Vo 1 TW EFFECT …24 फरवरी 2022 (over all
dramatic)
< यूक्रेन हुआ
बर्बाद और पस्त – कीव पर हमला – युद्ध ने पश्चिम और बाकी दुनिया को पूरी तरह से
बांटा >
2022 का फरवरी महीना....
रूस-यूक्रेन युद्ध पूरी दुनिया की सुर्खियों में छाया रहा... यूक्रेन के पांव उखड़ने
लगे। रूस के हमले से दोनों देशों को काफी नुकसान हुआ। सामने आया यूरोप में दूसरे
विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा शरणार्थी संकट। यूक्रेन के करीब 75 लाख लोगों को
देश छोड़ना पड़ा। रूस को भी सबसे बड़े प्रवासी संकट का सामना करना पड़ा। जंग के
कारण विश्व को खाद्य संकट का सामना करना पड़ा।
.(ambience / sound/ clashes)
आने वाले महीनों में रूस और यूक्रेन के बीच शुरु हुई
जंग पूरे तरह से युद्ध में बदल गई। दुनिया दो धड़ों में बंट गई। सात महीने से
ज्यादा का समय हो गया... लेकिन युद्ध के खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। (WAR SHOTS /
AMBIENCE BREAK)
Vo2 (latest)
रूस ने युद्ध में अपने
कब्जे में लिए हुए दोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसोन और ज़ापोरिज़्ज़िया
(map location alpha) का जनमत संग्रह कर विलय कर
लिया। पश्चिमी देशों ने इस कदम की व्यापक निंदा की। रूस और यूक्रेन के बीच रूस और
पश्चिमी देशों के बीच हमले और जवाबी हमले बेरोकटोक जारी है। रूस के खिलाफ खासतौर
पर अमेरिका और उसके सहयोगी देश खड़े हैं। युद्ध वाले इलाकों में रूस और यूक्रेन के
नक्शे हर सेकंड बदल रहे हैं और दोनों देशों के तरफ से हमले कम होने के संकेत नहीं
मिल रहे हैं। 7 महीने से ज्यादा का समय हो गया है। युद्ध ने दुनिया को परोक्ष रुप
में बांट दिया और गुटों में राजनीति होने लगी। प्रमुख शक्तियों ने खुले तौर पर
किसी न किसी के पक्ष में आ गई।
Byte expert
युद्ध की विभीषिका/ खत्म होने का कोई नाम नहीं
VO3 < यूक्रेन और रूस से भारत कर रहा शांति की वकालत
<-VO SLUG वैश्विक मंचों पर पीएम की शांति की वकालत >
पहले हमले के 48 घंटे के भीतर यूक्रेन ने भारत का
दरवाजा खटखटाया... हस्तक्षेप करने की मांग की... एक तरह से मध्यस्थता करने की बात
की... यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भारत के प्रधानमंत्री से बात की।
UKRAINE ENVOY PC BYTE (FEB END )
Zelensky shots with PM FILE
युद्ध के पहले दिन से ही भारत ने सीधे तौर पर मध्यस्थ
की भूमिका नहीं निभाई। लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच की खाई को कम करने की कोशिश
की। प्रधानमंत्री मोदी ने कई मौकों पर रूस के राष्ट्रपति और यूक्रेन के राष्ट्रपति
जेलेंस्की से बात की। दोनों से बातचीत चालू रखने और संघर्षविराम करने को कहा। साथ
ही युद्ध को तुरंत खत्म करने को भी कहा। ये बातचीत अभी भी जारी है। भारत ने शुरु
से ही बिना पक्ष लिए हुए युद्ध खत्म करने को कहा। भारत को जो उचित लगा उसने वैसा
ही किया।
Bridge 1.
