बुधवार, 11 मार्च 2026

कोई भी पीछे न छूटा... मानवता की रक्षा का मोदी मंत्र

 

OPENING

 

नमस्कार,

हमारे इस ख़ास कार्यक्रम कोई भी पीछे न छूटा... मानवता की रक्षा का मोदी मंत्र' में आपका स्वागत है जिसमें हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासनकाल में विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षित निकासी के बड़े अभियानों को आपके सामने लेकर आए हैं जो भारतीय समाचार चैनल पर एक बड़ी पहल है।

 

किसी भी देश के लिए, प्रत्येक नागरिक का जीवन अनमोल होता है और भारत अपनी विदेश नीति के तहत अपने प्रवासियों और प्रवासी भारतीयों के कल्याण को विशेष महत्व देता है। दुनिया के करीब 208 देशों में आधिकारिक तौर पर 1 करोड़ 40 लाख प्रवासी भारतीय रहते हैं और लगभग 1 करोड़ 80 लाख ऐसे भारतीय है जो कि विदेशी नागरिकता ले चुके हैं और कई ऐसे भारतीय नागरिक होते हैं जो विदेशों में पर्यटन या यात्रा कर रहे होते हैं। ऐसे में दुनिया में होने वाला कोई भी संघर्ष या आपदा ऐसी नहीं है जिससे कि कोई भारतीय अछूता न रह सके।

 

भारतीय टेलीविजन पर पहली बार, हम आपके लिए सबसे कठिन परिस्थितियों में किए गए विदेशों से सुरक्षित निकासी अभियानों की कहानियां आपके सामने ला रहे हैं। इसमें इराक से लेकर यमन तक, लीबिया से लेकर काबुल और हाल में यूक्रेन से किए गए निकासी अभियान में भारत ने अपना लोहा पूरे विश्व में मनवाया। इस दौरान दूसरे देशों के साथ भारत के संबंध और कूटनीति की ताकत की परख हुई और साथ ही दशकों से हर भारतीय को सुरक्षित घर लाने का भारत का वादा- देश की तेजी से बढ़ते हुए सॉफ्ट पावर को दिखाता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने हमेशा किसी को पीछे न छोड़ने के वादे को बेहतरीन रूप से निभाया

 

BRIDGE 1:

विदेशों में फंसे हुए नागरिकों की निकासी को अंजाम देना काफी मुश्किल काम है। संघर्ष के दौरान बदलती हुई परिस्थितियों में सरकार के लिए निकासी का खाका तैयार करना इतना भी आसान नहीं होता है। घरेलू मोर्चे पर फंसे हुए लोगों के परिजनों का दवाब स्थिति को और जटिल बना देता है। संकटग्रस्त देश के पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध नहीं होने की स्थिति में निकासी का काम और मुश्किल हो जाता है जैसा कि अफ़ग़ानिस्तान,लीबिया, यमन और इराक के मामले में हुआ। इन मामलों में राजनयिक स्तर पर वार्ता सबसे अहम भूमिका निभाती है।

 

 

 

Bridge 2:

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में भारत उन देशों में से एक रहा है जो अपने फंसे नागरिकों की सुरक्षित निकासी में काफी सफल रहा जो कि विदेश नीति में बड़े बदलाव को दिखाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी धरती पर आए बंधक या मानवीय संकट से निपटने में निर्णायक सफलता पाई है। साल 2014 के इराक के तिकरित बंधक स्थिति की बात करें या 2016 के यमन-सऊदी युद्ध या काबुल से भारतीयों को निकालने की बात करे या संघर्षग्रस्त यूक्रेन से भारतीयों को वापस लाना हो... मोदी सरकार ने स्वतंत्र और व्यवाहरिक विदेश नीति की बदौलत अपने नागरिकों की रक्षा की है। साथ ही अपनी नीति से साफ किया कि विदेशी भूमि में रहने वाले भारतीय नागरिकों को उनके किस्मत के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है।

 

 

 

 

OPENING ---SAKAL DISSOLVES IN FIRST VISUAL – SEGMENT 1

 

संकट के बीच स्वदेश आया हर भारतीय

 

TOP HEADER (FLIPPING ):

 

पीएम मोदी के शासन में महत्वपूर्ण निकासी अभियान

 

 

Segment 1:

(TYPEWRITER EFFECT)

12 जून 2014- इराक युद्ध

 

आईएसआईएस के चंगुल में फंसी भारतीय नर्सें

ISIS ONSLAUGHT- INDIAN NURSES TRAPPED

 

