिक्रिया पर टिप्पणी करते हुए माकपा नेता बिमान बोस ने कहा कि वे प्रधानमंत्री हैं और प्रधानमंत्री का जो काम है वो करे.&lt;br /&gt;२१ नवंबर को कोलकता में हुई हिंसा के दौरान नंदीग्राम के मुद्दे के अलावा तस्लीमा नसरीन की वीजा अवधि बढाये जाने का मुद्दा भी सामने आया .इस पर भी उनका बयान आया कि तस्लीमा को भारत छोडकर चले जाना चाहिये.&lt;br /&gt;इससे पहले भी राज्य में २००४ के विधानसभा चुनाव के दौरान गडबडी होने की स्थिति में चुनाव रद्द करने की बात कही थी.२००५ में न्यायपालिका के खिलाफ टिप्पणी करने के कारण तीन दिन की जेल और दस हजार रूपये के जुर्माने की भी सजा भी सुनायी गयी थी.&lt;br /&gt;हाल में दिये हुए बयानों की बात करे तो अपने को क्या समझ लिया हैं कि प्रधानमंत्री को यह नसीहत दें कि उन्हें सिर्फ अपने काम से मतलब होना चाहिये.क्या पश्चिम बंगाल देश के बाहर पडता है,जिसके वो प्रधानमंत्री नही हैं.अपने को बंगाल राज्य का सर्वेसर्वा समझने वाली पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुंह से यह बयान शोभाजनक नहीं लगता हैं.राज्य के किसी हिस्से में अगर अव्यवस्था हैं तो राज्य सरकार का यह फर्ज बनता है कि वहाँ स्थिति को नियंत्रण में लाए.न कि शासन करने वाली पार्टी के एक नेता इस तरह की अनर्गल बाते करे.&lt;br /&gt;तस्लीमा नसरीन के मुद्दे पर तो अगले दिन अपने बयान को वापस लिया और कहा कि वीजा को निरस्त करने या बढाने का अधिकार केंद्र सरकार का हैं.इस बयान से पश्चिम बंगाल की सरकार को एक बार फिर स्पष्टीकरण देना पडा.राज्य में इस समय माकपा के विरोध में विपक्षीयों के अलावा सहयोगी दलों ने भी मोर्चा खोल रखा हैं.&lt;br /&gt;माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य होने के साथ साथ वरिष्ठ नेता होने के कारण उनका यह दायित्व बनता है क़ि जो भी बयान दे सोच समझ कर दे.पार्टी को शर्मसार ना होना पडे और एक लोकतंत्रीय मर्यादा के भीतर रहकर अपने विचार व्यक्त करे अन्यथा इससे पहले भी खामियाजा भुगतना पडा है और आगे भी ऐसा कुछ हो सकता हैं.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-8453311283034193979?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/8453311283034193979/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=8453311283034193979' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8453311283034193979'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/8453311283034193979'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2007/11/blog-post_22.html' title='हवा में उडते बिमान'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-5366367785203937097</id><published>2007-11-21T04:07:00.000-08:00</published><updated>2010-01-15T09:34:56.733-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Media'/><title type='text'>अंधविश्वास फैलाता बुद्धू बक्सा</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;प्रेत,अन्धविश्वास,चमत्कार,ज्योतिष आदि पर दिखाये जाने वाले कार्यक्रमों का आज के युवा पीढी पर काफी खराब असर पर रहा है.समाचार चैनलों पर इन कार्यक्रमों का प्रसारण आधे घंटे से लेकर एक घंटे के बुलेटिन के रूप में होता हैं.इन कार्यक्रमों के प्रसारण के पीछे चैनल का मुख्य उद्देश्य अपने टाइम-स्लॉट को भरना होता है और साथ ही साथ ज्यादा से ज्यादा टी.आर.पी. भी हासिल करना होता है.धर्म के नाम पर लोगों को तरह तरह के समाचार दिखा कर जैसे-हनुमानजी के आँख से आँसू निकलना,मूर्तियों द्वारा दूध पीना आम जनता को गुमराह करने का काम किया जा रहा हैं.समाचारों में कमी तो नही आ गयी है,जो इस तरीके के समाचार बनाये जा रहे हैं.