भारत कैसे अपने
रूख पर कायम रहा
जब यूक्रेन युद्ध से जूझ रहा था तो अंतर्राष्ट्रीय
मीडिया जगत के कुछ वर्गों और कुछ राजनयिक हलकों में अलग तरह का खेल चल रहा था।
भारत के तटस्थ होने या कुछ के अनुसार पक्ष नहीं लेने पर सवाल उठाए जा रहे थे। कुछ
पश्चिमी देशों ने रूस के यूक्रेन पर हमले को लेकर भारत के रूख पर नाखुशी जताई। कुछ
ने तो अपने हिसाब से इसे निंदा करने से इंकार बताया। भारत विरोधी लॉबी ने तो एक
बार फिर रूस-यूक्रेन पर भारत की गरिमापूर्ण और संतुलित पक्ष रखने के मुद्दे को
उछाला। भारत ने किसी गुट का हिस्सा न बनकर कईयों को खामोश कर दिया। रूस-यूक्रेन
युद्ध के पहले दिन से भारत अपने रूख पर कायम रहा।
SLUG < विश्व
पटल पर पीएम मोदी की शांति की वकालत >
TW EFFECT – 16 सितंबर 2022, एससीओ शिखर
सम्मेलन
VO4
उज्बेकिस्तान में एससीओ सम्मेलन
से इतर, प्रधानमंत्री मोदी ने अपना रूख साफ रखा... उन्होंने फिर दोहराया कि लोकतंत्र, कूटनीति एवं संवाद पूरे विश्व के लिए अहम
है- ये सीधे तौर पर पुतिन के लिए कही गई थी।
Byte
“मुझे यूक्रेन में संघर्ष पर
आपकी स्थिति के बारे में पता है, और
मुझे आपकी चिंताओं के बारे में पता है। हम चाहते हैं कि यह सब जल्द से जल्द खत्म
हो.”
VO-
रूस-यूक्रेन संघर्ष का सीधे तौर
पर जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति से साफ कहा और उन्हें
बताया कि आज का युग युद्ध का नहीं है और ये प्राथमिकता तय करने का समय है।
Byte
“ मैं जानता
हूं कि आज का युग युद्ध का युग नहीं है हमने फोन पर भी कई बार इस मसले पर आपसे बात
की है।,”
पुतिन ने कहा कि वे यूक्रेन
युद्ध को लेकर मोदी की चिंताओं को समझते हैं।
< SLUG
TW EFFECT क्वाड शिखर सम्मेलन
3 मार्च 2022 >
VO5
एक और वैश्विक मंच, यूक्रेन मुद्दे का वार्ता के जरिए
समाधान के लिए एक और बार जोरदार वकालत।
क्वाड देशों के शीर्ष नेतृत्व में
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, तत्कालीन आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मारिसन
और जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा शामिल.... यूक्रेन के घटनाक्रम पर चर्चा
की गई... इसके मानवीय परिणामों
पर भी चर्चा हुई।
SLUG < 1 मार्च 2022: पीएम ने यूरोपीय परिषद के
अध्यक्ष से की बात >
Vo 6-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूरोपीय परिषद से पहले संपर्क
करने वाले कुछ विश्व नेताओं में से एक थे। उन्होंने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष
चार्ल्स मिशेल से फोन पर बात की। प्रधानमंत्री ने यूक्रेन में बिगड़ती स्थिति और
मानवीय संकट पर अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने दुश्मनी को खत्म करने और फिर से
वार्ता करने की भारत की अपील को दोहराया। (Mitchel shots / European council)
Vo 7
B : पीएम ने
युद्ध रोकने के लिए दुनिया से की बात
प्रधानमंत्री मोदी के रूस-यूक्रेन तनाव को कम करने के
प्रयास दोनों युद्ध में लगे देशों तक सीमित नहीं थे। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की
दुश्मनी खत्म करने और कूटनीति और वार्ता के जरिए सुलझाने की अपील को बार-बार
दोहराया। साथ ही रूस और यूक्रेन के पड़ोसी देशों के भी बातचीत की। जंग में फंसे
भारतीयों की निकासी के लिए सुरक्षित रास्ता देने के लिए रूस-यूक्रेन के पड़ोसी
देशों से बात की।
(alpha gfx) पीएम मोदी ने हंगरी
के प्रधानमंत्री मार्क रट्ट, नीदरलैंड के प्रधानमंत्री से बाती की। प्रधानमंत्री
ने पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रेज डूडा से भी फोन पर बात की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति
इमैनुएल मैक्रों के साथ फोन पर बात की। प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाक गणराज्य के
प्रधानमंत्री एडुआर्ड हेगर से फोन पर बात की। प्रधानमंत्री मोदी ने रोमानिया के