VO 1-

12 जून 2014 ... संघर्षग्रस्त इराक से परेशान करने वाली खबर सामने आई। इस्लामिक स्टेट तेजी से नए इलाकों पर अपना कब्जा जमा रहा था - इसी क्रम में आईएसआईएस ने तिकरित में घुसपैठ की ... आईएसआईएस और इराकी सेना के बीच गृहयुद्ध तेज हो गया।

(AMBIENCE)

तिकरित के अस्पताल में काम कर रही भारतीय नर्सें ISIS के हमले की जद में आ गई। ग्रेनेड हमले और उसके बाद गोलियों की गड़गड़ाहट के बीच भारतीय और इराकी नर्सें फंस गई। अस्पताल के अन्य कर्मचारियों के साथ 46 भारतीय नर्सें संकट की स्थिति में आ गई। इस बुरी खबर ने उनके परिजनों और भारत सरकार को चिंता में डाल दिया।

 

BYTE- NURSE CASE STUDY

 

VO2 -(TYPE WRITER )

15 जून 2014

 

ये साफ हो चुका था कि आईएसआईएस ने अस्पताल की निचली मंजिल पर कब्जा कर लिया था। अस्पताल में लगातार गोलीबारी के बीच मरीजों समेत अन्य लोग दूसरी मंजिल पर जमा हो गए। इस घटना ने नर्सों में डर का माहौल बना दिया। नर्सें हमला और हत्या के डर से गुजर रही थी। ये महिलाओं के खिलाफ उनके अत्याचार को दर्शा रहा था।

 

-BYTE - (INTERVENTION OF THE MEA / EMBASSY )// first response Indian govt

 

 

VO 3-

इराक में इन सब घटनाक्रम के बीच भारतीय दूतावास बगदाद में नर्सों की सुरक्षित स्वदेश वापसी को लेकर पूरी दृढ़ता से कदम बढ़ा रहा था। इराक में बिगड़ते हालातों के बीच नर्सों को सकुशल वापस लाने का श्रेय पीएम मोदी के नेतृत्व को दिया गया । जिन्होंने शपथ लेने के कुछ ही हफ्तों के बाद नई कैबिनेट के साथ साहस और धैर्य का परिचय देते हुए निर्णायक भूमिका निभाई ।

 

(BYTE had just taken over )

 

Vo 4-

नर्सों की सुरक्षित स्वदेश वापसी के लिए विदेश मंत्रालय ने उस समय सऊदी अरब और इराक सहित सभी प्रमुख देशों के साथ लगातार संपर्क में था। ये भी माना जाता है कि बचाव के लिए भारत ने गैर राजनयिक संपर्कों, ISIS के संपर्क वाले लोगों और इराक के अन्य छोटे-छोटे समूहों के साथ संपर्क साधा। विदेश मंत्रालय ने बाद में उन वार्ताकारों की पहचान बताने से इनकार कर दिया जिन्होंने नर्सों की रिहाई के लिए बातचीत की थी।

 

BYTE-SENSITIVITY OF MISSION

 

VO 5-

23 दिनों के दर्दनाक अनुभव के बाद नर्सें आखिरकार 5 जुलाई को विशेष विमान के जरिए नर्सों की सुरक्षित स्वदेश वापसी हुई। सरकार के इन प्रयासों से परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई।

 

BYTE VOX POP

GFX ALPHA: HEADER - बंधक भारतीय नर्सें और आईएसआईएस जिहादी

 

Segment 2:

(TYPEWRITER EFFECT)

मार्च 2015- ऑपरेशन राहत यमन संकट

 

SLUG- हमलों से दहला यमन

 

 

 

VO 1-

साल 2015 का मार्च महीना जब वसंत के मौसम से गुलजार था, तब यमन धमाकों से गूंज उठा। सउदी अरब की वायुसेना के नेतृत्व में अरब राज्यों ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। इससे पहले हूती गुरिल्ला विद्रोहियों ने राष्ट्रपति आबिद रब्बो मंसूर हादी की सरकार को गिरा दिया गया और यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। (AMBIENCE) हूती विद्रोहियों और यमन की सरकार के बीच छिड़ी जंग में कई भारतीय यमन में फंस गए। भारत सरकार ने बिना समय गंवाए ऑपरेशन राहत की शुरुआत की।

 

 

 

BYTE

 

 

VO 2-

दोनों पक्षों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत पहला ऐसा देश था जिसने कदम बढ़ाया। यमन में भारत के बचाव अभियान को ऑपरेशन राहत का नाम दिया गया। जिस पर पूरी दुनिया की नजर गई।