&lt;br /&gt;भूत-प्रेत पर जी न्यूज द्वारा शुरू किये गये कार्यक्रम 'काल कपाल महाकाल' को खासी लोकप्रियता मिलने का दावा चैनल ने किया.इसका प्रसारण रात में किया जाता था,चैनल द्वारा इस कार्यक्रम के जरिए पाखंड व अवैज्ञानिक बातों को फैलाया जा रहा था.अघोरी,तंत्र-मंत्र की बातों को सही ठहराया जा रहा था.आज के दिन टेलीविजन सूचना का एक सशक्त माध्यम बन कर उभरा हैं,निरक्षर लोगों पर इसका ज्यादा गहरा असर पडता हैं.ऐसे में साक्षरों के साथ साथ निरक्षर जनता पर भी ऐसे कार्यक्रमों का सीधा असर पडता हैं.वे भी इन बातों में विश्वास करने लगते हैं.बच्चों और किशोरों के मन-मस्तिष्क पर ऐसे कार्यक्रमों का बुरा प्रभाव पडता है.&lt;br /&gt;ज्योतिष कार्यक्रमों के दौरान जनता से अपने भविष्य के बारे में जानने के लिये फोन करने को कहा जाता है.दर्शक भी ऐसे कार्यक्रमों में बैठे ज्योतिष से सवाल पूछने में कोई हिचक नहीं दिखाते हैं.इनकी बातों पर यकीन कर तरह तरह के टोटके,अँगूठी,रत्न आदि धारण करने लगते है.एक अंधविश्वास का माहौल बनने लगता है.इन ज्योतिषों की बात पर विश्वास कर युवा अपने ध्येय से भटक जाते हैं.उनके लिये ज्योतिषों की कही बात लकीर हो जाती हैं,जिसे मानना वे जरूरी समझने लगते हैं.&lt;br /&gt;.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-5366367785203937097?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/5366367785203937097/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=5366367785203937097' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5366367785203937097'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/5366367785203937097'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2007/11/blog-post_668.html' title='अंधविश्वास फैलाता बुद्धू बक्सा'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-503891504588758443</id><published>2007-11-21T02:04:00.000-08:00</published><updated>2010-01-15T09:33:38.038-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Politics'/><title type='text'>नाटक हैं कि खत्म ही नहीं होता.</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;कर्नाटक में सात दिन पुरानी बी.एस.येदुरप्पा नेतृत्व वाली भा.ज.पा. सरकार सदन में बहुमत साबित करने से पहले ही गिर गयी. पिछले दो महीने से चले आ रहे नाटक का पटाक्षेप होने के बजाय यह और भी खींचता चला जा रहा हैं. राष्ट्रपति शासन हटाने के लिये भाजपा और जद(एस) दोनों पार्टी एकदम अड गयी थी,लेकिन सरकार जहाँ बनाने की बात आयी,दोनों के आपसी मतभेद एक बार फिर उभर के सामने आ गये.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भारतीय जनता पार्टी का दक्षिण राज्य में कमल खिलाने का सपना अभी अधूरा ही रह गया.पार्टी ने इस बार भी सत्ता-हस्तांतरण के मामले में एक बार फिर धोखा खाया.अपनी पिछली भूलों से सबक नही लेने का खामियाजा इस बार भी भुगतना पडा.१९९७ में मायावती ने उत्तर प्रदेश में भी भाजपा को सता में नही आने दिया. हर बार पार्टी अपने गठबंधन सहयोगी को पहले सरकार बनाने का मौका देती हैं ,जिस कारण से सरकार बनाने की जब इन की बारी आती हैं,तो धर्मनिरपेक्षता का हवाला देकर दूसरी पार्टी किनारा कर लेती हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जनता दल (सेक्युलर) के प्रमुख नेता एच. डी. देवेगौडा ने भाजपा की नयी सरकार के सामने १२ सूत्री माँगों पर पहले हस्ताक्षर करने की स्थिति में ही समर्थन देने की बात कही,जिसे की भाजपा ने सिरे से नकार दिया.