प्रधानमंत्री निकोले-इओनेल सियुको से फोन पर बात की। उन्होंने भारतीय
नागरिकों को बिना वीजा के रोमानिया में प्रवेश करने और भारत से विशेष निकासी
उड़ानों की अनुमति देने में रोमानिया के कदम की सराहना की।
BRIDGE 2
< भारत ने गुटबाजी करने से किया इंकार >
भारत ने
गुटबाजी न कर अपनी हितों को प्राथमिकता दी। वैश्विक स्तर पर हो रहे भारी उथल-पुथल
के बीच भारत जैसे बड़े और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश पर पूरी दुनिया की नजर
टिकी हुई थी। और उससे भी ज्यादा बड़ी प्रधानमंत्री मोदी की अंतर्राष्ट्रीय साख थी।
रूस की निंदा करने से भारत के इंकार जैसे फेक नैरेटिव को बुरी तरह खारिज कर दिया
गया।
VO8 slug < भारत गुटबाजी का हिस्सा नहीं बना >
जब यूक्रेन युद्ध से जूझ रहा था तो अंतर्राष्ट्रीय
मीडिया जगत के कुछ वर्गों और कुछ राजनयिक हलकों में अलग तरह का खेल चल रहा था।
भारत के तटस्थ होने या कुछ के अनुसार पक्ष नहीं लेने पर सवाल उठाए जा रहे थे। कुछ
पश्चिमी देशों ने रूस के यूक्रेन पर हमले को लेकर भारत के रूख पर नाखुशी जताई। कुछ
ने तो अपने हिसाब से इसे निंदा करने से इंकार बताया। भारत विरोधी लॉबी ने तो एक
बार फिर रूस-यूक्रेन पर भारत की गरिमापूर्ण और संतुलित पक्ष रखने के मुद्दे को
उछाला। भारत ने किसी गुट का हिस्सा न बनकर कईयों को खामोश कर दिया। रूस-यूक्रेन
युद्ध के पहले दिन से भारत अपने रूख पर कायम रहा।
Byte
expert
< इस मुद्दे पर पीएम मोदी की
सराहना/ पीएम मोदी भारत – वैश्विक कूटनीति के केंद्रबिंदु >
VO SLUG TW EFFECT 27 सितंबर 2022
VO 9:
जब भी प्रधानमंत्री मोदी ने युद्ध को रोकने की बात की या रूस-यूक्रेन संघर्ष
को खत्म करने और शांति कायम करने पर अपने मन की बात रखी.... तो दुनिया ने उनको
सुना। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने प्रधानमंत्री मोदी की शांति की वकालत
वाली बात का जोरदार समर्थन किया।
BYTE- एंटनी ब्लिंकन
( मोदी द्वारा पुतिन को कही गई बात से हम
पूरी तरह सहमत है। )
TW EFFECT 1: 21 सितंबर 2022: ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने पीएम
मोदी की प्रशंसा की
VO 10- ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विश्व मंच पर प्रभावशाली तरीके से अपनी बात रखने के लिए पहचाना जाता है और रूसी नेतृत्व भी वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति का सम्मान करता है।
VO 11- फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पीएम
मोदी की तारीफ की और कहा कि वे सही थे जब उन्होंने कहा कि ये समय युद्ध का नहीं है।
BYTE MACRON
" भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सही कहा था कि यह समय युद्ध का नहीं है। यह पश्चिम से बदला लेने का समय नहीं है, या पूर्व के खिलाफ पश्चिम के विरोध का समय नहीं है। आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए यह हमारे संप्रभु समान देशों के साथ आने का समय है। ताकि हम हमारे सामने आने वाली चुनौतियों का सामना कर सकें।“ उन्होंने
ये बात न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 77वें सत्र में कही।
VO12
TW EFFECT :20 सितंबर 2022
VO-
अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन ने कहा कि प्रधानमंत्री
मोदी के बयान की तारीफ की और कहा ये बयान 'सिद्धांतों पर आधारित था जिन्हें वह सही और न्यायोचित मानते हैं
और अमेरिका उसका स्वागत करता है।
" मैं मानता हूं कि जो प्रधानमंत्री मोदी ने कहा वह 'सिद्धांतों पर आधारित था जिन्हें वे
सही और न्यायोचित मानते हैं तथा अमेरिका इसका स्वागत करता है और भारतीय नेता की यह
टिप्पणी सराहनीय है, जिससे रूस को यह संदेश दिया गया है
कि अब युद्ध समाप्त होने का समय आ गया है।“ व्हाइट हाउस द्वारा जारी बयान में उन्होंने ये बात कही।
VO13 TW EFFECT < मार्च 2022 ऑपरेशन गंगा....