 

Byte-

 

 

VO 3-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी और निकासी प्रयासों के लिए व्यक्तिगत रूप से सऊदी अरब के सुल्तान सलमान से बातचीत की। प्रधानमंत्री कार्यालय स्थिति पर पूरी तरह से नजर बनाए हुआ था और विदेश, रक्षा, नौवहन मंत्रालयों, भारतीय रेल, नौसेना और भारतीय वायुसेना के बीच आपसी सहयोग पर भी नजर रखे हुए था। भारतत सरकार ने बचाव अभियान की निगरानी के लिए तत्कालीन प्रवासी भारतीय कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री जनरल वी. के. सिंह को निकट के पोत शहर जिबूती भेजा ।

 

 

BYTE (MODI GOVTS INTENT)

 

 

VO 4-

भारत संकट में घिरे विदेशी नागरिकों को बचाकर देवदूत बनकर उभरा। बहरीन, बांग्लादेश, कनाडा, क्यूबा, ​​चेक गणराज्य, मिस्र, फ्रांस, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान, रोमानिया, श्रीलंका, स्लोवेनिया, सीरिया और युगांडा के नागरिकों को बाहर निकालने में मदद की। 9 अप्रैल तक विमानों के जरिए और 11 अप्रैल 2015 तक समुद्र के जरिए सुरक्षित निकासी का काम चला। खबरों के मुताबिक 6 अप्रैल तक कम से कम 23 देश यमन से अपने नागरिकों को निकालने के लिए भारत से मदद की गुहार कर चुके थे।

 

SEGMENT 3:

(TYPEWRITER EFFECT)

11:56 नेपाली मानक समय  अप्रैल 2015-

ऑपरेशन मैत्री (2015)

नेपाल में भूंकप

VO1 -

नेपाल में 25 अप्रैल 2015 को भूकंप का जोरदार झटका महसूस किया गया था। 7.8 से 8.1 की तीव्रता वाले भूकंप में 8 हजार 964 लोगों की मौत हो गई, वहीं 21 हजार 952 लोग घायल हो गए थे। भूकंप के कारण माउंट एवरेस्ट में आए हिमस्खलन से 22 लोगों की मौत हो गई। लंगतांग घाटी में आए दूसरे बड़े हिमस्खलन के कारण 250 लोग लापता हो गए थे। कई जिलों में गांव के गांव तबाह हो गए और लाखों लोग बेघर हो गए।

 

 

(EARTHQUAKE MAYHEM / DESTRUCTION SHOTS)

 

VO 2-

भूकंप आने के 15 मिनट के भीतर ही भारत ने राहत के लिए कदम बढ़ाया। भारत ने नेपाल में भूकंप पीड़ितों के बचाव और राहत के लिए बड़े पैमाने पर ऑपरेशन मैत्री की शुरूआत की। (MAP) प्रभावित इलाकों में  हेलीकॉप्टर भेजने के लिए काठमांडू और पोखरा को आधार शिविर बनाया गया।

 

-Byte first respondents

 

VO 3-

 

भारतीय सेना ने 5 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला । नेपाल में फँसे 700 विदेशी सैलानियों को ट्रांजिट वीज़ा दिया गया। भारतीय सेना ने अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और जर्मनी के नागरिकों को निकालने में मदद की ।

 

Byte

 

 

VO 4-

नेपाल के पुनर्निर्माण कार्यों में मदद के अलावा भारत ने नेपाल के दुर्गम इलाकों में 24 टन राहत सामग्री पहुंचाने में मदद की ।

 

 

- BYTE assistance

 

ALPHA GFX

 

 

SEGMENT 4:

(TYPEWRITER EFFECT)

22 मार्च 2016

ब्रसेल्स में आत्मघाती धमाका

3 आत्मघाती बम धमाकों से दहला ब्रसेल्स

Slug - जैवनटेम हवाई अड्डा, स्थानीय समय- प्रातः 07:58 (06:58 GMT)

 

 

VO 1-

22 मार्च, 2016 की सुबह बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्‍स बम धमाकों से दहल उठी । ब्रसेल्‍स के जैवनटेम हवाई अड्डे में दो बम धमाके हुए और इसके बाद एक धमाका  मध्य ब्रसेल्स के मेट्रो स्टेशन पर हुआ । 32 नागरिक मारे गए और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए। साथ ही तीन हमलावर धमाकों में मारे गए ।

 

 

Byte-

भारत ने अपने नागरिकों को निकालने के लिए कदम उठाया

 