इससे पहले भी अक्तूबर महीने में जद(एस) ने भाजपा को सरकार बनाने नही दिया था. इस तरह दो-दो बार धोखा दिया गया.अब काँग्रेस के समर्थन पर सरकार बनाने का सोच रही हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;समर्थन वापस लेने के पीछे कारणों में जद(एस) के द्वारा मुख्य मंत्रालय मांगा जाना बताया जा रहा हैं.साथ ही देवेगौडा परिवार में आपसी कलह भी इसका कारण बताया जा रहा हैं.देवेगौडा के दूसरे बेटे रेवन्ना को उप्-मुख्यमंत्री बनाया जा रहा था जबकि जद(एस) के विधायक एच.डी.कुमारास्वामी को उप-मुख्यमंत्री बनाना चाह रहे थें.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रजातंत्र में गठबंधन के इस युग में पार्टियों को भी भिन्न-भिन्न स्थिति से गुजरना पड रहा हैं,ऐसे में नए समीकरणों का सामने आना लोकतंत्र में हमारी आस्था को और गहरा करती हैं,लेकिन हमारे द्वारा चुनकर भेजे गये प्रतिनिधियों और उनकी सत्ता-लोलुपता को भी सामने रखती हैं. राजनीति अब समाज सेवा नही रह गयी हैं,ज्यादा से ज्यादा स्व-सेवा हो गयी हैं.गठबंधन के दौरान उनकी स्वार्थसिद्धी मुखर रूप से जनता के सामने उभर कर आती है,जनता भी ऐसे समय में सहानुभूति के लहर में धोखा खायी पार्टी के साथ हो जाती हैं,जो कि नही होना चाहिये.जनता को वैसी पार्टी को चुनना चाहिये,जो कि राज्य के सर्वांगीण विकास के लिये सोचे,न कि अपने विकास की.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-503891504588758443?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/503891504588758443/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=503891504588758443' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/503891504588758443'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/503891504588758443'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2007/11/blog-post_21.html' title='नाटक हैं कि खत्म ही नहीं होता.'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-309263014371125181</id><published>2007-11-20T02:37:00.000-08:00</published><updated>2010-01-15T09:25:52.331-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Social Issue'/><title type='text'>किसानों की आत्महत्या ऑकडों में</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;किसानों की आत्महत्या के सिलसिले में नेशनल क्राइम रिसर्च ब्यूरो की रिपोर्ट पर हम नज़र डाले तो हम पाते हैं कि १९९७ से लेकर २००५ के बीच डेढ लाख किसानों ने आत्महत्या की,जो कि अपन आप में चौंकाने वाला तथ्य है.१९९१ की जनगणना से २००१ की जनगणना में किसानों की संख्या में गिरावट दर्ज़ की गयी है इसका मुख्य कारण बडे पैमाने पर किसानों द्वारा खेती छोड दूसरा पेशा अपनाना बताया जा रहा हैं.&lt;br /&gt;१९९७ से लेकर २००५ के बीच सामान्य आत्महत्या की दर जहाँ १०.७% रही हैं वही किसानों की आत्महत्या की दर १२.६% हैं,जो कि सामान्य कारणों से ज्यादा हैं. इसी दौरान किसानों की आत्महत्या में २७ फीसदी की बढोत्तरी हुई है,वही सामान्य आत्महत्या में १८% की बढोत्तरी दर्ज की गयी है.रिपोर्ट में २००१ वर्ष को टर्निंग प्वाइंट माना हैं,जहाँ से किसानों की आत्मह्त्या में हर साल बढोत्तरी ही दर्ज की जा रही हैं.&lt;br /&gt;भारत के चार राज्यों - आँध्र प्रदेश,कर्नाटक,महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में पूरे देश में होने वाली आत्महत्या का दो-तिहाई आत्महत्याऍ होती हैं. मध्य प्रदेश में हो रही आत्महत्याओं में २००६-०७ के दौरान किसानों की आत्महत्या में ११% की बढोत्तरी हुई है. यह राज्य अभी हाल में हो रही आत्महत्याओं के कारण इन चार राज्यों की सूची में शामिल हुआ हैं.