पैनिक बटन- निकासी अभियान- ऑपरेशन गंगा>
यूक्रेन संकट से दुनिया की स्थिति ज्यादा बिगड़ने लगी....
ऐसे में दुनिया की प्रमुख शक्तियों ने सभी देशों से अपना रूख साफ करने को कहा।
भारत ने उस समय प्राथमिकताएं तय कर रखी थी। भारत ने युद्ध से तबाह हो रहे यूक्रेन
में अपने फंसे नागरिकों को निकालने की योजना बनाई। सुरक्षित निकासी के लिए ऑपरेशन
गंगा शुरु हुआ। ऐसा निकासी अभियान दुनिया में पहले न देखा गया, न अंजाम दिया गया। रूस
की दुनिया भर में आलोचना होती रही। भारत की निगाहें ऑपरेशन गंगा पर टिकी रही। जंग
के बीच 20 हजार भारतीय नागरिक फंसे थे। ऐसे कठिन काम को भारत ने अंजाम पर
पहुंचाया। पूरी दुनिया देखती रह गई।
OPERATION
GANGA BYTES
VO 14 < भारत ने पहुंचाई मानवीय सहायता >
--यूक्रेन के युद्धग्रस्त क्षेत्रों से भारतीयों की निकासी जोरों पर थी।
भारत केवल जंग में जुटे देशों के प्रमुखों से बात और
यूक्रेन में फंसे अपने लोगों को निकालने में ही नहीं लगा हुआ था। उससे भी ज्यादा
जरूरी भारत उन चंद देशों में से था जिसने यूक्रेन को मानवीय सहायता भेजी। सहायता
के तौर पर दवाएं, तंबू और अन्य जरूरी चीजों को भेजा गया।
VO 15 < सुरक्षा परिषद में भारत का साफ
रूख > BYTE FROM PREVIOUS
जनमत संग्रह के
बीच हुए घटनाक्रम की आंच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तक भी पहुंची। ( शुक्रवार,
30 सितंबर) भारत ने कब्जे के खिलाफ निंदा प्रस्ताव से दूरी बनाई रखी। पहले भी भारत
ने संयुक्त राष्ट्र में रूस के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर वोटिंग से तीन बार दूरी बनाए
रखी।
ये एक साहसिक कदम
था। कई मौकों पर भारत ने अपने रूख को साफ किया।
OLD BYTE plus NEW BYTE KAMBOJ 30
sept 2022
BRIDGE 3
भारत ने खुले तौर
पर अपना रूख रखा। अपने हितों के अनुसार फैसले लिए। भारत का रूख काफी साफ था। भारत
के बढ़ते प्रभाव के कारण इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। वर्तमान में
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत, कुछ विश्व शक्तियों के इशारे पर चलने को
तैयार नहीं है। अमेरिका और उसके सहयोगी जैसा चाहते हैं वैसा हो- इसके दिन भी लद
गए। बदलती स्थिति को समझने की जरूरत है। रूस-यूक्रेन संघर्ष ने इस बात को साबित भी
कर दिया है।
VO 16<< भारत को उपदेश की जरूरत नहीं >
......... महीने की दौरान दुनिया के कई बड़े नेताओं के दौरे
से दिल्ली में राजनयिक सरगर्मियां तेज हो गई थी। कईयों ने तो भारत आने की घोषणा भी
नहीं की थी। यूरोपीय संघ के अधिकारी भी उन दर्जन भर से ज्यादा विदेशी राजनयिकों
में शामिल थे जिन्होंने भारत का दौरा किया।
बाइट- डॉ. एस. जयशंकर, विदेश मंत्री
SLUG
- < भारत का दक्ष और संतुलित रवैया >
VO-17-
यूक्रेन युद्ध ने दुनिया को
दो प्रमुख गुटों में बांटा दिया है। इसमें ज्यादातर पश्चिमी देश शामिल है। ये भी
सामने आया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत पर सबका ध्यान खींचा चला आया।