VO2-

आतंकी हमलों के बाद अपने नागरिकों को निकालने के लिए भारत ने सबसे पहले कदम उठाया। एक जेट एयरवेज फ्लाइट की मदद से 242 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया, जिसमें ब्रसेल्स में फंसे जेट एयरवेज के 28 क्रू मेंबर्स भी शामिल थे। एयरलाइन ने चार विमान से एयरपोर्ट पहुंचे 800 लोगों को सुरक्षित निकालते हुए सड़क के जरिए बस से एम्सटर्डम पहुंचाया। 

 

Byte

VO 3-

भारत से एम्सटर्डम के लिए दो जेट विमानों ने उड़ान भरी। जिसमें एक विमान 242 भारतीयों को लेकर स्वदेश लौटा, दूसरा विमान नेवार्क रवाना हुआ।

 

 

BYT

 

BRIDGE PTC BRIDGE 1:

विदेशों में फंसे हुए नागरिकों की निकासी को अंजाम देना काफी मुश्किल काम है। संघर्ष के दौरान बदलती हुई परिस्थितियों में सरकार के लिए निकासी का खाका तैयार करना इतना भी आसान नहीं होता है। घरेलू मोर्चे पर फंसे हुए लोगों के परिजनों का दवाब स्थिति को और जटिल बना देता है। संकटग्रस्त देश के पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध नहीं होने की स्थिति में निकासी का काम और मुश्किल हो जाता है जैसा कि अफ़ग़ानिस्तान,लीबिया, यमन और इराक के मामले में हुआ। इन मामलों में राजनयिक स्तर पर वार्ता सबसे अहम भूमिका निभाती है। अफगानिस्तान और सूडान में तालिबान के कब्जे के दौरान भारत ने जटिल निकासी प्रक्रिया को अंजाम दिया।

 

SEGMENT 5:

(TYPEWRITER EFFECT)

ऑपरेशन संकट मोचन

दक्षिण सूडान संकट, जुलाई 2016

SLUG- जूबा की लड़ाई

 

 

VO 1 -

दक्षिण सूडान की राजधानी जुबा में राष्ट्रपति सलवा कीर की समर्थक सेना सूडान पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और उप राष्ट्रपति रीक माचार के प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच झड़पें हुई। इस हिंसक झड़पों में कम से कम 300 लोगों की मौत हो गई। जिसमें 33 आम नागरिकों सहित चीन के दो संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षक बल के जवान भी थे । मरने वालों में युगांडा के 11 नागरिकों भी शामिल थे। झड़पों के कारण लगभग 36,000 नागरिक शहर से भाग गए।

 

BYTE

 

भारत ने ऑपरेशन संकट मोचन की शुरुआत की

 

VO2 -

 

युद्धग्रस्त दक्षिण सूडान में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए भारत सरकार ने 13 जुलाई को ऑपरेशन संकटमोचन की शुरूआत की। अभियान के जरिए 153 भारतीयों और नेपाल के 2 नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया । तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री जनरल वी. के. सिंह सूडान से 14-15 जुलाई 2016 को फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए भारतीय वायुसेना के विमान से जूबा गए। दक्षिण सूडान में भारत के राजदूत श्रीकुमार मेनन और उनकी टीम ने जमीनी स्तर पर अभियान को अंजाम दिया। ऑपरेशन राहत के एक साल में ऑपरेशन संकटमोचन दूसरा सबसे बड़ा निकासी अभियान था। ऑपरेशन राहत के जरिए यमन से जुलाई 2015 में 4 हजार भारतीय नागरिकों और अन्य देशों के नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया था ।

 

 

BYTE

 

Segment 6:

(TYPEWRITER EFFECT)

लीबिया संघर्ष 2019

Slug- लीबिया विद्रोह

 

VO1 –

लीबिया में विद्रोह के कारण लंबे समय से शासक रहे तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी को उखाड़ फेंका गया और उनकी हत्या कर दी गई। गद्दाफी की मौत के बाद प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच सत्ता के लिए लड़ाई छिड़ गई। 4 अप्रैल 2019 को लीबियाई राष्ट्रीय सेना के ऑपरेशन डिग्नटी नामक सैन्य अभियान के शुरु होने के साथ संघर्ष और बढ़ गया।  

 

SLUG : बढ़ते तनाव के बीच भारत ने सीआरपीएफ की टुकड़ी को बाहर निकाला

 

