बुधवार, 11 मार्च 2026

आयुष्मान भारत योजना

 

आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 महीने में बने दो करोड़ लोगों के ई-कार्ड

 

तृतीयक स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिक और निवारक सुविधा से जोड़ने पर दे रहे हैं ध्यान

स्पेशल ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल से लाभार्थियों को योजना का मिलेगा लाभ

योजना से धोखाधड़ी और जालसाजी करने वालों से निपटना अहम चुनौती

शिक्षा के अभाव में योजना के बारे में लोगों को बताना और जागरूक करना भी एक चुनौती

 

आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सेवा योजना है जिसकी औपचारिक शुरूआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 सितंबर 2018 को की थी। इसके तहत 10 करोड़ परिवारों यानि 50 करोड़ लोगों को सालाना 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा दी जा रही है। इस योजना से देश की 40 फीसदी जनसंख्या को लाभ मिलेगा जो स्वास्थ्य सेव का खर्च वहन नहीं कर सकती है। दिसंबर 2018 में देश के 33 राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के साथ योजना लागू करने के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए थे। पिछले 150 दिनों में आयुष्मान भारत योजना ने गरीबों को उपलब्ध स्वास्थ्य सेवा के तरीके में भारी बदलाव किया है। इस संदर्भ में दैनिक जागरण के संवाददाता सर्वेश्वर सर्वेश ने प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. इंदु भूषण से बातचीत की।

 

आयुष्मान भारत योजना को शुरू हुए 150 दिन पूरे हो गए है। अब तक इस योजना की क्या उपलब्धियां रही है?

 

आयुष्मन भारत योजना के 150 दिन पूरे हो गए है और इसके पांच महीने भी पूरे हो गए है। 23 सितंबर को आयुष्मान भारत योजना की शुरूआत की थी। पांच महीने में इस योजना को काफी संवेग मिला है जिससे कि हमलोग काफी संतुष्ट है। आजतक लगभग 13 लाख लोग इसमें निबंधित हो चुके है और इसमें 10 से 15 हजार लोगों को इलाज दे रहे हैं तो इस हिसाब से हर 8 सेकंड में एक व्यक्ति को लाभ दिया जा रहा है। अभी तक 1.87 करोड़ लोगों को ई-कार्ड दिए हुए है। हर रोज करीब 4-5 लाख लोगों को ई-कार्ड दिए जाते है तो हमलोग तीन दिन के अंदर करीब दो करोड़ का आंकड़ा पार कर जाएंगे। हमारे सिस्टम में हर 10 सेकंड में एक ई-कार्ड दिया जा रहा है। करीब 15 हजार अस्पताल इस योजना में इम्पैनेल्ड है और पंजीकृत अस्पतालों में पचास प्रतिशत निजी अस्पताल है, निजी अस्पतालों की भागीदारी को लेकर हम काफी उत्साहित है। अभी इस योजना के पांच महीने ही हुए है और हमें काफी दूर जाना है। इस समय हमारा फोकस इस योजना को घर-घर तक पहुंचाने पर है। लाभार्थियों को इस योजना के बारे में जानकारी होनी चाहिए। दूर-दराज के लोगों, आदिवासी इलाके में रहने वाले लोगों तक इस योजना को पहुंचाना हम लोगों के लिए चुनौती है। इसके लिए हमलोग काम को काफी आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। दूसरी चुनौती है कि कैसे निजी क्षेत्र के अस्पतालों को इस योजना से जोड़ा जाए। निजी अस्पतालों को इस योजना से जुड़ने में जो संशय रहता है जैसे इसमें उपचार की कीमत कम होती है या उनको भुगतान समय पर मिलेगा या नहीं- इस तरह की भ्रांतियों को दूर करना चाहते है। बड़े-बड़े अस्पतालों की श्रृंखला है, वो न केवल इस योजना से जुड़े है बल्कि ये अस्पताल टियर-टू और टियर-थ्री शहरों में इस तरह के अस्पतालों को खोलकर अपने नेटवर्क को बढाये, जिससे कि हम नागरिकों को ये सुविधा दे पाएं। इस योजना के जो लाभार्थी है, वहां पर सुविधाओं की बहुत कमी है जिसे दूर करना बहुत जरूरी है। सरकारी अस्पतालों के काम को जारी रखने की जरूरत तो है ही, लेकिन निजी अस्पतालों को लाने की जरूरत है। 

 

दूर-दराज के इलाकों में सरकारी अस्पताल या निजी नर्सिंग होम में चिकित्सा की अत्याधुनिक सुविधा नहीं है तो सरकार इस योजना के विस्तार के लिए क्या रही है?

