( 2006 में लिखा गया आलेख जब पत्रकारिता का कोर्स जारी था)
'विशेष औद्योगिक क्षेत्र' ऐसे औद्योगिक क्षेत्रों को कहा जाता है तो निवेशकों को आकर्षित करने के लिए उदार आर्थिक नीतियों और उत्तम ढांचागत सुविधाओं से संपन्न होते है। यह क्षेत्र आमतौर पर नियातोन्मुखी होते हैं और जिनमें देश के लिए विदेशी मुद्रा अर्जित करने के लिए खास क्षमता होती है। सरकार द्वारा निर्धारित करों में कई प्रकार की छूट दी जाती है और आवश्यकतानुसार श्रम कानूनों में भी ढील दी जाती है। चीन के विशेष आर्थिक क्षेत्रों से प्रेरणा लेकर, 1 अप्रैल 2000 से प्रभावी एग्जिम नीति में 'विशेष आर्थिक क्षेत्र' योजना लागू की गई। सरकार ने पूर्व के सभी 8 निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्रों- कांडला और सूरत (गुजरात) सांताक्रूज (महाराष्ट्र), कोच्चि (केरल), चेन्नई (तमिलनाडु) नोएडा (उतर प्रदेश) फाल्टा (प. बंगाल) और विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) को सेज में परिवर्तित कर दिया। 23 जून 2005 को संसद ने 'विशेष आर्थिक क्षेत्र' को विधेयक पारित कर कानून बना दिया तथा 10 फरवरी 2006 से विशेष आर्थिक जोन अधिनियम लागू किया गया। इस अधिनियम के तहत SEZ में स्थापित इकाईयों के लिए एकल खिड़की से सभी प्रकार की स्वीकृति प्राप्त हो सकेगी। साथ ही, इन इकाइयों को विभिन्न प्रकार की छूटे प्रदान की गई है तथा ऑफशोर बैंकिंग इकाइयों की स्थापना का प्रावधान भी किया गया है। इस अधिनियम के अन्तर्गत जारी नियमावली के अनुसार यथासंभव अनुपजाऊ और बंजर भूमि का उपयोग करते हुए कम से कम 10 हेक्टेयर (24 एकड़) पर सॉफ्टवेयर तथा बायोटेक्नोलॉजी जैसे छोटे व्यवसायों को तथा अधिकतम 1000 हेक्टेयर भूमि पर बहुउत्पाद उद्योगों और व्यावसायों को आवासीय क्षेत्र, अस्पताल, शॉपिंग सेंटर तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था के साथ भी सम्मिलित एक या कई उद्यमियों द्वारा समिालित रूप से विकसित किए जाने के प्रावधान रखे गये है। इस अधिनियम के अन्तर्गत किसी भी निजी, सार्वजनिक तथा संयुक्त क्षेत्र द्वारा SEZ की स्थापना की जा सकती है। विदेशी कंपनियों को भी SEZ स्थापित करने की छूट है। इस हेतु इन्हें 100 प्रतिशत तक FDI की छूट दी गई है। वाणिज्य मंत्री के अनुसार आगामी तीन वर्षों (2016-09) के दौरान 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश इन क्षेत्रो से अपेक्षित है, जिससे रोजगार के 5 लाख अवसर सृजित हो सकेंगे। सितम्बर 2006 तक सरकार ने कुल मिलाकर 267 SEZ को स्वीकृति दी जिनमें से 130 को औपचारिक तथा 117 को सैद्धांतिक तौर पर स्वीकृति दी गयी है। इनको स्थापित करने से पहले सरकार, स्थापन कर्ता तथा भूमिवासी के बीच एक समझ कायम होना ही इसको एक मजबूत आधार देता है।