Vo2 -

लीबिया में जमीनी स्तर पर सुरक्षा की स्थिति तेजी से बिगड़ती जा रही थी। अप्रैल 2019 में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सीआरपीएफ कर्मियों की एक पूरी टुकड़ी को संघर्षग्रस्त क्षेत्र से हटाने की घोषणा की । भारत सरकार ने बड़े पैमाने पर नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए बचाव अभियान शुरू किया। सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर कहा- ट्यूनीशिया में भारतीय दूतावास कल ही 15 सीआरपीएफ जवानों की पूरी टुकड़ी को सुरक्षित रुप से निकाला। मैं ट्यूनीशिया स्थित भारतीय दूतावास के शानदार काम की सराहना करती हूं।#Libya

 

(PULL THIS TWEET)

 

स्थिति बदतर होने के साथ, भारत सरकार ने संकट के बिगड़ कर लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की आशंका का पहले ही अनुमान लगा लिया। 

 

Byte

 

Bridge 2:

पीएम मोदी के कार्यकाल में भारत विशेष रुप से उन देशों में से एक रहा, जिसने काफी सफल तरीके से निकासी अभियान को अंजाम दिया- जो कि विदेश नीति में एक बड़े बदलाव को दिखाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी भूमि पर बंधक स्थिति और मानवीय संकटों से निपटने में काफी तेजी से काम किया। चाहे ये 2014 में तिकरित बंधक स्थिति की बात हो या 2016 में यमन सऊदी संघर्ष की बात हो मोदी सरकार ने दिखाया कि विदेशी धरती पर रह रहे उनके नागरिकों का जीवन अनमोल है और उन्हें किस्मत के सहारे नहीं छोड़ा जा सकता है। अब आपके सामने हम लेकर आ रहे हैं हाल में अंजाम दिए गए दो सबसे कठिन अफ़ग़ानिस्तान और यूक्रेन से सुरक्षित निकासी अभियनों की कहानी।

 

Segment 7:

(Typewriter effect)

1 मई, 2021

ऑपरेशन देवी शक्ति (अगस्त 2021)

Slug- तालिबान का हमला

 

VO 1-

1 मई 2021

अफ़ग़ानिस्तान से ज्यादातर अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद तालिबान और उसके सहयोगी गुटों ने व्यापक आक्रमण शुरू कर दिए। अफ़ग़ानिस्तान की सरकार के पतन के बाद तालिबान ने पूरे देश पर कब्जा कर लिया । इस बीच दोहा में शांति वार्ता चलती रही।

 

(AMBIENCE)

 

SLUG – काबुल पर कब्जा

 

VO 2 -

15 अगस्त 2021 को तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया और खुद को अफगानिस्तान का शासक घोषित किया। काबुल पर तालिबान के कब्जे के साथ ही पूरे देश में दहशत और अफरातफरी मच गई है। काबुल के लोग बड़ी संख्या में देश छोड़कर भागने के लिए हवाईअड्डे की ओर जाने लगे। अफरातफरी के इस माहौल में भारत सरकार को अपने नागरिकों की सुरक्षित बाहर निकालना था। भारतीय अधिकारी ऐसी उम्मीद जता रहे थे कि एक समय आएगा जब भारत इस पर फैसला लेगा कि अफ़ग़ानिस्तान में खुद को बनाए रखना है या बाहर निकालना है।

 

BYTE

 

SLUG - मानवीय संकट से निपटने के लिए भारत था तैयार

 

VO 4-

भारत ने अफगानिस्तान में मानवीय संकट की स्थिति के उभरने के साथ ही तेजी से निकासी अभियान शुरू करने के लिए एक खाका तैयार कर लिया था। भारत के सामने दो प्रमुख चिंताएं थीं। पहली, भारत की सीमा अफ़ग़ानिस्तान से सटती नहीं है जिस कारण निकासी अभियान के लिए एक बड़े स्तर पर सबका सहयोग चाहिए था। दूसरी, अफ़ग़ानिस्तान में भारत के पास सुरक्षा का कोई साधन नहीं था।

 

 

 

 

 

Byte

 

VO-5

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 अगस्त को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक में अधिकारियों को अफ़ग़ानिस्तान से सभी भारतीयों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही अफ़ग़ानी सिख व हिंदू अल्पसंख्यकों को भी शरण देने का निर्देश दिए जो भारत आना चाहते थे ।

 

Segment 8:

यूक्रेन-रूस संघर्ष

कीव का पतन

भारत ने ऑपरेशन गंगा की शुरुआत की (2022)

 