भारत ने तटस्थ रहने की नीति अपनाई। लेकिन क्या भारत को इस नीति पर चलने से रोका
गया। यूरोप और अमेरिका के कुछ प्रमुख लोगों ने भारत को तटस्थता की नीति से दूर
करने की कोशिश की ताकि भारत पश्चिमी देशों के गुट में शामिल हो सके।
(PICK VO VISUALS FROM INDIA ON HIGH
TABLE)
. MODI BYTES /QUOTES INDIA FOR PEACE(EARLIER DOC)
VO 18<- भारत और यूरोपीय
संकट की नैतिकता >
भारत के लिए अपना
हित सर्वोपरि है। भारत का रूख साफ था- यूरोपीय संकट की नैतिकता में भारत को नहीं
फंसना नहीं था। भारत ने अपना रास्ता चुना... भविष्य का रास्ता चुना। जैसे जैसे जंग
तेज होती जा रही थी, वैसे वैसे ये स्पष्ट हो रहा था कि इस मामले में भारत का रूख न
केवल देश के हित में है ब्लिक ये नैतिक और संतुलित भी है।
BYTE EXPERT
VO 19 < युद्ध के बाद भारत की अहम भूमिका >
यूक्रेन संकट खत्म होने के बाद नई परिस्थितियों में भारत एक
बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। रूस और यूक्रेन के बीच केवल समझौता नहीं होगा
बल्कि रूस और पश्चिमी देशों के बीच भी बड़ी समझ सामने आएगी जिसमें प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यूरोप में शांति और स्थिरता बहाल करने में भारत सक्षम
होगा।
Byte
Expert
VO 20. Vo< भारत के लिए आगे
का रास्ता >
भारत
के आगे बढ़ने का रास्ता सामने आया है। भारत के प्रधानमंत्री ने बौद्धिक और
कूटनीतिक तरीके से अपने रुख को और अधिक साफ किया है। इसमें जरूरत पड़ने पर अमेरिका
और कई बड़े पश्चिम देशों को आईना दिखाना शामिल है। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत
ने यूरोपीय देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया है। अब ये साफ हो चुका है कि
दुनिया को भारत की पहले से कहीं ज्यादा जरूरत है। एक ऐसा भारत जो कि मजबूत है,
स्थिर है और लचीले रूख वाला है जो कि नेतृत्व करने को तैयार है।
Bytes experts
Conclusive ptc
भारत विश्व शक्ति बनने में सक्षम है। नई विश्व व्यवस्था
धीरे-धीरे सामने आ रही है। पूर्वी देश नई विश्व शक्ति बनने की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे
में भारत अपने राष्ट्रीय हितों के साथ मजबूती से खड़ा है। पहले से भी कहीं मजबूत।
भारत आत्मनिर्भर होने के प्रयासों को तेजी से बढ़ा रहा है। फिर रणनीतिक रूप से
स्वतंत्र होने से कोई नहीं रोक सकता। ऐसे समय में जब दुनिया पर परमाणु युद्ध का
खतरा मंडरा रहा है— प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत बदलती विश्व व्यवस्था
में साफ संदेश दे रहा है। भारत को किसी और की जरूरत नहीं है। भारत अपना पक्ष ले
सकता है। कोई भी बाहरी शक्ति अपनी राय नहीं थोप सकता। भारत को किसी सलाह या
मश्विरे की जरूरत नहीं..... भारत का मतलब देशहित पहले। इस पर कोई समझौता नहीं।
भारत अब अपना खुद भाग्य विधाता है।
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