&lt;br /&gt;किसानों की आत्महत्या पर चेन्नै के प्रोफेसर के. नागराज की रिपोर्ट के अनुसार जिन राज्यों में किसानों ने जहाँ पारंपरिक फसल उगाने की बजाय जहाँ नकदी फसल उगाना शुरू किया ,वही आत्महत्याओं की संख्या में बढोत्तरी देखी गयी. एक हद तक यह बात सही हो सकती है,लेकिन नकदी फसल उगाने के पीछे ज्यादा धन ही कमाना होता हैं.नकदी फसल के उत्पादन में काफी खर्च होने के कारण किसान बैंक और बाजार से कर्ज तो ले लेते है लेकिन चुकाने की स्थिति में ना होने के कारण आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं.उनके पास खाने के लिये अनाज भी नही होता है.&lt;br /&gt;नकदी फसल के उत्पादन के बाद भी फसल की सही कीमत नहीं मिल पाती हैं.अगर बी.टी. कॉटन की बात करे तो अमेरिका इस पर जितनी सब्सिडी देता है,उतनी कीमत पर अपने किसान अगर बेचे तो उनका उत्पादन-मूल्य भी नही निकल पाता हैं. ऐसे प्रतिस्पर्धी बाजार में ऐसी समस्या आती ही रह्ती हैं.&lt;br /&gt;किसानों के द्वारा ज्यादा से ज्यादा कमाने की चाह उन्हें कही का नही छोडती हैं.नकदी फसल का उत्पादन मूल्य बढता ही जा रहा हैं जिस कारण इससे होने वाले फायदे में भी कमी आती जा रही हैं.फिर कभी कभी फसल भी खराब होने की स्थिति में उनके सामने कर्ज चुकाने की समस्या आ जाती हैं,ऐसे में उन्हें आत्महत्या करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नज़र नही आता हैं.सरकार भी समय समय पर कर्ज देती है,लेकिन एक बार से ज्यादा बार लेने के बाद भी अगर हर बार डीफॉल्टर होने की स्थिति में सरकार से भी मदद मिलना बंद हो जाता हैं.&lt;br /&gt;देश में हर ३२ मिनट पर एक किसान आत्महत्या करता हैं,ऐसी स्थिति में सरकार द्वारा सिर्फ राहत देने से काम नहीं चलेगा. सरकार को ऐसी नीति लानी होगी जिससे कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ कहे जाने वाले कृषि क्षेत्र से किसानों का पलायन कम हो और ज्यादा से ज्यादा कृषि-उत्पाद हो ताकि हमें दूसरे देश पर कम से कम अनाजों के लिये निर्भर ना होना पडे.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-309263014371125181?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/309263014371125181/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=309263014371125181' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/309263014371125181'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/309263014371125181'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2007/11/blog-post_20.html' title='किसानों की आत्महत्या ऑकडों में'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-1698168399773901250</id><published>2007-11-17T03:53:00.000-08:00</published><updated>2010-01-15T09:23:32.919-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Environment'/><title type='text'>कालिंदी इतनी काली क्यों?</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;छठ पर्व के अवसर पर आज सुबह यमुना नदी के किनारे भगवान सूर्य को अर्घ्य देने का मौका मिला. नदी किनारे श्रधालुछओं की भीड देखकर लगा ही नही कि यह पर्व बिहार के बाहर भी इतने उल्लास व भक्ति के साथ मनाया जाता है.सभी सुबह में आदित्य की उगने की प्रतीक्षा कर रहे थे ,ज्योंहि पूर्व के आसमान पर हल्की लालिमा के बीच भगवान भास्कर उदित हुए,वैसे ही यमुना में उतर कर अर्घ्य दिया. यमुना का पानी देख एकबार तो पानी में उतरने का मन नही हुआ.&lt;br /&gt;यमुना नदी को प्रदूषणमुक्त करने के लिये सरकार ने १९९३ से यमुना एक्शन प्लान चलाया था,लेकिन अभी तक १८०० करोड रूपये खर्च करने के बाद भी स्थिति ज्यों की त्यों है.