VO1-

यूक्रेन में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए ऑपरेशन गंगा मोदी सरकार का काफी चुनौतीपूर्ण अभियान था। इसी साल 15 फरवरी को यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने अपना पहला परामर्श जारी करके भारतीय नागरिकों से तुरंत देश छोड़ने को कहा।

 

VO 2-

सरकार द्वारा कई अपील के बावजूद लगभग 16 हजार से 20 हजार भारतीय नागरिक पूर्वी यूरोपीय देश में मौजूद रहे। इसके बाद मोदी सरकार ने पोलैंड, रोमानिया और हंगरी के जरिए नागरिकों को चार्टर्ड विमान से स्वदेश लाने के लिए 'ऑपरेशन गंगा' अभियान की शुरुआत की। इस अभियान की सबसे बड़ी मुश्किल बात थी कि 24 फरवरी से यूक्रेन का हवाई क्षेत्र बंद हो गया था।

 

 

 

VO 3-

ऐसी स्थिति में यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास ने पड़ोसी देशों- पोलैंड, हंगरी और रोमानिया के दूतावास से समन्वय कर निकासी के लिए सुरक्षित मार्ग बनाए।  ऑपरेशन गंगा' के तहत सबसे पहले भारतीयों को यूक्रेन के सीमावर्ती देशों में बस और दूतावास के मदद से व्यवस्था की गई गाड़ियों के माध्यम से हंगरी और रोमानिया लाया गया। फिर यहां से चार्टर्ड एयर इंडिया की उड़ानों से दिल्ली और मुंबई लाया गया । भारत सरकार ने निकासी अभियान के लिए चार मंत्रियों में हरदीप सिंह पुरी को हंगरी, ज्योतिरादित्य सिंधिया को रोमानिया और मोलदोवा, किरेन रीजीजू को स्लोवाकिया और जनरल वी. के. सिंह को पोलैंड भेजा।  

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची के अनुसार ऑपरेशन गंगा के तहत 30 उड़ानों के जरिए 5 फरवरी से 2 मार्च के दौरान कुल 18 हजार भारतीयों को यूक्रेन से सुरक्षित बाहर निकाला गया ।

 

 

Bytes survivors / EXPERTS

 

CLOSING

 

इन बचाव अभियानों से एक बात साफ हुई कि भारत आज देशवासियों के साथ दुनिया के लिए भरोसे का प्रतीक बनकर उभरा है तो उसकी बड़ी वजह है- प्रधानमंत्री मोदी का सशक्त नेतृत्व। प्रधानमंत्री मोदी के निर्णायक फैसलों और कूटनीति की वजह से दुनिया भर में भारत का कद बढ़ा है। लक्ष्य आधारित कूटनीति के कारण भारत की विदेश नीति में बहुत बड़ा बदलाव आया है। एक दशक की ऊहापोह और उपेक्षा के बाद प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने क्षेत्रीय मुद्दों का समाधान कर अपने प्रभाव को बढ़ाया। भारत की कूटनीति पर अब प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक व्यवाहरिकता की अलग छाप दिखाई देती है। युद्ध और संघर्ष के समय मानवीय सहायता पहुंचाकर भारत की कूटनीति एक अलग मुकाम हासिल कर रही है। 

 

GRAPHICS SEGMENT:- 

 

 

SEGMENT 1

 

HEADER - आईएसआईएस की चंगुल में फंसी भारतीय नर्सें

 

 

-- 30 जून- भारतीय नर्सों को सीमा तक लाए आईएसआईएस आतंकी

-- सीमा से दूसरी बस के जरिए भारतीय बचाव दल तक नर्सों को लाया गया

-- भारतीय नर्सों को सैन्य कार्यालय और इरबिल एयरपोर्ट तक लाया गया

-- भारत सरकार ने नर्सों को लाने के लिए दिल्ली से इरबिल के लिए विशेष विमान भेजा

-- 2014 में संघर्षग्रस्त इराक से 46 भारतीय नर्सों को आईएसआईएस के चंगुल से छुड़ाया गया

 

 

TYPEWRITER EFFECT 

12 जून 2014- इराक युद्ध

आईएसआईएस हमला- भारतीय नर्सें फंसी

ISIS ONSLAUGHT- INDIAN NURSES TRAPPED

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SEGMENT 2 

 

HEADER- यमन से सुरक्षित निकासी

 