 

आयुष्मान भारत की योजना गंभीर बीमारी से ग्रसित लोगों के लिए है। हमारा मुख्य फोकस तृतीयक देखभाल पर है। इसलिए छोटे शहरों में ऐसे अस्पताल या नर्सिंग होम जहां पर सर्जरी और एनीस्थिसिया की सुविधा है वो भी हमारे साथ पंजीकृत हुए है। गरीबों को गुणवत्तापूर्ण सेवा मुहैया कराना तीसरी चुनौती है क्योंकि ये योजना गरीब लोगों के लिए है तो इसके लिए हमलोग प्रयत्न करेंगे। इसके लिए हम स्पेशल ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल बनाना चाहते है जिसके तहत किसी बीमारी में किस तरह की सुविधा देनी चाहिए, कितने दिन दवा देनी चाहिए, कितने दिन अस्पताल में रखना चाहिए- इन सबों को परिभाषित करते हुए हम गुणवत्तापूर्ण सेवा को रेखांकित करेंगे और फिर इस स्पेशल ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल को लागू करेंगे। इस पर स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के साथ काम कर रहे हैं और हर एक बीमारी का ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल बना रहे हैं। इस पर पहले भी काम हुआ है और इसको और आगे बढ़ाया जा रहा है। इस योजना के साथ चौथी चुनौती धोखाधड़ी और गलत उपयोग की है, इसके लिए हम चाहते है कि योजना का पूरा लाभ लाभार्थी की सेवा में जाए। अगर पैसे की चोरी होती है तो योजना की गुणवत्ता भी कम होगी, तो इस बात पर हमारा ज्यादा से ज्यादा ध्यान रहेगा। धोखाधड़ी पाने की स्थिति में हम सख्त से सख्त कार्रवाई करेंगे जिससे कि और कोई व्यक्ति इस रास्ते पर नहीं चले। इस पर हमलोग का मुख्य ध्यान रहेगा। इसके अलावा आखिरी बात ये है कि हम लाभार्थियों को तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल के तहत जो उपचारात्मक सेवा दे रहे है उसको हम प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा और निवारक स्वास्थ्य सुविधा से कैसे जोड़े। इसके लिए जो हेल्थ एंड वेलनेस केंद्र बनेंगे उनके साथ कैसा संबंध रहेगा- इस पर हम ध्यान दे रहे हैं। उदाहरण के तौर पर इस योजना के तहत किसी व्यक्ति का इलाज हुआ तो उसके घर जाने के बाद उसकी देखभाल कौन करेगा। इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं और हेल्थ एंड वेलनेस केंद्र का जो नेटवर्क है, वो इस योजना से कैसे जुड़ेगा- इस पर सरकार काम कर रही है और अब तक जो काम हुआ है काफी अच्छा हुआ है और उसका परिणाम हमलोग कम समय में देख रहे है।

 

योजना के लाभार्थियों को जो नकदीरहित सुविधा मिल रही है तो इसमें इलाज के उपरांत लाभार्थियों को दवा मिलने का क्या प्रावधान है?

हमारा जो पैकेज है उसमें अस्पताल से लाभार्थियों को डिस्चार्ज होने के बाद 15 दिनों तक की दवा देने व्यवस्था की गई है। इससे ज्यादा दिन की दवा की जरूरत है तो इसका अलग से प्रावधान होगा लेकिन अभी 15 दिन तक का खर्च इस योजना में शामिल है।

 

आयुष्मान भारत योजना को 150 दिन पूरे हो गए है। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?

 