सरकार को इस दिशा में विदेशी सहायता भी मिली,लेकिन ठीक रूप से कार्यान्वयन नही होने के कारण इतने पैसे यमुना के नाम पर अधिकारियों और अन्य लोगों की जेबों में चले गये.&lt;br /&gt;लंदन में भी टेम्स नदी की स्थिति यमुना नदी के ही माफिक हो गयी थी,लेकिन एक उचित कार्य योजना के तहत उसे पूरी तरिके से प्रदूषण मुक्त कर लिया गया. २०१० में दिल्ली में होने वाले कॉमनवेल्थ खेलों को भी देखते हुए इसे जल्द से जल्द प्रदूषण मुक्त करने के उपाय करने चाहिये.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-1698168399773901250?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/1698168399773901250/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=1698168399773901250' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/1698168399773901250'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/1698168399773901250'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2007/11/blog-post_17.html' title='कालिंदी इतनी काली क्यों?'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-4845179744577791885</id><published>2007-11-16T02:56:00.001-08:00</published><updated>2010-01-15T09:26:42.257-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Social Issue'/><title type='text'>क्या आत्महत्या ही करना है उपाय?</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;किसानों की आत्महत्या के बाद आंध्र प्रदेश से वैसे श्रमिकों की आत्महत्या की खबर आ रही है जो कर्ज लेकर कमाने के लिये खाडी देशों में चले जाते हैं,लेकिन लौटने पर कर्ज ना चुकाने कि स्थिति में आत्महत्या करने को मजबूर होते हैं.इस साल ऐसे पचास मामले दर्ज किये गये हैं. आंध्र प्रदेश सरकार पहले से ही किसानों की आत्महत्या की समस्या से परेशान है,अब यह एक नयी समस्या उनके सामने आ रही हैं.&lt;br /&gt;खाडी देशों की चमक-दमक देखकर वहाँ जाकर काम करने वालों की संख्या पिछले कुछ सालों में काफी तेज गति से बढी हैं.२००५ में भारत से विदेशों में साढे पाँच लाख श्रमिक गये थे वहीं २००६ में यह संख्या बढकर सात लाख हो गयी. प्रत्येक साल एक लाख श्रमिक वापस लौटते हैं.वापस लौटने के बाद जब इनके सामने कर्ज चुकाने की समस्या आती है तो ऐसी स्थिति में ये महजनों से बचते बचते एक शहर से दूसरे शहर भागते फिरते नज़र आते हैं.&lt;br /&gt;बेरोजगारी के कारण और ज्यादा से ज्यादा कमाने की ललक में कामगार विदेश में काम के लिये भेजने वाले दलालों के झाँसे में आ जाते है और विजटर वीजा पर ही कमाने के लिये चले जाते हैं. दलाल ही इन सबका इंतजाम करते है ,वे इन श्रमिकों को अकूत पैसा कमाने का सब्ज-बाग दिखाते है और अपनी दलाली का पैसा बनाते हैं.लेकिन सब किस्मत के धनी नही होते है,ज्यादतर को छ्ह महीने से एक साल के भीतर ही लौटना पडता है.ऐसे में वे अपने लिये कुछ पैसा बना नही पाते है और लौटन पर तरह तरह की समस्या का सामना करना पडता है.&lt;br /&gt;सरकार भी इसके लिये कम दोषी नही है.पहले तो वह अपने देश में ही रोजगार पैदा नही कर पा रही है और दूसरा अवैधानिक तरीके से होने वाले अप्रवास पर नजर नही रखती है. ऐसे में इन लौटने वाले कामगारों के लिये सहायता का प्रावधान करने का सोचती है.पहले से ही अगर रोजगार के अवसर पैदा कर दे तो इस तरह की समस्या का सामना नही करना पडेगा.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-4845179744577791885?