-- नौसेना और वायुसेना को किया गया तैनात

-- 1 अप्रैल 2015: अदन बंदरगाह से समुद्र के रास्ते निकासी अभियान

-- 3 अप्रैल 2015: साना से वायुसेना और एयर इंडिया ने बचाव अभियान शुरु किया

-- यमन मे सऊदी अरब के हमले के बीच निकासी अभियान किया गया

-- 4,500 से ज्यादा भारतीय और 960 विदेशी नागरिक निकाले गए

-- 41 से ज्यादा देशों के विदेशी नागरिकों को निकाला गया

-- 1,500 यात्री क्षमता वाले एमवी कवरत्ती और एमवी कोरल अदन भेजे गए

-- एयर इंडिया के दो एयरबस ए320 मस्कट भेजे गए

-- 1 अप्रैल 2015: आईएनएस सुमित्रा 349 फंसे भारतीयों को निकालने अदन पहुंचा

-- दो C-17 ग्लोबमास्टर की 9 उड़ानों से मुंबई और 2 उड़ानों से कोच्चि वापस पहुंचे भारतीय

-- भारतीय नौसेना ने आईएनएस सुमित्रा को अदन बंदरगाह पर फिर से तैनात किया

-- भारतीय नौसेना ने आईएनएस मुंबई और आईएनएस तरकश को भारतीय जहाजों और विमानों की सुरक्षा के लिए भेजा

 

 

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TYPEWATER EFFECT

ऑपरेशन राहत, मार्च 2015    यमन संकट typewriter effect 

 

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SEGMENT 3 

header – 2015- ऑपरेशन मैत्री- नेपाल भूकंप

 

-- इल्युशिन-II 76, C-130J हरक्यूलिस, C-17 ग्लोबमास्टर, एमआई-17 विमान भेजे गए

-- एनडीआरएफ की दस टीमें नेपाल भेजी गई

-- भारतीय वायुसेना के 10 अतिरिक्त विमान राहत सामग्री के साथ भेजे गए

-- इसके तुरंत बाद भारत ने 43 टन राहत सामग्री भेजी

-- भारतीय वायुसेना ने 500 से ज्यादा नागरिकों को सुरक्षित निकाला

-- पारामेडिक स्टॉफ, इंजीनियरिंग टास्क फोर्स, एनडीआरएफ, मेडिकल पेशेवर भेजे गए

-- 27 अप्रैल 2015 तक 12 उडानों के जरिए 1,935 भारतीय नागरिक सुरक्षित निकाले गए

-- 18 मेडिकल टीमें तैनात की गई

-- भारतीय सेना ने सड़क और मलबा साफ करने के लिए मशीनों के साथ 10 इंजीनियर टास्क फोर्स को तैनात किया

 

 

TYPEWRITER EFFECT  

25 अप्रैल 2015, 11:56 स्थानीय समय

भारत का नेपाल में ऑपरेशन मैत्री

नेपाल भूकंप

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segment 4 

Typewriter effect

22 मार्च 2016

ब्रसेल्स में आत्मघाती धमाका

 

header- आत्मघाती हमलों से दहला ब्रसेल्स

-- 2016 का ब्रसेल्स हमला इस्लामिक स्टेट का समन्वित आतंकी हमला

-- जैवनटेम हवाई अड्डे पर दो और मालबीक मेट्रो स्टेशन पर एक धमाका

-- 32 नागरिक और 3 हमलावर मारे गए, 300 से ज्यादा लोग हुए घायल

-- तलाशी के दौरान एयरपोर्ट पर बम पाया गया

-- आईएसआईएल ने हमले की ली जिम्मेदारी

-- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बेल्जियम पर सबसे खतरनाक हमला

-- बेल्जियम सरकार ने तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की

-- भारत ने हमले के तुरंत बाद अपने नागरिकों की निकासी के लिए कदम उठाया

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SEGMENT 5

alpha GFX

HEADER- ऑपरेशन संकट मोचन

 

-- दक्षिण सूडान से भारतीय और अन्य विदेशी नागरिकों के लिए भारतीय वायुसेना का अभियान

-- 2016 के जूबा संघर्ष के मद्देजनर अभियान को अंजाम दिया गया

-- दक्षिण सूडान में थे करीब 600 भारतीय

-- जूबा से 450 और देश के अन्य भागों से फंसे भारतीयों को निकाला गया

-- भारतीय वायुसेना के दो C-17 ग्लोबमास्टर को निकासी के लिए तैनात किया गया

-- 15 जुलाई 2016 को जूबा से पहला विमान 10 महिलाओं और 3 बच्चों समेत 140 भारतीयों को लेकर उड़ा

-- 16 जुलाई को केरल के तिरुवनंतपुरम में विमान उतरा

 

 

 

 

TYPE WRITER EFFECT

 

