शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

महिला आरक्षण तो मुुद्दा ही नहीं था...

 

लोकसभा में महिला आरक्षण संबंधी विधेयक का गिरना सरकार को पहले से पता था। 2023 में महिला आरक्षण विधेयक को व्यापक समर्थन मिला। इस बार सरकार द्वारा इसे परिसीमन से जोड़ने की रणनीति ने पूरे विधेयक को विवादास्पद बना दिया और अंततः उसकी विफलता का कारण बनी।


पहला प्रमुख बिंदु यह है कि सरकार को पहले से अंदाजा था कि यह विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाएगा। विपक्षी दलों ने महिलाओं के आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से जोड़ने का विरोध किया, क्योंकि इससे राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ने की आशंका थी। लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन के प्रस्ताव से दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक प्रासंगिकता कम हो सकती थी, जबकि जनसंख्या वृद्धि वाले उत्तरी राज्यों को अधिक लाभ मिलता। इस असमानता को दूर करने के लिए दिए गए आश्वासन भी स्पष्ट और ठोस नहीं थे।


दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि विधेयक के प्रावधानों के पीछे ठोस तर्कों की कमी दिखी। गृह मंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन जैसे सभी राज्यों के लिए समान अनुपात में सीट वृद्धि कानूनी रूप से विधेयक का हिस्सा नहीं थे। इससे यह संदेह पैदा हुआ कि वास्तविक उद्देश्य महिलाओं का सशक्तिकरण नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ हासिल करना था। विपक्ष ने यह सवाल उठाया कि यदि समान अनुपात में वृद्धि ही मकसद था, तो उसे विधेयक में स्पष्ट रूप से शामिल क्यों नहीं किया गया।


तीसरा बिंदु संघीय ढांचे पर संभावित प्रभाव का है। परिसीमन के जरिए सीटों का पुनर्वितरण उन राज्यों को लाभ पहुंचा सकता था, जहां जनसंख्या अधिक तेजी से बढ़ी है, जबकि विकास और जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को नुकसान होता। इससे भारत के संघीय संतुलन और लोकतांत्रिक संरचना पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता था। पूर्ण संख्या में सीटों की ताकत अधिक मायने रखती है, प्रतिशत नहीं।


चौथा पहलू विधायी प्रक्रिया की आलोचना से जुड़ा है। सरकार पर आरोप लगा कि उसने जल्दबाजी में और बिना पर्याप्त सहमति बनाए संवैधानिक संशोधन लाने की कोशिश की। संसद के विशेष सत्र में इसे पेश करना और चुनावों के ठीक पहले इसे आगे बढ़ाना, एक राजनीतिक कदम के रूप में देखा गया। इससे विपक्ष का अविश्वास और बढ़ा और अंततः विधेयक को समर्थन नहीं मिला।


पांचवां महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि महिलाओं के आरक्षण के विचार को व्यापक समर्थन प्राप्त है, लेकिन इसे लागू करने का तरीका विवाद का कारण बना। 2023 में पारित मूल अधिनियम को सर्वसम्मति का समर्थन मिला था, लेकिन उसे परिसीमन से जोड़ने के फैसले ने सहमति को तोड़ दिया। इस तरह के महत्वपूर्ण सुधार के लिए व्यापक राजनीतिक सहमति और पारदर्शिता आवश्यक है।


 महिलाओं का आरक्षण एक आवश्यक और स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन इसे लागू करने के लिए सही प्रक्रिया, स्पष्टता और संघीय संतुलन का ध्यान रखना अनिवार्य है। इस विफलता को एक चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए कि बड़े संवैधानिक बदलाव बिना व्यापक सहमति के नहीं किए जा सकते।

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