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/4845179744577791885/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=4845179744577791885' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/4845179744577791885'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/4845179744577791885'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2007/11/blog-post_1920.html' title='क्या आत्महत्या ही करना है उपाय?'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-4189919096171531809</id><published>2007-11-16T01:42:00.000-08:00</published><updated>2010-01-15T09:21:41.837-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Sports'/><title type='text'>तेंदुलकर नही ,(१००-टेन)ढुलकर</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;ग्वालियर का रूप सिंह स्टेडियम उस वक्त शान्त हो गया जब सभी दर्शक सैकडो के बादशाह सचिन तेंदुलकर के ४२वें एक दिवसीय शतक का इंतजार कर रहे थे, जब वो ऑफ-स्टंप के बाहर की गेंद को बिना पैर हिलाए खेल बैठे और अपना विकेट गंवा बैठे. जी हाँ ,तेंदुलकर के ४२वें शतक का इस साल दर्शकों ने छठी बार इन्तज़ार किया,लेकिन यह साल बिना शतक के बीता.&lt;br /&gt;अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अठारह साल पुरे होने पर अब तक तेंदुलकर ने टेस्ट में ३७ शतक और एक-दिवसीय मैचों में ४१ शतक बना रख्र हैं. अगर तेन्दुलकर के नब्बे से निन्यानवे रनों के बीच आउट होने की बात करे तो अब तक वे टेस्ट में सात बार और एक-दिवसीय मैचों में सोलह बार 'नर्वस-नाइनटीज' के शिकार हुए है.अगर ये इन शतकों को नही चुके होते, तो अभी इनके नाम "सैकडों के सैकडें" का अनूठा रिकार्ड होता.&lt;br /&gt;क्रिकेट की दुनिया में तेंदुलकर रिकार्डों के लिये जाने जायेंगे. दर्शकों को पहले शिकायत रह्ती थी कि तेंदुलकर सिर्फ अपने शतकों के लिए खेलत हैं,आज वही दर्शक उनके बल्ले से एक शतक का इंतजार कर रहे है.तेंदुलकर का नब्बे व निन्यानवें के बीच में आउट होना भी एक रिकार्ड ही तो बन रहा हैं.कम से कम इस रिकार्ड को तो तोड्ने की कोशिश कोइ भी खिलाडी नही करना चाहेगा.&lt;br /&gt;मैच के दौरान जब तेंदुलकर नब्बे रन का ऑकडा छुए,तब से दर्शक-दीर्घा में एक प्ले-कार्ड पर ९९+१ रन लिखा दिखाया जा रहा था,लेकिन तेंदुलकर उस दर्शक की इच्छा इस साल पुरा नही कर सके.सेहवाग भी इसी दौरान आउट हुए,लगा कि तेंदुलकर पर मँडराता हुआ ग्रह टूट गया. लेकिन ड्रिन्क-ब्रेक ने सारा मजा किडकिडा कर दिया.मैदान पर लगे बडे टी.वी. स्क्रीन पर बडे अक्षर में "तेंदुलकर ९७ नॉट आउट" नजर आ रहा था,लेकिन क्य मालूम था कि यह उनका इस मैच का फाइनल स्कोर होगा.अगला वन-डे सचिन शायद ही खेले,इस साल तो कुल छ्ह बार वे शतक से चुके.&lt;br /&gt;मानो या ना मानो, अब तेंदुलकर के वे आलोचक कहाँ चले गये जो उन्हे सिर्फ अपने शतक के लिये ही खेलने वाला खिलाडी मानते थे.मैच के प्रेजेंटेशन के दौरान वे भले मैच को जितना अहम मान रहे थे लेकिन शतक ना बना पाने का मलाल उनके चेहरे पर साफ साफ झलक रह था.मैदान का भी खामोश हो जान इस बात का गवाह है कि उनके इस दुख में हम भारतीय भी शामिल थे.&lt;br /&gt;अगले साल वह अपने शतकों मे १९९८ की तरह इजाफा करेंगे,जब उन्होंने एक साल में ९ शतक लगाये थे और अपने एक-दिवसीय शतको का अर्ध-शतक बनायेंगे.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-4189919096171531809?