भारत ने ऑपरेशन संकट मोचन की शुरुआत की

दक्षिण सूडान संकट, जुलाई 2016

 

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SEGMENT 6 

HEADER:  लीबिया विद्रोह

 

SUB HEADER: अप्रैल 2019

 

-- लीबियाई राष्ट्रीय सेना का ऑपरेशन डिग्नटी नामक सैन्य अभियान – पश्चिमी लीबिया अभियान

-- तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सीआरपीए की टुकड़ी को निकालने की घोषणा की

-- भारत सरकार ने लीबिया के लोगों को बचाने की योजना की शुरुआत की

-- भारत सरकार ने संकट के बिगड़कर लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष का पहले ही अनुमान लगा लिया

 

 

TYPEWRITER EFFECT

लीबिया संघर्ष 2019

लीबिया विद्रोह

 

SLUG 

बढ़ते तनाव के बीच भारत ने सीआरपीएफ टुकड़ी को बाहर निकाला

 

लीबिया विद्रोह

 

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SEGMENT 7 

Type writer effect

1 मई 2021

ऑपरेशन देवी शक्ति (अगस्त 2021)

 

header – भारत ने ऑपरेशन देवी शक्ति की शुरुआत की

 

 -- 1 मई 2021- तालिबान और सहयोगी आतंकी गुटों ने अमेरिकी सेना की वापसी के बाद हमले शुरु किए

-- काबुल पर तालिबान के कब्जे के एक दिन बाद ऑपरेशन देवी शक्ति शुरु हुआ

-- 16 अगस्त: भारत ने 40 भारतीयों को काबुल से दिल्ली लाकर निकासी अभियान शुरु किया

-- 17 अगस्तः भारत ने काबुल से भारतीय दूतावास के कर्मचारियों को सुरक्षित निकाला

-- 22 अगस्तः भारत ने तीन उड़ानों के जरिए दो अफ़ग़ानी सांसद समेत 392 लोगों को वापस लाया

-- 24 अगस्तः अफ़ग़ानिस्तान से अल्पसंख्यक समुदाय के 74 लोगों की निकासी हुई

-- 24 अगस्तः गुरु ग्रंथ साहिब के तीन स्वरूपों को भारत लाया गया

-- 10 दिसंबरः गुरु ग्रंथ साहिब की दो प्रतियां सिख प्रतिनिधिमंडल वापस लेकर लौटे

-- ऑपरेशन देवी शक्ति के तहत 438 भारतीयों समेत 565 लोगों को निकाला गया

-- विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस अभियान को कठिन और जटिल अभियान बताया

-- काबुल से 107 भारतीयों, 23 अफ़ग़ानी सिख और हिन्दू सहित 168 लोगों को दिल्ली के नजदीक हिंडन एयरबेस लाया गया

-- वायुसेना ने C-17 भारी वजन ढोने वाले सैन्य विमान को लगाया

 

 

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SEGMENT 8

 

 

24 फरवरी 2022

रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने आम लोगों की तैनाती का आदेश दिया

 

 

header – भारत ने यूक्रेन से भारतीय को निकालने के लिए ऑपरेशन गंगा की शुरुआत की

 

-- 15 फरवरीः यूक्रेन के भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों को तत्काल देश छोड़ने का पहला परामर्श जारी किया

-- पूर्वी यूरोपीय देश में अनुमानित 16 हजार से 20 हजार भारतीय नागरिक फंसे थे

-- मोदी सरकार ने ऑपरेशन गंगा नामक निकासी अभियान शुरु किया

-- पोलैंड, रोमानिया और हंगरी से भारतीयों को लाने के लिए चार्टर्ड विमान भेजे गए

-- यूक्रेन की हवाई सीमा को यात्री विमानों के लिए 24 फरवरी से बंद कर दिया गया

-- यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास ने पोलैंड, रोमानिया और हंगरी के दूतावासों से तालमेल कर सुरक्षित निकासी मार्ग बनाए

-- ऑपरेशन गंगा के तहत भारतीयों के पहले जत्थे को यूक्रेन से सीमावर्ती देशों में लाया गया

-- भारतीयों को एयर इंडिया के चार्टर्ड विमानों के जरिए दिल्ली और मुंबई तक लाया गया

-- भारत सरकार ने 4 केंद्रीय मंत्रियों- हरदीप सिंह पुरी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, किरेन रीजीजू और जनरल वी. के. सिंह को भेजा

-- भारतीय केंद्रीय मंत्रियों को हंगरी, रोमानिया व माल्दोवा, स्लोवाकिया और पोलैंड भेजा गया

 


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