आयुष्मन भारत योजना के 150 दिन पूरे हो गए है और इसके पांच महीने पूरे हो गए है। 23 सितंबर को आयुष्मान भारत योजना की शुरूआत की थी। पांच महीने में इस योजना को काफी संवेग मिला है जिससे कि हमलोग काफी संतुष्ट है। आजतक लगभग 13 लाख लोग इसमें निबंधित हो चुके है और इसमें 10 से 15 हजार लोगों को इलाज दे रहे हैं तो इस हिसाब से हर 8 सेकंड में एक व्यक्ति को लाभ दिया जा रहा है। अभी तक 1.87 करोड़ लोगों को ई-कार्ड दिए हुए है। हर रोज करीब 4-5 लाख लोगों को ई-कार्ड दिए जाते है तो हमलोग तीन दिन के अंदर करीब दो करोड़ का आंकड़ा पार कर जाएंगे। हमारे सिस्टम में हर 10 सेकंड में एक ई-कार्ड दिया जा रहा है। करीब 15 हजार अस्पताल इस योजना में इम्पैनेल्ड है और पंजीकृत अस्पतालों में पचास प्रतिशत निजी अस्पताल है, निजी अस्पतालों की भागीदारी को लेकर हम काफी उत्साहित है। अभी इस योजना के पांच महीने ही हुए है और हमें काफी दूर जाना है। इस समय हमारा फोकस इस योजना को घर-घर तक पहुंचाने पर है। लाभार्थियों को इस योजना के बारे में जानकारी होनी चाहिए। दूर-दराज के लोगों, आदिवासी इलाके में रहने वाले लोगों तक इस योजना को पहुंचाना हम लोगों के लिए चुनौती है। इसके लिए हमलोग काम को काफी आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। दूसरी चुनौती है कि कैसे निजी क्षेत्र के अस्पतालों को इस योजना से जोड़ा जाए। निजी अस्पतालों को इस योजना से जुड़ने में जो संशय रहता है जैसे इसमें उपचार की कीमत कम होती है या उनको भुगतान समय पर मिलेगा या नहीं- इस तरह की भ्रांतियों को दूर करना चाहते है। बड़े-बड़े अस्पतालों की श्रृंखला है, वो न केवल इस योजना से जुड़े है बल्कि ये अस्पताल टियर-टू और टियर-थ्री शहरों में इस तरह के अस्पतालों को खोलकर अपने नेटवर्क को बढाये, जिससे कि हम नागरिकों को ये सुविधा दे पाएं। इस योजना के जो लाभार्थी है, वहां पर सुविधाओं की बहुत कमी है जिसे दूर करना बहुत जरूरी है। सरकारी अस्पतालों के काम को जारी रखने की जरूरत तो है ही, लेकिन निजी अस्पतालों को लाने की जरूरत है। 

 

इसके अलावा छोटे शहरों और गांवों में इस योजना को किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है?

लोगों के बीच शिक्षा के अभाव के कारण आयुष्मान भारत योजना की जानकारी नहीं होना हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है। लोगों को इस योजना के बारे में बताना और इसका लाभ उन तक पहुंचाना- इस दिशा में हम काम कर रहे हैं। दूसरा क्षमता निर्माण का है। अस्पतालों में जिन आरोग्य मित्रों की नियुक्ति की गई है उनका प्रशिक्षण भी जरूरी है और इसके साथ साथ इस योजना को लेकर डॉक्टरों को भी विशेष प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है।

 

गांव या प्रखंड स्तर पर लोगों को आयुष्मान भारत योजना के बारे में जानकारी देने के लिए कोई जन अभियान चल रहा है या भविष्य में ऐसा करने की सरकार की पास ऐसी कोई योजना है क्या?

 

इसके लिए हम अस्पतालों से जगह-जगह पर योजना की जानकारी देने के लिए होर्डिंग लगाने के लिए कहा है। इसके साथ ही योजना की जानकारी हिन्दी और अन्य भाषाओं में भिजवा रहे है जिससे आम जन इस योजना के बारे में जान सके और इसका लाभ उठा सके। ये सब काम हो रहे हैं लेकिन इस दिशा में और काम करने की जरूरत है।

 

आयुष्मान योजना के लिए जो ई-कार्ड जारी किए जा रहे हैं क्या वे जरूरी है?

 

लाभार्थियों को ई-कार्ड उनकी तसल्ली के लिए दिया गया है, लेकिन कार्ड की आवश्यकता नहीं है। अगर किसी व्यक्ति का नाम सूची में है तो अस्पताल जाकर कार्ड मुफ्त में बन जाएगा और इलाज मुफ्त में हो जाएगा। इस योजना के लिए कार्ड जरूरी नहीं है।

 

इस योजना के लाभार्थियों के चयन के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाया गया है लेकिन शहरी इलाकों में रहने वाले ऐसे लोग जो आर्थिक रूप से कमजोर है, वो इसका हिस्सा नहीं बन पाए है।

 

ये हमारे सामने सबसे बड़ी बाधा है। सिर्फ शहरी क्षेत्र ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के भी कई लोग है जो इस योजना के अंतर्गत नहीं आते है। पिछली जनगणना हुए आठ साल हो गए है और तब से परिस्थितियां काफी बदली है। हमने इस योजना से अभी और लोगों को नहीं जोड़ रहे है अभी जो लोग इस योजना से जुड़े है उन्हीं पर हम ध्यान केंद्रित कर रहे है। जो लोग इस योजना में शामिल नहीं हुए है उन पर हम भविष्य में ध्यान देंगे। इस योजना को लेकर राज्य सरकार ध्यान दे रही है। राज्य सरकारों ने जो लोग छूट गए है उनको अपनी योजना बनाकर जो़ड़ रहे है। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में पीएम-जय के अलावा सीएम-जय योजना बनाई है जिसके तहत कई लोगों को जोड़ा है। इसके अलावा बाकी राज्य भी अपनी तरफ से लोगों को जोड़कर अपने पैसे से इस योजना का लाभ अपनी जनता को दे रहे है जो कि एक अच्छा कदम है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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