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/4189919096171531809/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=4189919096171531809' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/4189919096171531809'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/4189919096171531809'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2007/11/blog-post_16.html' title='तेंदुलकर नही ,(१००-टेन)ढुलकर'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-6842996618276457161</id><published>2007-11-15T03:48:00.001-08:00</published><updated>2010-01-15T09:20:46.284-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Religion'/><title type='text'>स्वास्तिक या क्रॉस : दोनो तो ही हैं धर्म के निशान</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की डॉक्टरी पेशे की इकाई आरोग्य भारती ने जब से अपने सदस्यों को 'रेड क्रॉस' की जगह 'स्वास्तिक' का निशान उपयोग करने को कहा है,तब से यह मुद्दा मीडिया में एक बहस का मुद्दा बन गया है.सबसे पहले 'रेड क्रॉस'ने अपने निशान के उपयोग पर पाबंदी लगा दी थी,तब से इंडियन मेडिकल एशोसिएशन ने एक नये निशान को स्वीकृत किया था,जो कि आम जन को समझ में नही आ सका,इसलिये उसका कम से कम उपयोग हो रहा हैं,ऐसे मे एक ऐसे निशान की खोज की जा रही थी जो की पिछले निशान से मिलता-जुलता हो और जिसे लोग आसानी से पहचान लें.&lt;br /&gt;भोपाल में इस निशान का उपयोग वहाँ के डॉक्टरों ने करना शुरू कर दिया हैं. इस रविवार से नागपुर में भी एक बडे पैमाने पर नेशनल मेडिकल ऑरगनाइजेशन,विश्व आयुर्वेद परिषद, आयुर्वेद व्यास पीठ और होम्यो समाज नाम की संस्थायें भी अपने डॉक्टरों के बीच 'स्वास्तिक' के स्टिकर बाँट रही हैं.&lt;br /&gt;इसका समर्थन करने वालों का तर्क यह है कि स्वस्तिक भारतीय संस्कृति से जुडा है और हम रेड क्रॉस के खिलाफ नही है. साथ ही यह भी तर्क दे रहे है कि हमने हिटलर के नाजी पार्टी के निशान से यह नही मिले ,इसलिये इसमे चार बिंदुओं का भी उपयोग कर रहे है. वैसे भी वैज्ञानिक तौर पर स्वास्तिक के निशान से सर्वाधिक ऊर्जा निकलती है.&lt;br /&gt;इस नये निशान को लेकर सभी सहमत है ऐसा भी नही है. सबसे पहले इसे हिन्दू धर्म का निशान मानकर खारिज कर रहे है.रेड क्रॉस, जो इतने दिनों से डॉक्टरी पेशे का निशान बनी हुई है,के हटने से डॉक्टर अपनी पहचान खो देंगे-ऐसे तर्क दे रहे है.भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में ऐसे ही किसी निशान को एक ऐसे पेशे से जोर दिया जाये जिससे मानवता जुडी है.&lt;br /&gt;सबसे पहली बात तो यह कि भारत में विभिन्न धर्मों के मानने वाले लोग रहते है जिस कारण इसे लागू करना इतना आसान नही होगा. अगर कुछ लोग अपनी सुविधा के लिये किसी निशान को उपयोग में ला रहे है तो इस पर किसी को आपत्ति नही होनी चाहिए. "रेड क्रॉस संस्था" ने जब अपने निशान के उपयोग के सर्वत्र उपयोग के विरोध में कोर्ट में भी गयी है,तो ऐसी स्थिति में इंडियन मेडिकल एसोशिएशन को चाहिये की वह एक ऐसा निशान लाये जो पूरे भारत में मान्य हो और आसानी से भी पहचान में आये.जहाँ तक इस रेड क्रॉस के उपयोग का सवाल है मुस्लिम राष्ट्रों में इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता हैं, वे अर्द्धचन्द्र निशान का उपयोग करते हैं.&lt;br /&gt;इस मुद्दे को इतना बडा मुद्दा नही बनाना चाहिये,जो निशान ज्यादा से ज्यादा लोगों के समझ में आता हैं,उसे उपयोग में लाना चाहिये.&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-6842996618276457161?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/6842996618276457161/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=6842996618276457161' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/6842996618276457161'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/6842996618276457161'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2007/11/blog-post_15.html' title='स्वास्तिक या क्रॉस : दोनो तो ही हैं धर्म के निशान'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-2350521790378342711</id><published>2007-11-14T04:06:00.000-08:00</published><updated>2010-01-15T09:19:51.509-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Sports'/><title type='text'>हल्की गुलाबी गेंद</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;रेड चेरी, व्हाइट और अब ब्राइट पिंक. जी हाँ,अब क्रिकेट की गेंद भी समय के साथ अपना रंग बदल रही हैं. अब आप कुछ ही सालों में सफेद गेंद की जगह क्रिकेट में ब्राइट पिंक यानि हल्की गुलाबी गेंद देखने को मिलेगी. अभी इंग्लैंड में एम.सी.सी. इस नयी गेंद के रंग के ज्यादा देर तक टिकने का परीक्षण कर रही हैं. अभी वर्त्तमान में प्रचलित सफेद गेंद का रंग काफी जल्दी उतर जाता है. साथ ही यह मटमैली भी ज्यादा जल्दी हो जाती है.&lt;br /&gt;प्रयोग के तौर पर २००९ में होने वाले ट्वेंटी-२० विश्व कप में इसका पहली बार प्रयोग किया जायेगा.गुलाबी गेंद का रंग काफी देर के बाद जाता हैं.इसलिये इस गेंद पर शुरूआती दौर के परीक्षण एम.सी.सी.,लंदन के द्वारा इमपीरियल कॉलेज में किये जा रहे है.&lt;br /&gt;एम. सी. सी. के जॉन स्टीफेंसन ने इसे पहली बार मीडिया के सामने रखा.लेकिन यह गेंद टेस्ट मैचों में प्रयोग नही लायी जायेगी. टेस्ट मैच में रेड चेरी गेंद ही प्रयोग में लायी जायेगी.जहाँ तक वन-डे मैचों का सवाल है ,अगर यह गेंद ट्वेंटी-२० में अपना रंग जमाने में कामयाब रहेगी तो ही इसे वन-डे में उपयोग में लाया जायेगा.&lt;br /&gt;सफेद गेंद के चलते वन-डे में अभी हाल में ३४ ओवर के बाद बदलने का नियम लाया गया है,इसमे हो सके तो भविष्य में बदलाव आये, तब तक गुलाबी गेंद के आने का इंतजार कीजिए&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2362022908546148824-2350521790378342711?l=nisshabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://nisshabd.blogspot.com/feeds/2350521790378342711/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2362022908546148824&amp;postID=2350521790378342711' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/2350521790378342711'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2362022908546148824/posts/default/2350521790378342711'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://nisshabd.blogspot.com/2007/11/blog-post_8707.html' title='हल्की गुलाबी गेंद'/><author><name>नितेश कुमार</name><uri>http://www.blogger.com/profile/11789365344216916151</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/-USAYAeWVlPE/TwdjYuqE_ZI/AAAAAAAAD5A/-cHC4vCAGsE/s220/DSC00797.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2362022908546148824.post-2678574516216995310</id><published>2007-11-14T01:33:00.000-08:00</published><updated>2010-01-15T09:18:54.150-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Wildlife'/><title type='text'>राष्ट्रीय पशु की जान खतरे में</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;वन्य-जीवों का संरक्षण पर्यावरण के लिये निहायत ही जरूरी हैं, इसके लिये सरकार जहाँ तरह तरह के उपाय करती है वहीं हाल में महाराष्ट्र के वन्य विभाग के अधिकारी का तडोबा अभ्यारण्य के आस पास बाघों को देखते ही गोली मार देने के आदेश ने इस विलुप्त होते हुए जीव को फिर से संकट में डालने का काम किया हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;महाराष्ट्र में पडने वाले एक इलाके तडोबा मे बाघों की प्रजाति पायी जाती है. तडोबा से लेकर ब्रह्मपुरी त
